ओडिएफ के लिए शासकीय जमीन पर बनाए शौचालय अनुपयोगी

ग्राम गैंदपुर में हितग्राही ऐसे जगह शौचालय बनवा लिए जहां से मकान की दुरी लंबी है और तो और बनने के बाद हितग्राही नियमित उपयोग तो दूर की बात है कई शौचालय की पट अभी तक नहीं खोले हैं।

By: Panch Chandravanshi

Published: 31 Jul 2019, 11:43 AM IST

इंदौरी. जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां अधिकांश ग्रामीण हितग्राही शासकीय भूमि पर स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय तो बनवा लिए हैं, लेकिन इसका उपयोग करते नजर नहीं आ रहा है। यह हम नहीं बल्कि वहां बने शौचालय की वर्तमान स्थिति देखकर बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है।
सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम गैंदपुर में हितग्राही ऐसे जगह शौचालय बनवा लिए जहां से मकान की दुरी लंबी है और तो और बनने के बाद हितग्राही नियमित उपयोग तो दूर की बात है कई शौचालय की पट अभी तक नहीं खोले हैं। बगैर उपयोग व देखरेख के अभाव में कंडम स्थिति में पड़े हैं। इससे एक बात तो स्पष्ट है कि शासकीय जमीन पर शौचालय निर्माण कर हितग्राही बेजा कब्जा कर जमीन हथियाने के फिराक में है। ओडिएफ के चक्कर में जिम्मेदार निर्माण कार्य कराते समय गांव में शौचालय बनवा तो दिए हैं, लेकिन अधिकांश शौचालय घर से दूर शासकीय जमीन पर बना है। जहां लोग अब घेरा बंद करने में जुटे हैं कुछ शौचालय का उपयोग शुरू ही नहीं हुआ है, जिसके दरवाजे गायब हो चुके हैं। किसी के सीट जाम होकर पड़े हैं। सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गैंदपुर की बसाहट है, जिसकी आबादी 1700 के करीब है। वहीं गांव में स्वच्छ भारत मिशन तहत कुल 244 शौचालय का निर्माण कराया गया है। हालांकि शौचालय निर्माण के दौरान तरह-तरह की बातें सामने आई। इसके बाद भी शत्-प्रतिशत निर्माण कराया गया। इसके चलते लोहारा ब्लॉक को 15 अगस्त 2016 को शौच मुक्त घोषित किया गया। इसके बाद भी पंचायत स्तर पर लोगों में जागरूकता की कमी दूर करने के लिए अपने स्तर पर तरह-तरह के हथकंडे अपनाए गए थे।
दरवाजा व शेड गायब, सीट जाम
शौचालय बनने के बाद उपयोग नहीं करने से योजना के तहत बना शौचालय अनुपयोगी साबित हो रहा है। उपयोग नहीं करने व देखरेख के अभाव में शौचालय के सीट पर पत्थर डाल दिया गया है, जिससे सीट पूरी तरह जाम हो चुका है। वहीं घर से दूर होने के चलते बाहर बने शौचालय के टीन शेड व दरवाजा धीरे-धीरे गायब हो रहा है।
30 फिसदी शौचालय घर से दूर
स्वच्छ भारत मिशन तहत ग्राम में निर्मित लगभग 30 से 40 फीसदी शौचालय घर से दूर, बाड़ी या शासकीय भूमि पर बनाया गया है, जिससे नियमित उपयोग तो दूर की बात है झांकने तक नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में गांव में बनाए गए शौचालय अनुपयोगी साबित हो रही है। अब तो स्थिति यहां तक निर्मित हो गई है कि शौचालय के आसपास भूमि पर समय के साथ लोग घेराबंदी कर बेजा करने का अनोखा तरीका निकाला है। इस तरह गांव में शौचालय शासकीय भूमि पर कब्जा हथियाने का जरिया बनता नजर आ रहा है।
हथकंडे भी नहीं आया काम
पंचायत प्रतिनिधि द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया गया। खुले में सोच रोकने के लिए ग्राम में सभा कर निगरानी के लिए बकायदा 9 सदस्य की टीम गठित की गई। गांव के गली व चौक चौराहा पर दीवाल लेखन कर पंचायत ने खुले में शौच करने पर जुर्माना का फरमान भी जारी किया था। इसके बाद व्यवस्था सुधरती नजऱ नहीं आ रही है। एक तो शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा है वहीं खुले में शौच जाने वाले पर जुर्माना व हथकंडे की फरमान काम नहीं आ रहा।

Panch Chandravanshi
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