शादी-ब्याह के बाद खेती किसानी की तैयारी में जुटे किसान

शादी-ब्याह के बाद खेती किसानी की तैयारी में जुटे किसान

Satyanarayan Shukla | Updated: 14 May 2019, 10:09:29 PM (IST) Kawardha, Kabirdham, Chhattisgarh, India

अक्षय तृतीया (अक्ती त्योहार) के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह का कम होने लगा है। शादी-ब्याह निपटाने के बाद क्षेत्र के किसान अब प्री मानसून की तैयारी में लग गए है। घरों के छप्पर की मरम्मत के साथ-साथ बारिश में होने वाली परेशानी से बचने और कृषि काम की तैयारी में व्यस्त नजर आ रहे हैं।

कवर्धा/गुढ़ा@Patrika. अक्षय तृतीया (अक्ती त्योहार) के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह का कम होने लगा है। शादी-ब्याह निपटाने के बाद क्षेत्र के किसान अब प्री मानसून की तैयारी में लग गए है। घरों के छप्पर की मरम्मत के साथ-साथ बारिश में होने वाली परेशानी से बचने और कृषि काम की तैयारी में व्यस्त नजर आ रहे हैं।

कुछ घरों में शौचालय बनाने का काम
घर के पुरुष सदस्य बाजार से टीन शेड लाकर घर के छप्पर को ठीक कर रहे हैं। वहीं महिलाएं घर को लीपने पोतने में जुटी है। वहीं कुछ घरों में शौचालय बनाने का काम भी चल रहा है। सरकार की ओर से राशि मिलते ही लोगों का रुझान शौचालय निर्माण की ओर बढ़ा है। आमतौर पर धरतीपुत्र आषाढ़ आने तक मिजाई के कार्यों में लगे रहते थे, लेकिन अब हार्वेस्टर व थ्रेसर से फसलों की कटाई के चलते कम समय ही खेती किसानी का काम काज निपटा लेते हैं और आषढ़ आने के एक दो माह पहले ही नई फसल की तैयारी में जुट जाते हैं। वहीं हाइब्रीड क्वालिटी के बीजों का इस्तेमाल करने से किसानों का फसल जल्द ही तैयार हो जाती है। ऐसे में आषाढ़ में होने वाले कामकाज अब जेठ आने से पहले ही निपटाने में लगे हुए हैं।

कर्ज चुकाने की नहीं रही चिंता
जल्द फसल तैयार होने व किसानों के हाथ में पैसा आ जाने के साथ किसानों में इस बात की खुशी रही की इस साल सहकारी बैंकों का कर्ज चुकाने की चिंता से मुक्त हो गए है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही किसानों का कर्जा माफ कर दिया। अब किसान उस पैसे को किसी अन्य जरूरतों में लगा रहे हैं। गुढ़ा के किसान रामजी सिन्हा, मोहन जोशी, मथुरा जोशी, राजकुमार धृतलहरे, कृष्णा धुर्वे ने बताया कि इस बार गेहूं और चने का बाजार भाव खास नहीं रहा, लेकिन फसलों की पैदावार अच्छी रही है।

काम मिलने लगा है गांव में
बरसात आने से पहले घरों को दुरुस्त करने के चलते कारीगरों, टीन शेड व कच्ची ईटों का निर्माण करने वाले मजदूरों को भी काम मिलने लगा हैं। साथ ही बड़े शहर और कस्बों में लगी दुकानों पर सैनेटरी, घरेलू टीन, ईट-पत्थर, रेट, सीमेंट की भी मांग बढ़ गई है।

बदलाव भी देखने को मिल रहा

गांव की बहू बेटियां महाविद्यालय नहीं, तो हाई व मिडिल स्तर तक पढ़ाई पूरी कर लिए होते हैं। इसके चलते स्वच्छता को लेकर सजग हो रहे हंै। इसी सोच के चलते शादी ब्याह करने से पहले नई बहू आने के साथ घरों में शौचालय सहित अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं।

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