उफ ये बेबसी... पोते-पोती को खाना खिलाने के लिए दादी ने तराजू तक बेच डाला

-नन्हे बच्चों को सैकड़ों किमी पैदल ही लेकर नासिक से झांसी के लिए निकलीं
-डीएसपी यातायात ने सुनी कहानी तो छलक उठी आंखें, की वाहन की व्यवस्था
-सैकड़ों मजदूर अब भी पैदल चलने को मजबूर, कुछ के लिए को मिली राहत

खंडवा.
कोरोना संक्रमण काल में मजदूरों और दिहाड़ी कमाने वालों की ऐसी दास्तान सामने आ रही है कि सुनकर हर किसी का मन उदास हो रहा है। लॉक डाउन में काम धंधा खत्म, खाने के लिए कुछ नहीं, जाने के लिए वाहन नहीं, खर्च करने के लिए रुपए नहीं, ऐसे में घर पहुंचने के लिए हर मुसीबत का सामना कर सैकड़ों मजदूर पैदल चलने को मजबूर है। सोमवार को एक बुजुर्ग महिला अपने दो नन्हे पोते-पोती के साथ खंडवा पहुंचीं और अपनी कहानी सुनाई तो डीएसपी यातायात की आंखें भी नम हो गई। बच्चों को खाना खिलाने के लिए बुजुर्ग दादी को अपना तराजू बांट तक बेचना पड़ गया।
नासिक से झांसी के लिए पैदल सफर कर रहीं प्रमीला बाई ने बताया कि वो नासिक में सब्जी बेचकर अपने परिवार का पालन करती हैं। लॉक डाउन आरंभ होने से पहले बेटा अशोक झांसी चला गया था। 11 वर्ष की पोती माधुरी और 8 वर्षीय पोता प्रेम उसके पास ही रह गए। लॉक डाउन लगा तो पहले कुछ दिन जैसे तैसे निकल गए। इसके बाद काम काज बंद हो गया। जो रुपए थे वो भी खत्म हो गए और खाने के लाले पड़ गए। किराया नहीं देने पर मकान मालिक ने भी घर से निकाल दिया। अब उनके पास झांसी जाने के अलावा कोई चारा नहीं था। साधन नहीं मिला तो पोते-पोती को लेकर पैदल ही निकल पड़ी। पास में तराजू और बांट थे उसे बेचकर बच्चों के लिए खाना खरीदा। इसके बाद रास्ते में कहीं खाना मिला तो कहीं पर कुछ भी नहीं। खंडवा पहुंचीं तो डीएसपी यातायात बीपी सालोकी ने उन्हें अपने पास रखा खाना दिया और बच्चों के लिए नाश्ते की व्यवस्था कराई। शाम को प्रशासन द्वारा एक वाहन से अन्य मजदूरों के साथ झांसी भिजवाने की व्यवस्था की।
कुछ रहे खुशकिस्मत मिला वाहन
शहर में महाराष्ट्र के नासिक, इगतपुरी, कल्याण, जलगांव सहित अन्य जिलों के सैकड़ों मजदूर रोजाना पैदल चलकर खंडवा पहुंच रहे है। इसमें से अधिकतर मजदूर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के है। कुछ खुशकिस्मत रहे कि उन्हें प्रदेश की सीमा तक जाने के लिए वाहन मिला तो अधिकतर वाहन की व्यवस्था नहीं होने पर पैदल ही सैकड़ों किमी का सफर पैदल करने को मजबूर है। सोमवार को अमरावती से खंडवा पहुंचे 27 मजदूरों को स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया। संयुक्त कलेक्टर एसएल सिंघाड़े ने बताया कि इन सभी मजदूरों को उनके गांव शेखपुरा, जाड़ीखेड़ा भेजने के लिए वाहन की व्यवस्था की जा रही है।

मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned