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कैसे बुझेगी लोगों की प्यास... शहर में 40 हजार मकान और नल कनेक्शन सिर्फ 27 हजार

-आधे से ज्यादा कालोनियां अवैध, नहीं हुए नल कनेक्शन, इसलिए बन रही जल संकट की स्थिति
-कॉलोनाइज प्लाट काट सस्ते में बेचकर निकल जाते, भुगत रहे खरीदार

खंडवा

Published: May 04, 2022 06:57:44 pm

खंडवा.
शहर में जल संकट के लिए नर्मदा जल की फूटती पाइप लाइन, पेयजल प्रदाय के लिए निगम की लचर व्यवस्था के साथ एक सबसे बड़ा कारण अवैध कॉलोनियां भी है। नगर निगम के पास करीब 40 हजार संपत्ति (मकान) का रिकॉर्ड है, जबकि नल कनेक्शन की संख्या 27 हजार के लगभग है। आधे से ज्यादा अवैध कॉलोनियों में नल कनेक्शन नहीं होने से गर्मियों में पानी के लिए त्राही मचना आम बात हो गई है। इन दिनों चल रहे जल संकट की समीक्षा में ये बात सामने आई है।
पिछले सप्ताह नर्मदा जल पाइप लाइन फूटने के बाद शहर में पानी के लिए हाहाकार मच गया था। कलेक्टर व निगम प्रशासक अनूप कुमार सिंह को स्वयं मैदान में आना पड़ा था। इस दौरान जल संकट के कारणों का पता लगाया गया तो सामने आया कि करीब 13 हजार घरों तक नल कनेक्शन ही नहीं पहुंचा है। ये क्षेत्र अवैध कॉलोनी की गिनती में आते है और कॉलोनाइजर द्वारा बिना डायवर्सन, बिना विकास शुल्क चुकाए, रेरा से अनुमति लिए बिना ही प्लाट काटकर बेच दिए। न तो कॉलोनियों में जल प्रदाय की पुख्ता व्यवस्था की गई, न निगम द्वारा यहां पाइप लाइन डाली गई। जिसके चलते इन क्षेत्रवासियों को गर्मी सहित पूरे साल पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।
दो अरब से ज्यादा खर्च हो चुका पानी पर
शहर में पेयजल के लिए नर्मदा जल योजना से पहले सुक्ता और नागचून फिल्टर प्लांट पर दारोमदार था। तब भी एक दिन की आड़ से पेयजल प्रदाय होता था। गर्मियों में टैंकरों की व्यवस्था भी की जाती थी। करीब दस साल पहले 110 करोड़ की नर्मदा जल योजना बनी और मामला बिगड़ता चला गया। नर्मदा जल योजना मेंटेेनेंस के लिए हर माह विश्वा को 25 लाख रुपए और चारखेड़ा फिल्टर प्लांट का बिजली बिल अलग दिया जा रहा है। इस बीच अमृत योजना में 60 करोड़ रुपए खर्च कर नई पाइप लाइन भी बिछाई गई। वहीं, सुक्ता पाइप लाइन पर भी हाल ही में 9 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसके बावजूद हर साल दो करोड़ रुपए टैंकरों पर भी खर्च किए जा रहे है। यानि दस साल में दो अरब से ज्यादा खर्च के बाद भी शहर की प्यास बुझाने में निगम असफल रहा है।
तकनीकी खामियां भी जिम्मेदार
जल प्रदाय की व्यवस्था में निगम द्वारा कई तकनीकी खामियां भी जल संकट का कारण बन रही है। जल प्रदाय के लिए निगम ने शहर को 10 जोन में बांटा है। इसमें कई जोन इतने बड़े है कि पेयजल व्यवस्था बिगड़ जाती है। उदाहरण के तौर पर इंड्रस्टियल एरिया जोन में इंदौर नाका से नवकार नगर, रमा कॉलोनी, पड़ावा, सिंधी कॉलोनी तक के क्षेत्र को जोड़ा गया है। बहुत बड़ा क्षेत्र होने से इस जोन की कई कॉलोनियों में सालभर जल संकट बना रहता है। लूपिंग में भी पाइप लाइन बिछाने के बाद पाइप लाइन से कई अतिरिक्त कनेक्शन जोड़े जाते है। जिसके चलते पानी का प्रेशर कम होने पर जल संकट की स्थिति बनती है।
छोटी-छोटी लापरवाही भी पड़ रही भारी
जहां नर्मदा जल की मुख्य पाइप लाइन फूटने पर दो से तीन दिन जल संकट बना रहता है। वहीं, निगम की छोटी-छोटी गलतियों से भी कई क्षेत्रों में लोगों को परेशान होना पड़ता है। शहर में ड्रिस्टिब्यूटर लाइन में लिकेज होने पर कई-कई दिन तक सुधार नहीं होता है। वाल्व पाइंट पर लिकेज भी अकसर बने रहते है। बिना ढक्कन के दौड़ रहे टैंकर क्षमता का 10 प्रतिशत पानी तो राह में ही गिराते चले जाते है। जिसके चलते दिनभर में पांच से सात टैंकर पानी तो व्यर्थ बह जाता है।
जनता को ऐसे ही नहीं ठगने देंगे
टेल एंड पर जो अवैध कॉलोनियां है, वहां बहुत कम प्रेशर से पानी पहुंच रहा है, उसके लिए नए वाल्व लगाए जाएंगे। कुछ अवैध कॉलोनियों में पाइप लाइन नहीं है, वहां टैंकरों से व्यवस्था कर रहे हैं। जनता को पानी उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है। अवैध कॉलोनाइजर्स पर भी एफआइआर की कार्रवाई करने की तैयारी है। बिना मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराए कॉलोनाइजर्स जनता को ऐसे ही नहीं ठग सकते।
अनूप कुमार सिंह, कलेक्टर



कैसे बुझेगी लोगों की प्यास... शहर में 40 हजार मकान और नल कनेक्शन सिर्फ 27 हजार
खंडवा. दधिची पार्क के पास नाले के लिए हुई खुदाई में फूटी पाइप लाइन, दिनभर बहता रहा पानी।

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