जिस महोत्सव ने भोरमदेव को दिलाई दुनियाभर में पहचान, आज उसी का रंग पड़ने लगा फीका

आयोजन की उपेक्षा को देखते हुए तो यही लग रहा है कि आने वाले वर्षों में भोरमदेव महोत्सव को एक दिन की औपचारिकता में निपटा दिया जाएगा

By: Deepak Sahu

Published: 04 Apr 2019, 10:19 AM IST

कवर्धा. कुछ वर्षों से चल रहे आयोजन की उपेक्षा को देखते हुए तो यही लग रहा है कि आने वाले वर्षों में भोरमदेव महोत्सव को एक दिन की औपचारिकता में निपटा दिया जाएगा। यह इसलिए क्योंकि इस बार के आयोजन को देखकर ऐसा ही लगा।

वर्ष 2005 से 2015 तक लगातार तीन दिनों का ही भोरमदेव महोत्सव होता रहा। प्रख्यात कलाकारों को भोरमदेव बुलाया गया, इससे इसकी ख्याति भारत के कोने-कोने तक पहुंची। साथ ही विदेशी मेहमानों ने भी इसे खूब सराहा। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से लग रहा है जैसे मानो अधिकारी इस महोत्सव को लेकर रूचि नहीं ले रहे। इसके चलते ही आयोजन को अब दो दिन में समेटा जा रहा है।

अब इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आने वाले वर्षों आयोजन एक ही में ही निपटा दिया जाए। इस बार के महोत्सव कार्यक्रम को ही लें। कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। कवर्धा शहर के लोगों को जानकारी नहीं मिली की आयोजन कब से है। वहीं कार्यक्रम में कोई मुम्बईया या फिर अंतरराष्ट्रीय कलाकार नहीं बुलाया गया, जिससे लोग स्वयं खींचे चले जाए। इसके चलते ही मंच के बजाए आयोजन मंदिर परिसर के टेंट तक ही सीमट गया।

दो चुनावी वर्ष के दौरान महोत्सव का आयोजन
वर्ष - कलाकार
2009 - अल्का याज्ञनिक पार्श्व गायिका, सुमेधा कर्महे सारेगामा फेम
2010 - अल्ताफ राजा गायक, सुनील पाल लाफ्टर चैलेंज, देबोजीत
2011 - अनूप जलोटा भजन गायक, चंदन दास गजल गायक
2012 - पाŸव गायक उदित नारायण, साधना सरगम
2013 - संगीतकार व गायक बप्पी लहरी, हंसराज हंस
2014 - सूफी गायक बड़ाली ब्रदर्स, पुणे कुलकर्णी द्वारा शास्त्रीय गायन

 

Bhoramdev Mahotsav

तीर्थ प्रबंधकारिणी समिति की उपेक्षा
भोरमदेव मंदिर की व्यवस्था के लिए भोरमदेव तीर्थ प्रबंध कारिणी समिति बनी हुई है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा इनकी उपेक्षा की जाती है। इस बार आचार संहिता की बात कहते हुए आयोजन को लेकर कोई बैठक ही नहीं बुलाया गया। भोरमदेव तीर्थ प्रबंध कारिणी समिति के सदस्यों से राय मशवरा तक नहीं लिया गया। इसके चलते ही तो सदस्य भी जाने से कतराने लगे हैं। इस बार भी अधिकतर सदस्य कार्यक्रम में नहीं गए।

2014 में आचार संहिता के दौरान हुए कार्यक्रम
भोरमदेव महोत्सव 1995 में प्रारंभ है। मतलब इस दौरान अब तक पांच बार चुनाव के बीच ही आयोजन हुए। वर्ष 2014 में भी आचार संहिता के दौरान ही 27 मार्च भोरमदेव महोत्सव आयोजित था। जबकि 17 अप्रैल को मतदान हुए थे। आयोजन में पुणे प्रियदर्शनी कुलकर्णी द्वारा शास्त्रीय गायन और मुबई के सूफी गायक बड़ाली ब्रदर्स द्वारा मनमोहक व आकर्षक प्रस्तुति दी गई। इसी तरह वर्ष 2009 में ही आचार संहिता के दौरान ही शानदार कार्यक्रम हुए।

मंदिर परिसर में ही कार्यक्रम हुए
बुधवार शाम करीब 5 बजे मंच पर लोगों की भीड़ न के बराबर। इसलिए स्थानीय कार्यक्रम के लिए मंदिर परिसर में ही टेंट लगा दिया गया। कलाकार वहीं पर प्रस्तुति देने लगे। भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु वहीं से कार्यक्रम देखते रहे। बाद में मुख्य मंच पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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