निमाड़ के सबसे बड़े हाईवे पर बने मोरटक्का पुल पर 24 दिन बाद शुरू हुआ यातायात

24 दिन बाद मोरटक्का पुल पर बहाल हुआ यातायात, 64 लाख रुपए की लागत से हुआ पुल का मरम्मत कार्य, रेलिंग की रंगाई-पुताई का कार्य जारी

खंडवा. ऊपरी इलाकों में भारी बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी के कारण नर्मदा में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए मोरटक्का पुल का मरम्मत कार्य पूरा कर लिया गया है। 24 दिन बाद मंगलवार को इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर बने मोरटक्का पुल से छोटे और भारी वाहनों की आवाजाही बहाल की गई। दोपहर करीब 1.14 बजे एमपीआरडीसी और एनएचएआइ के अधिकारियों ने पूजा-पाठ कर पुल से वाहनों की आवाजाही शुरू कराई। इसके बाद जनजीवन पटरी पर लौटा। पुल शुरू होने से खंडवा सहित बुरहानपुर आदि जिलों के राहगीरों को राहत मिली है। क्योंकि पुल बंद होने से सबसे ज्यादा खंडवा और बुरहानपुर से इंदौर का सफर करने वाले लोगों को परेशानी हो रही थी। उल्लेखनीय है भारी बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी के कारण 29 अगस्त को नर्मदा खतरे के निशान ऊपर आ गई थी। तब सुरक्षा के लिहाज से मोरटक्का पुल बंद किया गया था। वहीं पुल तीन दिनों तक पानी में डूबा रहा था। इस कारण पुल क्षतिग्रस्त हुआ था। पुल का मरम्मत कार्य होने के बाद अब वाहनों के आवागमन के लिए खोल दिया गया है।
ट्रैफिक शुरू करने से पहले जांची पुल की मजबूती
क्षतिग्रस्त मोरटक्का पुल का एमपीआरडीसी ने 64 लाख रुपए की लागत से मरम्मत कार्य कराया है। पुल पर डामरीकरण कराने के साथ ही रेंलिग लगवाई गई है। इस समय पुल पर रंगाई-पुताई का कार्य जारी है। पुल का कार्य पूरा होने पर मंगलवार को एमपीआरडीसी के अधिकारी राकेश जैन, वर्षा अवस्थी ने स्थानीय अफसरों के साथ पुल का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने पुल की क्षमता और खांमियों की जांच की। जांच की टीम की ओके रिपोर्ट मिलने के बाद ही पुल से वाहनों की आवाजाही शुरू कराई गई। इस दौरान अधिकारियों ने नाव से पुल के निचले हिस्से को भी जांचा। हालांकि कोई खामी नजर नहीं आई।
वर्ष 2013 और 19 में बंद हुआ था पुल
इंदौर-इच्छापुर हाईवे पर बना मोरटक्का पुल पिछले सात वर्षों में तीसरी बार बंद हुआ था। इससे पहले वर्ष 2013 में नर्मदा में बाढ़ आई। इस कारण मोरटक्का पुल पानी में डूब गया था। 23 अगस्त को बाढ़ के कारण पुल बंद किया गया था, जो तीन दिन बाद खोला गया था। ठीक इसी प्रकार वर्ष 2019 में भारी बारिश के चलते नर्मदा में उफान आई। नर्मदा के खतरे के निशान से उपर आने पर सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने 7 सितंबर को पुल से वाहनों की आवाजाही रोकी थी। जलस्तर सामान्य होने पर सात दिन बाद 15 सितंबर को पुल पर यातायात बहाल किया गया था।

जितेंद्र तिवारी Reporting
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