महाअष्टमी आज: आधी रात तीन देवी मंदिरों से निकलेगी खप्पर, देश में सिर्फ यहां कायम है ये परंपरा

महाअष्टमी आज: आधी रात तीन देवी मंदिरों से निकलेगी खप्पर, देश में सिर्फ यहां कायम है ये परंपरा
महाअष्टमी आज: आधी रात तीन देवी मंदिरों से निकलेगी खप्पर, देश में सिर्फ यहां कायम है ये परंपरा

Bhawna Chaudhary | Updated: 06 Oct 2019, 09:34:04 AM (IST) Kawardha, Kabirdham, Chhattisgarh, India

कवर्धा में तीन सिद्धपीठ मंदिर और एक देवी मंदिरों से खप्पर निकाला जाता है।

कवर्धा . शारदीय नवरात्रि में इन दिनों देशभर मेंं त्योहार का माहौल है। देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। यह भीड़ रविवार की मध्यरात्रि हजार गुना बढ़ जाएगी, जब छत्तीसगढ़ में स्थित ये तीन देवी मंदिरों से खप्पर निकालेगी।

देवी का आह्वान कर खप्पर निकालने की धार्मिक परंपरा कई सदी पुरानी है। कवर्धा के तीन देवी मंदिरों में यह परंपरा को आज भी कायम है। शारदीय नवरात्रि में नगर के मां दंतेश्वरी मंदिर, मां चण्डी मंदिर और मां परमेश्वरी मंदिर से मध्यरात्रि को खप्पर निकाली जाती है, जबकि क्वांर नवरात्रि में दो ही मंदिरों से खप्पर निकाली जाती है। रविवार को सत्ती वार्ड स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर, देवांगन पारा स्थित मां चण्डी मंदिर और मां परमेश्वरी मंदिर से खप्पर निकाली जाएगी।

मध्यरात्रि 12.15 बजे मां दंतेश्वरी मंदिर से पहला खप्पर अगुवान की सुरक्षा में निकलेगा। इसके 10 मिनट बाद ही मां चण्डी से और फिर 10 मिनट के अंतराल में मां परमेश्वरी से खप्पर निकाली जाएगी, जो नगर भ्रमण करेगी। विभिन्न मार्गों से गुरजते हुए मोहल्लों में स्थापित 18 मंदिरों के देवी-देवताओं का विधिवत आह्वान किया जाता है।

यह होता है खप्पर
मिट्टी से बने काले रंग के पात्र में आग प्रज्ज्वलित रहती है। यह पात्र बेहद गर्म रहती है जिसे एक पंडा खुले हाथ में रखा रहता है जिसे खप्पर कहते हैं। वहीं एक हाथ में तलवार रखता है। खप्पर के मार्ग में कोई बाधा न आए इसके लिए एक अगुवान होता है जो सामने तलवार लहराते हुए चलता है। वहीं मंदिर के पंडा और समिति के लोगों का दल साथ होता है जो शहर से गुजरते समय मंदिरों के सामने पूजा-पाठ करते हैं।

लोगों के लिए कौतूहल का विषय
अष्टमी की रात्रि कवर्धा शहर में मेले से माहौल रहता है, क्योंकि खप्पर के दर्शन करने दूर- दूर से लोग पहुंचते हैं। अन्य शहर के लोगों के लिए यह कौतुहल का विषय रहता है कि आखिर खप्पर है क्या।इस दौरान काफी सुरक्षा व्यवस्था रहती है।अष्टमी की रात्रि कवर्धा शहर में मेले से माहौल रहता है, क्योंकि खप्पर के दर्शन करने जिलेभर से लोग पहुंचते हैं।

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