बजट में करोड़ों की सौगात, फिर भी यहां झोपड़ी में लग रही क्लास

बजट में करोड़ों की सौगात, फिर भी यहां झोपड़ी में लग रही क्लास
class in cottage

Chandu Nirmalkar | Updated: 11 Mar 2016, 10:31:00 AM (IST) Kabirdham, Chhattisgarh, India

यह तस्वीर बयां कर रही है कि वनांचल आज भी शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। इसका सबसे बड़ा कारण शिक्षकों की कमी और स्कूल भवन का न होना ही है

एमडी सोनी. नेऊर. कबीरधाम. एक ओर तो सरकार हर वर्ष शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए की सौगात बजट में देती है वहीं लेकिन दूसरी ओर कई सरकारी स्कूल आज भी झोपडिय़ों में संचालित हो रहे हैं। कबीरधाम जिले के वनांचल में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। पंडरिया ब्लाक के स्कूलों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने की बात करने वाले अधिकारियों के दावे की हवा निकल रही है। वनांचल में संचालित होने वाले स्कूल आज भी झोपड़ी में संचालित हो रहा है।

यह तस्वीर बयां कर रही है कि वनांचल आज भी शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। इसका सबसे बड़ा कारण शिक्षकों की कमी और स्कूल भवन का न होना ही है। कबीरधाम (कवर्धा) पंडरिया विकासखंड के ऐसे अनेक ग्राम हैं, जहां झोपड़ी में स्कूल संचालित हो रहे हैं।

यह तस्वीर है कांदावानी पंचायत का है, जहां झोपड़ीनुमा स्कूल में बैठक प्राथमिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पंडरिया ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत कांदावानी में स्कूल भवन के अभाव में बच्चों को झोपड़ी में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने मजबूर होना पड़ रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों के लापरवाही के कारण कई भवन आज भी अधर में लटका हुआ है। इनमें स्कूल भवन भी शामिल है। पिछले 8 वर्षों से केवल नींव खोदकर छोड़ दिया गया है, लेकिन इसके पूर्णत: की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसके चलते बच्चों को पढ़ाने के लिए झोपड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। बांसाटोला, कान्हाखैरा, ठेंगाटोला सहित अन्य वनांचल गांवों में किसी न किसी कच्चे मकान को किराए में लेकर स्कूल संचालित किया जा रहा है।

भवन न शिक्षक
पंडरिया विकासखंड के वनांचल गांव न तो स्कूल भवन है और न ही शिक्षक। पहली से पांचवीं तक के बच्चों को एक झोपड़ी में बैठाकर शिक्षा दी जा रही है। सर्व शिक्षा अभियान इन स्थानों पर भवन निर्माण कराने के बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। भवन के अभाव में बच्चे झोपड़ी में बैठकर पढ़ाई करने मबजूर हैं। पर्याप्त संसाधन के अभाव में बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

राशि आहरित, मकान अटका
ग्रामीणों की मानें तो इन स्कूलों के निर्माण के लिए पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा 90-90 हजार रुपए की आहरित कर लिया है। वहीं पंडरिया के अधिकारियों द्वारा अधूरे निर्माण कार्य के लिए पुन: बजट रिवाईस किया गया, लेकिन  निर्माण अधर में है। ग्रामीणों का कहना है कि कठोर कार्रवाई के अभाव में पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही दिन-ब-दिन बढ़ते जा रही है। सर्व शिक्षा अभियान द्वारा भी अधूरे भवन को पूरा करने रुचि नहीं ले रहे हैं। राशि तो आबंटित कर दिया, लेकिन उसका सही उपयोग नहीं होने के कारण पढऩे वाले छात्रों को लाभ नहीं मिल रहा।

एक कमरे में पांच कक्षाएं
स्कूल भवन के अभाव में जहां झोपड़ी में स्कूल संचालित हो रहा है। वहीं पहली से लेकर पांचवीं तक के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इससे न केवल बच्चों को दिक्कत हो रही है, बल्कि शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति कांदावानी के साथ-साथ लाखाटोला, कान्हाखैरा, बाहपानी व भुरभुसपानी की है। बांसाटोला में मोहन के घर में, तो कान्हाखैरा में गंदलाल कच्चा मकान। वहीं ठेंगाटोला में पुराने व जर्जर मकान, तो भुरभुसपानी में अतिरिक्त कमरा में कक्षाएं संचालित हो रही है।

वैकल्पिक व्यवस्था के चलते घर में स्कूल संचालित किया जा रहा है। अतिरिक्त कक्ष के लिए राशि स्वीकृत किया जा चुका है। जल्द ही निर्माण प्रारंभ किया जाएगा।
एसके पांडेय,  जिला शिक्षा अधिकारी कबीरधाम

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