scriptKharif sowing will be done in 24 lakh hectares in Barwani district, fi | बड़वानी जिले में 24 लाख हेक्टेयर में होगी खरीफ बोवनी, तय किया रकबा | Patrika News

बड़वानी जिले में 24 लाख हेक्टेयर में होगी खरीफ बोवनी, तय किया रकबा

मानसून की आमद की संभावना के बीच खेतों में तैयारियां करने लगे किसान

खंडवा

Published: May 17, 2022 10:59:28 pm

बड़वानी. मौसम विभाग ने इस बार इस बार भी मानसून के सामान्य रहने की भविष्यवाणी के बीच जिले में किसान खरीफ सीजन की बोवनी की तैयारियों में जुट गए है। पश्चिमी विक्षोभ से बादलों की मौजूदगी के बीच खेतों में बैल जोड़ी, तो कहीं ट्रैक्टर के माध्यम से हल-बख्कर चलाकर बोवनी के लिए खेत तैयार हो रहे है। इस बार कृषि विभाग ने जिले में खरीफ का रकबा दो लाख 38 हजार से अधिक रकबा तय किया है।
बता दें कि देश में मई माह के अंत तक मानसून की दस्तक की आशंका है। बंगाल की खाड़ी में मानसून पहुंचने के साथ जून के प्रथम सप्ताह में जिले-प्रदेश में प्री मानसून की उम्मीद है। बरहाल वर्तमान में किसान रबी सीजन की फसलों की कटाई अंतिम दौर में कर रहे हैं। कई जगहों पर खेत साफ हो चुके हैं। बता दें कि इस समय जिले में इंदिरा सागर की नहरों में पानी बंद हैं। ऐसे में किसानों आसमानी बारिश पर ही निर्भर है। कृषि विभाग के अनुसार इस बार जिले में खरीफ सीजन में दो लाख 38 हजार 830 हेक्टेयर में विभिन्न फसलों बोवनी होगी। इसमें मुख्य रुप से 78 हजार 835 हेक्टेयर में कपास, 66 हजार 815 हेक्टेयर में मक्का और सोयाबीन की बोवनी 30 हजार 565 हेक्टेयर में होगी।
प्रस्तावित बोवनी
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सीजन 2022 में धान 385 हेक्टेयर, मक्का 66815 हेक्टेयर, ज्वार 18225 हेक्टेयर, बाजारा 6875 हेक्टेयर, उड़द 5415 हेक्टेयर, मूंग 5120 हेक्टेयर, अरहर 4715 हेक्टेयर, अन्य दलहन 1450 हेक्टेयर, तिल 35 हेक्टेयर, मूंगफली 9150 हेक्टेयर, सोयाबीन 30 हजार 565 हेक्टेयर, अन्य तिलहन 795 हेक्टेयर में बोवनी होगी।
मानसून की आमद की संभावना के बीच खेतों में तैयारियां करने लगे किसान
मानसून की आमद की संभावना के बीच खेतों में तैयारियां करने लगे किसान
अंजड़. तहसील की मुख्य फसल कपास है और यहां का किसान मानसून के पूर्व ही मई माह में अपने खेतों में कपास के बीज बो देते है। इसे स्थानीय भाषा में गर्मी का कपास कहा जाता है। इस फसल की सिंचाई मानसून के आने तक टपक सिंचाई पद्धति से की जाती है। इस साल अंजड़- ठीकरी क्षेत्र की बात करें तो दोनों तहसीलों में करीब 24 हजार हेक्टेयर कपास की बुवाई होने के अनुमान है। वहीं हजारों हेक्टेयर में कपास की बोवनी की शुरुआत किसानों द्वारा अक्षय तृतीया से शुरू हो चुकी है जो कि कपास की कुल फसल का 45 से 55 फीसद है।
अंजड़ व ठीकरी तहसील क्षेत्र में जिले का अधिकांश नर्मदा पट्टी का क्षेत्र इन्हीं दो तहसीलों में है। जिसमें प्रमुख रूप से कपास, गन्ना, केला की फसल बोई जाती है, इसके अलावा सजवाय (अंजड़) का रणजीत तालाब और सेंगवाल (ठीकरी) का तालाब दोनों एक बड़े हिस्से के खेतों की प्यास बुझाने का काम करते है, जो कि इंदिरा सागर नहरों के पानी के कारण भरे हुए है। बीते वर्ष जहां अंजड़ क्षेत्र में 10863 हेक्टेयर व ठीकरी क्षेत्र में 8662 हेक्टेयर में कपास लगाया गया था जो इस साल कपास के भाव अधिक मिलने से किसानों की पहली पसंद कपास ओर सोयाबीन बना हुआ है। अंजड और ठीकरी तहसील मिलाकर ठीकरी विकासखंड में कुल 24 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में इस साल कपास की फसल का अनुमान है। इसमें से करीब 3 हजार हैक्टेयर में मानसून के पूर्व ही कपास की फसल के बीज खेती की जमीन में बोवनी शुरू हो चुकी है। आखा तीज के बाद क्षेत्र में किसान खेतों में कपास के बीज का रोपण करना शुरू कर दिया है।

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