फसल बीमा के नाम पर फिर ठगाएं किसान, मिला 11-14 रुपए बीमा

अतिवृष्टि घोषित था जिला, बर्बाद हुई थी सौ प्रतिशत फसल
-किसी गांव को पूरा बीमा तो आसपास के गांव में एक को भी नहीं मिला लाभ
-किसानों में फसल बीमा राशि को लेकर भारी आक्रोश
-21 सितंबर को भारतीय किसान संघ की आपातकालीन बैठक

खंडवा.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ वर्ष 2019 का फसल बीमा शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान एक क्लिक पर किसानों के खातों में डालेंगे। जिले में 31437 किसानों के खातों में 31 करोड़ की राशि जमा होगी। बीमा राशि को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है। पिछले साल खरीफ में जिला अतिवृष्टि घोषित किया गया था और खरीफ की कपास, सोयाबीन, प्याज की फसल पूरी तरह से बरबाद हो गई थी। अब किसानों को जो राशि आई है, उसे देखकर किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है। कई गांव में तो 11 रुपए, 14 रुपए तक की बीमा राशि दी गई है।
लंबे समय से किसान पिछले साल खराब हुई फसलों की बीमा राशि की आस लगाए बैठा था। इस साल भी खरीफ में प्रकृति की मार और कीट प्रकोप से फसलें बरबाद हो गई। जिसके बाद पिछले साल खरीफ की बीमा राशि से किसान को अपना नुकसान पूरा होने की आस थी। गुरुवार को जब कृषि कल्याण विभाग द्वारा किसानों की सूची जारी की तो सैकड़ों किसानों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। जितना किसान ने बीमा प्रीमियम राशि भरी थी, उसकी प्रीमियम राशि से भी कम उसे बीमा राशि दी गई है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने उनके साथ छलावा किया और अधिकारियों, बीमा कंपनी की सांठगांठ से उनका बीमा क्लेम खत्म कर दिया गया।
एक लाख किसान हुए थे प्रभावित
भारतीय किसान संघ जिला समन्वयक सुभाष पटेल ने बताया कि खरीफ 2019 में करीब 1.5 लाख हेक्टेयर सोयाबीन, 50 हजार हेक्टेयर कपास और 5 हजार हेक्टेयर प्याज पूरी तरह से खराब हुआ था। तत्कालीन कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल ने खुद खेतों का मुआयना किया था और जिले को अतिवृष्टि की चपेट में घोषित किया था। तब रेग्युलर बीमा प्रीमियम भरने वाले करीब एक लाख किसान प्रभावित हुए थे। जिले में कम से कम एक लाख किसानों को 200 करोड़ का बीमा मिलना था। जबकि सिर्फ 31437 किसानों को प्रभावित मानते हुए सिर्फ 31 करोड़ का बीमा दिया जा रहा है।
गांव के गांव छोड़ दिए
पूरा जिला अतिवृष्टि प्रभावित था और शत प्रतिशत फसलें बरबाद हुई थी। कृषि और राजस्व अमले ने घर बैठकर खराब फसलों का सर्वे कर दिया और गांव की गांव छोड़ दिए। हर तहसील में चार से पांच गांवों को ही प्रभावित माना। पंधाना तहसील के ग्राम सैयदपुर को प्रभावित माना और उससे लगे गांव भैरूखेड़ा, सिलोदा, डुल्हार के एक भी किसान को बीमा नहीं दिया। ऐसे ही ग्राम बडग़ांव, पांजरिया, बडग़ांव गुजर, टिगरिया में भी किसी किसान को प्रभावित नहीं माना गया।
इन किसानों को मिला दो अंकों में बीमा
किसान का नाम फसल गांव राशि
कन्हैया पटेल सोयाबीन सैयदपुर 11 रुपए
गजानन पटेल सोयाबीन सिर्रा 14 रुपए
फकीर सोयाबीन सिर्रा 14 रुपए
हसराज पटेल सोयाबीन छैगांवदेवी 18 रुपए
जानकी बाई सोयाबीन बायफल 23 रुपए
रेखा पटेल सोयाबीन सिर्रा 25 रुपए
सुरेश सोयाबीन सिर्रा 36 रुपए
गेंदालाल पटेल सोयाबीन सिर्रा 39 रुपए
कन्हैया पटेल सोयाबीन सैयदपुर 42 रुपए
शकील मंसूरी सोयाबीन पंधाना 54 रुपए
अर्पणा अग्रवाल सोयाबीन सिर्रा 79 रुपए
नोट- उपसंचालक कृषि द्वारा जारी सूची के अनुसार ये कुछ गांव के नाम है।
-सैकड़ों किसानों को सिर्फ तीन अंकों 100 रुपए से लेकर 999 रुपए तक बीमा मिला है।
ये है फसल बीमा की तहसीलवार स्थिति
खंडवा तहसील में 19118 किसानों के खाते में 20.33 करोड़ रुपए।
पंधाना तहसील में 5337 किसानों के खाते में 3.51 करोड़ रुपए।
पुनासा तहसील में 4999 किसानों के खाते में 4.43 करोड़ रुपए।
खालवा तहसील में 1752 किसानों के खाते में 2.53 करोड़ रुपए।
हरसूद तहसील में 231 किसानों के खाते में 17.69 लाख रुपए।
किसानों के साथ हुआ छलावा
खंडवा जिले के किसानों के साथ सरकार द्वारा बीमा क्लेम मैं बहुत भेदभाव किया गया। जितना पैसा किसानों का क्लेम में कटा है, उतना भी नहीं दिया। सरकार ने किसानों के साथ छलावा किया है। अब किसान कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा, बल्कि रोड पर उतरकर इसका जवाब देखा। 21 सितंबर को किसानों की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। आगामी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।
सुभाष पटेल, भाकिसं जिला संयोजक

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मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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