scriptCrop production will increase due to natural farming | प्राकृतिक खेती से बढ़ेगा फसल का उत्पादन | Patrika News

प्राकृतिक खेती से बढ़ेगा फसल का उत्पादन

नई कृषि मंडी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में जीरो बजट प्राकृतिक खेती पर दिया बल

खंडवा

Published: April 14, 2022 06:06:26 pm

खंडवा. नई कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती करने पर बल दिया गया। इस दौरान प्राकृतिक खेती की जानकारी के लिए किसानों को राज्य स्तर पर आयोजित कार्यक्रम का राज्यपाल गुजरात आचार्य देवव्रत का लाइव अनुभव सुनाया।
प्राकृतिक खेती से बढ़ेगा फसल का उत्पादन
प्राकृतिक खेती से बढ़ेगा फसल का उत्पादन
आचार्य देवव्रत ने जीरो बजट प्राकृतिक खेती कार्यक्रम में अनुभव शेयर करते हुए रासायनिक और कीटनाशक के कंट्रोल पर बल देते हुए प्राकृतिक खेती पर जोर दिया। उन्होंने कहा, जब मृदा में जीवास्म यानी कार्बन की मात्रा कम होती है तो जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है। मिटटी को उपजाऊ बनाने की देशी पद्धति बताते हुए कहा कि खेती में मृदा में लाभदायक कीटाणु से कार्बन की मात्रा में वृद्धि होती है। किसान इसकी शुरूआत प्रयोग के तौर पर कुल भूमि के दस प्रतिशत एरिया में करे। उन्होंने कहा धरती हमार माता है, हम उनके पुत्र हैं। माता-पुत्र रिश्ता पवित्र सेतु है। यही प्राकृतिक खेती का मुख्य आधार है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिपं अध्यक्ष गंगा बाई ने की। अधिकारियों ने भी प्राकृतिक खेती पर बल दिया। आचार्य देवव्रत ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए कीटनाशक के बजाए देशी रूप से मृदा का पोषक तत्व तैयार करें। 10 किलो गोबर के साथ देसी गाय का गोमूत्र एवं दलहनी फसलों का आटा या बेसन मिलाकर उपयोग करें तो फसल का उत्पादन बढ़ जाएगा।
मृदा पोषक तत्व बनाएं
आचार्य ने किसानों को मृदा पोषक तत्व बनाने के लिए देसी पद्धति बताई। कहा 200 लीटर के प्लास्टिक ड्रम में 10 किलो गोबर, 10 लीटर देसी गाय का गोमूत्र, डेढ़ किलो खराब गुड़, इतनी ही मात्रा में बेसन, 180 लीटर पानी में उस खेत की एक मुटठी मिट्टी मिक्स कर दें। लकड़ी के डंडे से पांच से दस मिनट घुमाएं। पांच से दस दिन बाद उसका उपयोग करें। फसल का उत्पादन बढ़ जाएगा। कैंसर आदि जैसी बीमारी नहीं होगी।
सात हजार किसानों को भेजी ङ्क्षलक
कृषि उपज मंडियो ंसमेत ब्लाक स्तर पर आयोजित कार्यक्रम के साथ ही अन्य संस्थाओं के माध्यम से सात हजार किसान ङ्क्षलक के माध्यम से जुड़े। बताया गया कि नए मंडी परिसर में 500 किसानों से कम का लक्ष्य दिया गया था। धूप होने के कारण नवीन मंडी में किसान कम पहुंचे। ज्यादातर किसानों को सुनने के लिए ङ्क्षलक भेजी गई थी। कार्यक्रम में उप संचालक कृषि केसी वास्कले, एसएस सोलंकी, राजू बड़वाया, किसान नेता अशोक पटेल, सेवादास पटेल, कैलाश पाटीदार, राजेन्द्र ङ्क्षसह ठाकुर आदि रहे। संचालन प्रफुल्ल मंडलोई ने किया।
एक साल में चार बार फसल लेता हूं..
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक कृषि पद्धति के बारे में विस्तार से समझाइश दी। कहा कि मैंने भी इस पद्धति को अपनाया है। मैं एक एकड़ जमीन में एक वर्ष में लगभग 4 फसल लेता हूं, लगभग 5 लाख रुपए की बचत होती है। आप लोग भी इस पद्धति को अपनाएं और ग्लोबल वार्मिंग होने से प्रकृति को बचाएं।
मैं भी पांच एकड़ में खेती शुरू करूंगा
वर्चुअली संबोधन में मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान ने बताया कि प्राकृतिक खेती से किसानों की 27 प्रतिशत आमदनी बढ़ेगी तथा 56 प्रतिशत लागत कम होगी। प्रदेश के हर व्यक्ति को अपनी कृषि भूमि का कुछ हिस्सा प्रयोग के तौर पर प्राकृतिक खेती करके प्रयोग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं भी इस वर्ष अपनी खेती में 5 एकड़ जमीन पर प्राकृतिक खेती का प्रयोग करूंगा। कार्यक्रम को केन्द्रीय व राज्य स्तरीय कृषि मंत्रियों ने भी संबोधित किया।

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