मनरेगा में नहीं मिल रहा मजदूरों को काम, गांव छोड़ने मजबूर हुए ग्रामीण

जिले में मजदूरी नहीं मिलने के कारण अब मजदुर अपना घर छोड़कर बाहर जाकर काम करने को मजबूर हो गए है

By: Deepak Sahu

Published: 13 Mar 2018, 10:54 AM IST

कवर्धा . जिले में रोजगार के अवसर कम है। मजदूरी के लिए भी अब काम नहीं मिल पा रहा है। जिले में बड़ा कोई कारखाना नहीं होने के कारण मजदूरों को काम नहीं मिल पाता है।

मनरेगा के तहत मात्र 11 हजार काम ही जारी हुआ है। जी हां केद्र सरकार द्वारा लोगों को ही गांव में मजदूरी मिल सके इसके लिए रोजगार गांरटी योजना प्रांरभ की है। केंद्र सरकार ने इस बार मनरेगा में बजट भी बढ़ा दिया गया है।लेकिन जिले में अब तक मजदूरी व मटेरियल भुगतान नहीं हो रहा है। इसके कारण लोगों को मोह भग अब मनरेगा के कामों से हो रहा है। गांव में सरपंच भी अब मनरेगा संबंधित काम कराने से कतरा रहे हैं। कोई भी पंचायत ऐसा नहीं है। जिसका मटेरियल भुगतान बाकि हो।

लोड कम करने लगाएंगे ट्रांसफार्मर बैंकों से नहीं हो रहा भुगतान
जिले में कई किसानों ने गन्ना उत्पादन किया था। जिसे शक्कर कारखाना में गन्ने को बेचे हैं। लेकिन बैंक से इसका भी भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसी प्रकार शासन को समर्थन मूल्य पर धान बेचे हैं। लेकिन उसका भी भुगतान बैंक से किसानों को नहीं मिल पा रहा है। कई माह से मजदूरी व बैंक से अन्य शक्कर कारखाना व धान का राशि नहीं मिलने के कारण किसानों व आम लोगों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई है और वे पलायन करने के लिए मजदूर है।

केवल 11 काम स्वीकृत
वृत्ती वर्ष 2017-18 में जिले में मात्र 11 हजार काम ही स्वीकृत हुए हैं। यानी एक गांव में दो काम या कई गांव में मनरेगा के तहत कार्य ही नहीं हुए हैं। इसके कारण गांव के लोगों को काम नहीं मिल पाया है। 11 हजार काम में कवेल 8 हजार 90 कार्य पूर्ण हुएं हैं। जबकि बाकि कार्य आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। इस वर्ष करीब एक लाख 28 हजार मजदूरों को ही काम मिला है। जिसमें से कुछ ही लोगों को पूरे 100 दिन काम मिला है।वहीं बारिश नहीं होने से फसल बर्बाद हो गया। काम नहीं होने के कारण पलायन को मजबूर है।

पलायन कर रहे लोग
मजदूरी नहीं मिलने व गांव में काम नहीं होने के कारण अब गांव से बड़ी संख्या में लोग पलायन हो रहे हैं। दूसरे जिले व राज्य से बाहर कमाने खाने के लिए जिले से मजदूर जा रहे हैं। शासन प्रशासन जिले के मजदूरों को काम नहीं दिला पा रही है। मनरेगा में जो काम किए हैं, उनका भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इसके कारण मजदूरों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। बाल बच्चों सहित लोग पलायन हो रहे हैं।

पलायन पंजी का उपयोग नहीं
हर ग्राम पंचायत में गांव की विभिन्न एक्टिविटिज के लिए रजिस्टर मेटेन किया जाता है। जन्म, मृत्यु, विवाह पंजीयन रिकार्ड के साथ रोजी-मजदूरी के लिए गांव से बाहर जाने वाले मजदूरों के लिए भी रजिस्टर मेंटेन किया जाता है।जिले में किसी भी ग्राम पंचायत में पलायन पंजी में संधारण नहीं किया जा रहा है।गांव में कितने लोग पलायन कर चुके हैं। इसकी जानकारी गांव के सचिव तक को नहीं है।

Deepak Sahu
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