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आयोग की समझाइश पर भरण-पोषण के लिए तैयार

राज्य महिला आयोग ने कबीरधाम जिले के प्रकरणों की सुनवाई करते हुए एक मामले में महिला और बच्चों के भरण-पोषण के लिए प्रतिमाह 15 हजार रुपए देने के लिए कहा। वहीं जिला अस्पताल के एक कर्मचारी के वेतन रोकने के मामले में कर्मचारी के न्याय के लिए वर्तमान सिविल सर्जन को पक्षकार बनाने के लिए आयोग ने निर्णय लिया है।

कवर्धा

Published: April 28, 2022 11:36:32 am

कवर्धा.
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ.किरणमयी नायक ने बुधवार को कबीरधाम जिले में अपने कार्यकाल के दूसरी सुनवाई की। आयोग में प्रस्तुत 23 प्रकरणों की सुनवाई की, जिसमें 11 प्रकरणों का नस्तीबद्ध किया गया है। वहीं कुछ प्रकरण को आयोग में सुनवाई के लिए कबीरधाम से प्रेषित किया गया। साथ ही 6 प्रकरणों में समझौतों के लिए आवश्यक दस्तावेज के साथ आयोग कार्यालय रायपुर भी बुलाया गया, ताकि उस प्रकरणों का विधिवत नस्तीबद्ध किया जा सके। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ.नायक ने बताया कि एक अन्य प्रकरण में पति पत्नी के दो संतान है और दोनों के पास एक-एक संतान हैं। दोनों को आयोग द्वारा समझाइश दिया गया कि बच्चे के हित में दोनों अपने शर्तें के साथ तैयार हुए। अनावेदक पति से पूछा गया कि पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण क्या दे रहा है तो अनावेदक पति कहा कि कभी-कभी 15०० रुपए देता हूं जबकि उसका वेतन 45 हजार रुपए है। इस स्तर पर पति को कहा गया कि प्रथम सप्ताह में आवेदिका के घर जाकर 15 हजार रुपए बच्चों के खर्चे के लिए देगा। रुपए मिलने पर आवेदिका पत्नी अनावेदक पति को पावती देगी। इसी प्रकार जब तक प्रकरण का निराकरण नहीं हो जाता तब तक अनावेदक 15 हजार रुपए प्रतिमाह देने को तैयार हुआ इस प्रकरण को रायपुर सुनवाई के लिए रखा गया है। इस अवसर पर कवर्धा एसडीओपी मोनिका परिहार, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी आनंद तिवारी व संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
आयोग की समझाइश पर भरण-पोषण के लिए तैयार
आयोग की समझाइश पर भरण-पोषण के लिए तैयार
वेतन रोका - आवेदिका को किया परेशान
आयोग ने जिला अस्पताल के एक कर्मचारी के लंबित वेतन और उन्हें अनावश्क परेशान से संबंधित प्रकरण की सुनवाई की। यहांआवेदिका का वेतन रोका गया था वह तो दिलाया गया है। उसके बाद आवेदिका का बच्चा बीमार था जिसे निजी हास्पिटल रायपुर में रिफर किया गया था। उस इलाज के दौरान 20 दिन तक अस्पताल नहीं गई थी अपना आवेदन व्हाट्सअप के माध्यम से भेजा था। बार-बार वेतन रोकने के कारण आवेदिका अपने मामले में सिविल सर्जन को भी पक्षकार बनाकर एक बार सुनवाई करना चाहती है, ताकि उसे बार-बार अलग-अलग मामलों में परेशान न किया जाए। आवेदिका अपने प्रकरण की शीघ्र सुनवाई के लिए रायपुर सुनवाई में रखने का निवेदन किया है।
धोखेबाजी - एक संतान बताकर लिया अनुकंपा
आयोग ने आवेदिका के आवेदन पर सुनवाई की। यहां आवेदिका ने बताया कि उसके माता पिता की मृत्यु कोविड काल में हुई थी। उसके बाद भाई ने पिता के सर्विस रिकार्ड में उसका नाम होने के बावजूद ग्रेच्यूरटी की राशि 8 लाख रुपए निकाल लिया। अनुकंपा नियुक्ति भी पा लिया। अनावेदक ने स्वीकार किया है कि उसे ग्रेच्युरिटी का 8 लाख रुपए मिला है और 12 हजार रुपए मासिक वेतन पा रहा है। दोनों पक्षों को समझाइस दिया गया कि अपनी-अपनी ओर से संपत्ति का विवरण और दस्तावेजो को लेकर महिला आयोग कार्यालय रायपुर मे उपस्थित होने के आदेश दिए है और अधिवक्ता के समक्ष बिंदुवार सारी जानकारी व दस्तावेज उपस्थित होने कहा गया है।

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