scriptCelebrated birth anniversary of cow heifer | किन्नर खुद नहीं दे सकती थी बच्चे को जन्म, गाय को हुई बछिया तो मनाया जश्न | Patrika News

किन्नर खुद नहीं दे सकती थी बच्चे को जन्म, गाय को हुई बछिया तो मनाया जश्न

-इंसानी बच्चे की तरह है किया छठी पूजन, नामकरण समारोह, बांटी मिठाई
-गाय दान करने वाले भी बछिया के जन्म पर नाना-नानी के तौर पर हुए शामिल
-दिया संदेश, कन्या भ्रूण हत्या रोके समाज, बेटियों को जन्म देकर बनाए काबिल

खंडवा

Published: December 18, 2021 10:01:35 pm

खंडवा.
कुदरत ने उसके साथ नाइंसाफी की, वो मां नहीं बन सकती थी, लेकिन मन में ममता हिलौरे मार रही थी। बच्चा गोद लेकर परवरिश करना आसान नहीं था, कानून और समाज दोनों ही उसके आड़े आ रहे थे। ऐसे में उसके घर पालतू गाय को बछिया हुई तो, मानों उसकी ममता को पर लग गए। बच्चे के जन्म जैसे ही गाय की बछिया का जश्न भी मनाया, बकायदा छठी पूजा की, बछिया का नामकरण किया और भजन-कीर्तन कर लोगों के साथ खुशियां बांटी।
हम बात कर रहे हैं, किन्नर समाज के सिताराबाई गुरु रेखाबाई किन्नर की, जिसने दान में मिली केड़ी को पाला, बढ़ा किया और जब गाय को बछिया हुई तो बच्चे के जन्म जैसी सारी रस्मे निभाई। शुक्रवार को सूरजकुंड क्षेत्र की रेलवे प्लेटफार्म 6 के सामने बनी कॉलोनी में अलग ही माहौल था। यहां किन्नर सिताराबाई की गाय गोपी की बछिया का छठी पूजन हुआ। मोहल्ले की महिलाएं, युवतियां बछिया को सजाने, संवारने में लगी हुई थी। बुजुर्ग महिलाएं ढोलक की थाप पर मंगल गीत गा रहीं थीं। बच्चे खुशी के मारे खिलखिला रहे थे। दोपहर को पंडित द्वारा बकायदा मंत्रोच्चार के साथ पूजन शुरू किया गया। छठी पूजन के साथ नामकरण संस्कार भी हुआ। जिसके बाद गाय की बछिया को राधारानी नाम दिया गया। लोगों ने उपहार स्वरूप गोग्रास भी दिया।
दान करने वाले भी पहुंचे मेहमान बनकर
किन्नर सिताराबाई को 6 साल पहले पदमकुंड क्षेत्र के गोपालक डिग्रीलाल प्रेमचंद यादव ने केड़ी (गाय की बछिया) दान दी थी। 6 साल बाद जब गोपी गाय को बछिया हुई तो यादव अपने पूरे परिवार के साथ मेहमान के रूप में छठी कार्यक्रम में शामिल हुए। पूजा में नाना-नानी की ओर से की जाने वाली रस्में भी निभाई। किन्नर सिताराबाई के साथ 18 साल से रह रहे कैलाश तायड़े बाबा ने पिता के रूप में और सिताराबाई ने मां के रूप में पूजा में भाग लिया। सिताराबाई का कहना है कि जब भी ऐसी खबरें सुनतीं हूं कि यहां बच्ची को जन्म देकर फेंक दिया, जमीन में गाड़ दिया, तो मन द्रवित हो जाता है। हमें भगवान ने इस काबिल नहीं बनाया कि हम वंश को आगे बढ़ा सकें, इसलिए बछिया के जन्म पर कार्यक्रम आयोजित कर ये संदेश देना चाहते है कि कन्या भ्रूण हत्या को रोका जाए और बेटियों के प्रति लोगों में जागरुकता आए।
किन्नर खुद नहीं दे सकती थी बच्चे को जन्म, गाय को हुई बछिया तो मनाया जश्न
-इंसानी बच्चे की तरह है किया छठी पूजन, नामकरण समारोह, बांटी मिठाई-गाय दान करने वाले भी बछिया के जन्म पर नाना-नानी के तौर पर हुए शामिल-दिया संदेश, कन्या भ्रूण हत्या रोके समाज, बेटियों को जन्म देकर बनाए काबिल

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