लोगों के दिलों में है एेसा खौफ कि रात ही नहीं दिन में भी नहीं निकलते घराें से बाहर

लोगों के दिलों में है एेसा खौफ कि रात ही नहीं दिन में भी नहीं निकलते घराें से बाहर
stray dog

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम में लोग दहशत में अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं, लोगों में इतना खौफ है कि रोत तो रात दिन में भी घर से बाहर निकलने से डरते हैं

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के कबीरधाम में लोग दहशत में अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं, लोगों में इतना खौफ है कि रोत तो रात दिन में भी घर से बाहर निकलने से डरते हैं। इनका कहर एेसा है कि 18 दिनों के भीतर करीब 38 लोगों का मौत से सामना हो चुका है और वे अस्पताल में भर्ती हैं।

कवर्धा शहर में कुत्तों की संख्या अधिक है। घुमंतू कुत्तों के कारण लोग बच्चों को बाहर निकालने से डरते हैं। गली-मोहल्लों में खाने की तलाश में कुत्ते घुमते रहे हैं। अधिकतर लोग इन्हीं घुमंतू कुत्तों के शिकार हो रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष मतलब एक वर्ष के अंतराल में 448 लोग जिला अस्पताल ईलाज के लिए पहुंचे। यह कुत्तों के शिकार हुए हैं। जबकि इसी माह 18 दिन अंतर ही 38 लोगों को कुत्तों ने काटा है। इसके कारण इन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन लगवाना पड़ा। शहर में कुत्तों के काटने की वारदात बढ़ती जा रही है। इस पर किसी तरह से लगाम नहीं लग रही। मुख्य रूप इस विषय पर किसी ने गौर ही नहीं किया है। न तो नगर पालिका प्रशासन और न ही पशु चिकित्सा विभाग। जबकि कुत्तों से खतरा हर मोहल्ले में मंडरा रहा है।

विभागों को कोई चिंता नहीं
घुमंतू कुत्तों को काबू में रखने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से नगर पालिका की है। साथ ही इनके काटने से किसी को नुकसान न हो इसके लिए कुत्तों को इंजेक्शन लगाने की जिम्मेदारी पशु चिकित्सा विभाग की है। लेकिन शहर में दोनों ही विभाग की जिम्मेदारों को लोगों की चिंता नहीं है। 

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