कोरोना योद्धा... नवविवाहिता पत्नी को गांव छोड़ लगे कोरोना मरीजों की सेवा में

कोरोना योद्धा...
-डॉ. भंडारे तीन माह तक लगातार करते रहे ड्यूटी, क्वॉरेंटीन भी हुए

खंडवा.
कोरोना संक्रमण काल में लगातार सेवाएं देकर बीमारी को मात देने में स्वास्थ्य विभाग के कोरोना योद्धा अब भी जुटे हुए है। विवाह के डेढ़ माह बाद ही कोरोना ड्यूटी के चलते मेडिकल कॉलेज के एमडी मेडिसिन डॉ. मोहन भंडारे पत्नी को गांव में छोड़कर कोरोना मरीजों की सेवा में जुट गए। तीन माह तक लगातार कोविड अस्पताल में ड्यूटी के दौरान उन्हें कई बार क्वॉरेंटीन भी होना पड़ा। इसके बाद भी वे लगातार मरीजों की सेवा में लगे रहे।
नांदेड़ से एक साल के बांड पर खंडवा मेडिकल कॉलेज में आए डॉ. मोहन भंडारे का विवाह 28 जनवरी को डॉ. प्रियंका कौशलवार के साथ हुआ है। इस दौरान कोरोना संक्रमण ने देश में पैर फैलाना शुरू कर दिए थे। खंडवा में भी कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए मार्च में ही ट्रामा सेंटर में आयसोलेशन वार्ड बनाया गया था। मरीज आने के पहले से ही डॉ. भंडारे की ड्यूटी आयसोलेशन में लग गई। जिसके बाद वे अपनी पत्नी को नांदेड़ (महाराष्ट्र) के गांव में छोड़ आए। तब से लेकर जून तक वे आयसोलेशन, कोविड केयर अस्पताल में कभी कॉल ड्यूटी तो कभी रेग्यूलर ड्यूटी कर रहे थे। अब वे क्वॉरेंटीन समयावधि पूरी होने के बाद शनिवार से जिला अस्पताल में ओपीडी संभाल रहे है। डॉ. भंडारे ने बताया कि तीन साल ग्वालियर मेडिकल कॉलेज में कार्य के दौरान अधिकतर स्वाइन फ्लू की ड्यूटी की थी। इसलिए कोरोना की ड्यूटी से डर नहीं लगा। इसी के चलते वे कोरोना मरीजों को भी फिजिकली और मेंटली तौर पर इस बीमारी के डर को निकालकर मनोबल बढ़ाते रहे है। अपनी ड्यूटी के दौरान उन्होंने एक साथ 11 मरीजों को ठीक कर डिस्चार्ज भी किया है।

मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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