Google map पर देखकर ढूंढा दुर्गम टापू, अब बना ऐसा टूरिस्ट स्पाट कि आ रहे हजारों सैलानी

कहानी टापू ढूंढने की: रास्ते दुर्गम थे इसलिए 15 साल पहले बाइक से खोजी थी यह जगह

By: deepak deewan

Updated: 06 Jan 2020, 04:06 PM IST

मनीष अरोरा/आनंद दराड़े बीड. इंदिरा सागर परियोजना के बैक वाटर की अथाह जलराशि से भरा हनुवंतिया टापू प्रदेश ही नहीं देश के पर्यटन स्थलों की सूची में अपना नाम दर्ज करा चुका है। हनुवंतिया पर इन दिनों पर्यटन विभाग की ओर से चौथा जल महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इसमें जल, थल और वायु में साहसिक गतिविधियों का आनंद उठाने पर्यटक पहुंच रहे हैं। पर जिस पर्यटन केंद्र पर आज जल, थल, वायु में गतिविधियां हो रही है, उसकी खोज बाइक पर बैठकर हुई। गूगल मैप पर अथाह जलराशि देख तत्कालीन पर्यटन सलाहकार इसका निरीक्षण करने बाइक से आए थे।


पर्यटन केंद्र हनुवंतिया देशभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। हनुवंतिया टापू की खोज इंदिरा सागर बांध परियोजना के पूर्ण होने के बाद 2005 में हुई थी। तत्कालीन पर्यटन बोर्ड भोपाल के सलाहकार व वर्तमान में पर्यटन बोर्ड कमांडेंट राजेंद्र निगम ने गूगल मैप पर देखा। यहां बैक वाटर की अथाह जलराशि को देखकर उन्हें यहां पर्यटन के प्रति असीम संभावनाएं दिखी। पूर्व नेविल ऑफिसर व कमांडेंट राजेंद्र निगम 2005 में पुनासा पहुंचे थे। यहां से हनुवंतिया के लिए कोई रास्ता नहीं होने पर वे पटवारी के साथ बाइक पर बैठकर तीन ओर पानी से घिरे टापू को देखने पहुंचे थे। दिनभर 100 किमी से भी ज्यादा सफर बाइक पर करके उन्होंने टापू के आसपास का निरीक्षण किया था।


इस बार अब तक 25 हजार सैलानी आए
पर्यटन बोर्ड द्वारा हनुवंतिया टापू के विकास के बाद तत्कालीन शिवराजसिंह सरकार ने यहां 2016 में 12 से 21 जनवरी तक पहला जल महोत्सव का आयोजन किया था। पहले जल महोत्सव में प्रचार-प्रसार के चलते 10 दिवसीय आयोजन में ही एक लाख पर्यटक यहां पहुंचे थे। इसके बाद 15 दिसंबर 2016 से 15 जनवरी 2017 तक दूसरा जल महोत्सव का आयोजन हुआ, जिसमें 1 माह में 1.75 लाख पर्यटकों की आमद हुई। तीसरा जल महोत्सव 15 अक्टूबर 2017 से 2 जनवरी 2018 तक लगाया गया, जिसमें ढाई माह से अधिक समय में 2.25 लाख पर्यटक यहां पहुंचे थे। कुल तीन जल महोत्सव में यहां पांच लाख पर्यटक देशभर से आए थे। 2018 में विधानसभा चुनाव के चलते चौथा जल महोत्सव स्थगित किया था, जो अब तीन फरवरी 2020 तक चलेगा। अब तक यहां 25 हजार पर्यटक आ चुके है, जो पिछले जल महोत्सव की तुलना में बहुत कम है।

निरीक्षण कर इसका नक्शा बनाया और गूगल मैप से भी चित्र निकाले
कमांडेंट निगम ने टापू का पूरा निरीक्षण कर इसका नक्शा बनाया और गूगल मैप से भी इसके चित्र निकाले। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन पर्यटन सचिव इकबालसिंह बैस और पर्यटन बोर्ड एमडी अश्विनी लोहानी, तत्कालीन कलेक्टर प्रदीप खरे को बताया। पर्यटन बोर्ड के तत्कालीन अधिकारियों ने इसमें रुचि दिखाई और मप्र सरकार के सामने इसका प्रोजेक्ट रखा। इसके बाद हनुवंतिया टापू के विकास की योजना पर्यटन विभाग ने शुरू की। पर्यटन बोर्ड के 10 साल के अथक प्रयासों के बाद सात एकड़ में सात करोड़ रुपए की लागत से 2015 में हनुवंतिया टापू पर्यटन बोर्ड के नक्शे पर आया।


हनुवंतिया टापू मप्र सरकार की भी पसंद रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पहले जल महोत्सव में तीन बार यहां आए और दो रात रुके थे। दूसरे जल महोत्सव में भी पूर्व सीएम ने यहां तीन दिन बिताए थे, दो बार रात्रि विश्राम भी किया था। इस दौरान पहली बार क्रूज पर कैबिनेट की बैठक भी यहां हुई। तीसरे जल महोत्सव में भी पूर्व सीएम ने तीन दिन यहां बिताए थे, जिसमें कैबिनेट की बैठक भी यहां पर्यटन बोर्ड के होटल में हुई थी। चौथे जल महोत्सव में अब तक यहां कै बिनेट मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ दो दिन बिता चुकी है। वहीं, 3 जनवरी को चौथे जल महोत्सव का शुभारंभ पर सीएम कमलनाथ यहां 1.29 घंटे बिता चुके हैं। उन्होंने भी कैबिनेट की बैठक यहां होने के संकेत दिए हंै।

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