भीषण जल संकट : 700 आबादी वाले इस गांव के लोग खरीद रहे पानी

इन दिनों जल की महत्ता व उपयोगिता ग्राम बैजलपुर के रहवासियों से बेहतर कोई नहीं जान सकता। यहां निवासरत लोगों को एक-एक बूंद पानी की कीमत चुकानी पड़ रही है। लोगों को पीने से लेकर निस्तारी के लिए मजबूरी में पानी खरीदना पड रहा है।

By: Satya Narayan Shukla

Published: 15 May 2019, 09:00 PM IST

कवर्धा @Patrika. जल ही जीवन हैÓ इस स्लोगन से भी वाकिफ है, लेकिन इन दिनों जल की महत्ता व उपयोगिता ग्राम बैजलपुर के रहवासियों से बेहतर कोई नहीं जान सकता। यहां निवासरत लोगों को एक-एक बूंद पानी की कीमत चुकानी पड़ रही है। लोगों को पीने से लेकर निस्तारी के लिए मजबूरी में पानी खरीदना पड रहा है।

अधिकतर हैण्डपंप सूख गए
कवर्धा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मक्के के अश्रित ग्राम बैजलपुर की जनसंख्या लगभग ७०० के आसपास है। यहां ग्रामीणों के प्यास बूझाने के लिए दर्जनभर हैण्डपंप है। भीषण गर्मी के चलते जलस्तर नीचे चले जाने से अधिकतर हैण्डपंप सूख गए हैं। हैण्डपंपों के सूखते ही लोगों के लिए पेयजल व निस्तारी की विकट समस्या खड़ी हो गई है। दूसरा कोई विकल्प नहीं होने के कारण ग्रामीणों को निजी हेंडपंप का सहारा लेना पड रहा है। इसके एवज में राशि खर्च करनी पड़ रही है। प्रतिमाह निर्धारित शुल्क अदा कर पानी का उपयोग कर रहे हैं। ग्रामीण सहदेव यादव, कार्तिक, मनोज, भोला, सुकालू, संतराम व रोहित आदि ने बताया कि गर्मी के दिनों में पानी खरीदकर अपनी प्यास बूझाते हैं।

यहां नलजल योजना प्रारंभ नहीं हो सका

गर्मी में पेयजल के लिए पंचायत से लेकर जनपद व जिला पंचायत की ओर से कोई कारगार कदम नहीं उठाया गया हैं। नतीजा ७०० आबादी वाले ग्राम बैजलपुर के रहवासियों को एक-एक बूंद की कीमत चुकानी पड़ रही है। गांव में जल संरक्षण के लिए लाखों खर्च कर तालाब खोदाई सहित अन्य कई तरह के काम किए गए है। वहीं पेयजल के लिए इतनी भयावह स्थिति के बावजूद यहां नलजल योजना प्रारंभ नहीं हो सका है।

गांव में नहीं नलजल योजना
गांवों में हो रही पेयजल समस्या को दूर करने के लिए पंचायतों में नलजल योजना प्रारंभ कर घरों-घर पानी आपूर्ति की योजना है। ग्राम पंचायत मक्के नलजल योजना से अब तक दूर है। पेयजल किल्लत के बावजूद पंचायत व आश्रित गांव में नलजल योजना प्रारंभ न होना समझ से परे हैं।

जलस्त्रोतों का संरक्षण जरुरी
गर्मी में गिरते भू-जलस्तर और जलस्त्रोतों का संरक्षण जरूरी है। वह दिन दूर नहीं जब लोगों को पानी के एक बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ सकता है। अगर ऐसा ही रहा तो अन्य गांव के ग्रामीणों को भी पानी खरीदकर पीना पड़ेगा। मैदानी क्षेत्र में इस तरह की समस्या सामने आ रही है, तो वनांचल क्षेत्र के गांवों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

पेयजल व निस्तारी का संकट
ग्रामीणों के लिए एकमात्र संकरी नदी भी अब पूरी तरह सूख चुकी है। जिसके चलते आसपास गांव के लोग निस्तारी के संकट से जूझ रहे हैं। मवेशियों के कंठ भी प्यासे हैं। वहीं रबी फसलों के लिए सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई है।

कागजों में एक्शन प्लान
प्रतिवर्ष गर्मी आते ही जलप्रदाय विभाग की ओर से पानी की बचत और सप्लाई के लिए एक्शन प्लान पर की बात होती है। सीजन शुरू होते-होते समस्याएं तो वही रहती है, लेकिन प्लानिंग कागजों तक ही सिमट कर रह जाते हैं।

Satya Narayan Shukla Desk/Reporting
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