मनमानी: NO कोविड रिपोर्ट, NO बेड की पॉलिसी चला रहे निजी अस्पताल, बिना उपचार बेमौत मरने को मजबूर लोग

कोरोना के चक्कर में अन्य बीमारी से जूझ रहे मरीजों की तकलीफ बढ़ गई है। निजी अस्पताल बिना कोरोना जांच रिपोर्ट के मरीजों को भर्ती नहीं ले रहे हैं। (chhattisgarh coronavirus update)

By: Dakshi Sahu

Published: 21 Sep 2020, 01:54 PM IST

कवर्धा. कोरोना के चक्कर में अन्य बीमारी से जूझ रहे मरीजों की तकलीफ बढ़ गई है। निजी अस्पताल बिना कोरोना जांच रिपोर्ट के मरीजों को भर्ती नहीं ले रहे हैं। निजी अस्पताल में इलाज कराना है तो सरकारी अस्पताल से कोरोना जांच कराकर रिपोर्ट मांगी जा रही है। उसमें भी आरटीपीसीआर रिपोर्ट मांगी जा रही है, क्योंकि निजी अस्पताल के संचालक रैपिड एंटीजन रिपोर्ट को मान्य नहीं दे रहे हैं। इसके चलते लोगों को दोगुनी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। कुछ दिन पूर्व इसी चक्कर में एक व्यक्ति की जान गई।

रिपोर्ट नहीं दिखाया तो अस्पताल में नहीं मिली जगह
सांस लेने में तकलीफ थी, तो जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरटीपीसीआर के तहत कोरोना जांच कराया गया, रिपोर्ट निगेटिव बताया गया, लेकिन रिपोर्ट मिला नहीं। जिला अस्पताल में मरीज की हालत नहीं सुधरी। ऐसे में परिजन निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन बिना जांच रिपोर्ट अस्पताल में भर्ती नहीं लिया गया। रिपोर्ट को केवल बताया गया था लेकिन रिपोर्ट कार्ड नहीं दिया गया। इस चक्कर में उनकी जान चली गई।

जिले में आए दिन सड़क हादसे के कई मामले सामने आते हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ शासकीय अस्पताल में नहीं है इसके चलते मरीज निजी अस्पताल जाते हैं, लेकिन वहां पर भी कोरोना रिपोर्ट की मांग की जा रही है। आरटीपीसीआर की जांच रिपोर्ट चार से पांच दिन में आ रही है ऐसे में गंभीर अन्य बीमारी से जूझ रहे मरीज बिना उपचार दम तोड़ रहे हैं।

आरटीपीसीआर रिपोर्ट आने में देरी
दूसरी समस्या यह है कि आरटीपीसीआर जांच कराने पर इसकी रिपोर्ट आने में चार दिन से अधिक समय लगता है। इसकी जांच जिले में नहीं होता। सैम्पल रायपुर एम्स, रायपुर मेडिकल कॉलेज या फिर राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। राज्य में संक्रमण बढ़ चुका है जिसके कारण रिपोर्ट आने में काफी समय लगता है। तब तक मरीजों का इलाज ही नहीं हो पाएगा।

अस्पताल बंद होने का डर सता रहा
मरीज व उनके परिजन निजी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी भर्ती नहीं ली जा रही है। निजी अस्पताल संचालकों को डर है कि कहीं मरीज कोरोना पॉजिटिव निकला तो अन्य मरीज और स्टाफ भी संक्रमित हो जाएंगे। इसके चलते उनका अस्पताल भी 14 दिनों के लिए सील हो जाएगा।

पत्रिका की अपील: विकट परिस्थिति में मदद करें
केवल डॉक्टर को भगवान के रूप की संज्ञा दी गई है अन्य किसी को नहीं। निजी अस्पताल संचालक व डॉक्टर को इस विकट समय में तो लोगों की मदद करनी होगी। लगता है कि कोई मरीज कोरोना संदिग्ध है तो अलग से वार्ड में रखा जाए। उनकी जांच कराई जाए। भले ही उनकी फीस अतिरिक्त ली जाए, लेकिन भर्ती अवश्यक करें।

सीएमएचओ डॉ.एसके तिवारी ने बताया कि मरीजों को परेशानी तो हो रही है। स्थिति अभी बहुत ही विकट है इसलिए निजी अस्पताल संचालकों को समझने की आवश्यकता है। सुरक्षा किट पहनकर जांच करें। अलग से वार्ड भी हो ताकि जो संदिग्ध लगते हैं उन्हें वहां रखा जाए।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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