एक वर्ष में दो तेंदुए व एक बाघिन की मौत

जिले में एक और मादा तेंदुआ का शिकार। मामले में एक संदेही को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। उसके तीन से चार साथी फरार हंै, जिनकी तलाश की जा रही है। मृत तेंदुए का पीएम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। वन अमला घटना की जांच कर रहा है।

By: Yashwant Jhariya

Published: 17 Feb 2021, 10:42 AM IST

कवर्धा. घटना सहसपुर लोहारा वन परिक्षेत्र के कहुवापानी गांव के अंतर्गत भठेला टोला बीट के कक्ष क्रमांक 305 की है। यहां गस्त के दौरान 15 फरवरी को बीटगार्ड ने तेंदुए को मृत अवस्था में देखा। तेंदुए के शरीर पर करंट लगने के निशान थे। इसका करंट लगाकर शिकार किया गया। वन अमले को मौके से बिछाए गए जीआई तार बरामद किया। मृत मादा तेंदुए की उम्र तीन साल के करीब बताई जा रही है। जांच के लिए बिलासपुर के अचानकमार टाइगर रिजर्व से स्नीफर डॉग स्क्वायड भी बुलाया गया। वेटनरी डॉक्टरों ने तेंदुए का पीएम किया। वन विभाग ने शिकार किए जाने के मामले में एक संदेही ग्रामीण को हिरासत में लिया है। उसके कुछ साथी हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। जो घटना के बाद से फरार हैं। तेंदुएं का पीएम किया गया। वहीं जांच कराने के लिए सैम्पल लिया जिसे फॉरेंसिक लैबोरेट्री भेजा जाएगा। इसके बाद सीसीएफ दुर्ग शालिनी रैना व डीएफओ कवर्धा दिलराज प्रभाकर की मौजूदगी में मृत तेंदुए का अंतिम संस्कार किया गया।
मादा तेंदुआ के शिकार मामले में प्रदेश के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने वन विभाग का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कोई रात के अंधेरे में करंट लगाए तो क्या कर सकते हैं। घटना होने के बाद जानकारी मिलती है। विभाग लगातर कार्रवाई भी कर रही है। हालांकि उनके द्वारा जिले के वन अमले को सजग रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राष्ट्रीय पशु भी सुरक्षित नहीं
जिले के जंगलों में तो राष्ट्रीय पशु भी सुरक्षित नहीं है। अब तक दो बाघिन और एक बाघ की मौत हो चुकी है। वर्ष 2010 में अमनिया के जंगल में एक बाघ को जहर देकर मार दिया गया। मतलब शिकार किया गया था। वहीं वर्ष 2011 में भोरमदेव अभयारण्य के जामुनपानी में हथियार से बाघिन की हत्या हुई। दांत, नाखून व मूंछ के बाल निकाल लिए गए। भोरमदेव अभयारण्य क्षेत्र के चिल्फी रेंज के ग्राम तुरैयाबाहरा के जंगल में 12 नवंबर 2020 को गश्त के दौरान वनरक्षकों को एक बाघिन का शव मिला था। शरीर के एक हिस्से मेें मांस नहीं था।

तीन साल में चार तेंदुओं की मौत
वर्ष 2018 से अब तक चार तेंदुए की भी मौत हो चुकी है। अक्टूबर 2018 में भोरमदेव अभयारण्य के बफर एरिया में झलमला से जामुनपानी के बीच शीतलपानी के पास पानी से भरे एक स्टॉपडैम नुमा डबरी में तेंदुए का शव झाडिय़ों में फं सा मिला था। मार्च 2019 में पंडरिया ब्लॉक के नेऊर अंतर्गत बीट क्रमांक 478 के जंगल में शिकारियों ने 11 केव्ही तार में कच्चा तार के जरिए तेंदुआ का शिकार किया। इसमें दो मवेशी के मौत हुई थी। वहीं मई 2020 में सहसपुर लोहारा वन परिक्षेत्र के बीट क्रमांक 291 में कर्रानाला डूबान क्षेत्र में मादा तेंदुए का शव मिला। 15 फरवरी 2021 को सहसपुर लोहरा वन परिक्षेत्र के गठुला टोला बीट के कक्ष क्रमांक 305 में तीन वर्षीय मादा तेंदुआ का शव मिला।

Yashwant Jhariya Bureau Incharge
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