ओटी में ऑपरेशन नहीं, आइसीयू बंद, सोनोग्राफी पर लटके ताले

हाल ए मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल
-विशेषज्ञ डॉक्टर्स की कमी और तकनीकी खराबी ने बढ़ाई मरीजों की परेशानी
-ऑपरेशन के लिए मरीजों की सूची हो रही लंबी, हार्ट के मरीज इंदौर रेफर
-सोनोग्राफी के लिए सिर्फ निजी सेंटर्स का सहारा

खंडवा.
जिलेवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए आधा अरब से ज्यादा का मेडिकल कॉलेज बना, जिला अस्पताल का उन्नयन हुआ, लेकिन सुविधाओं के नाम पर मरीजों को सिर्फ परेशानी मिल रही है। स्व. नंदकुमारसिंह चौहान मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल के हाल ये है कि यहां ऑपरेशन के लिए मरीजों की लंबी सूची इंतजार में है। आठ माह से अधिक समय से सोनोग्राफी कक्ष पर ताले लटके हुए है। अब तकनीकी खराबी के चलते एक माह से नया आइसीयू भी बंद पड़ा हुआ है। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल प्रबंधन डॉक्टरों की कमी कहकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं।
जिला अस्पताल में 91 लाख की लागत से बने आईसीयू का लोकार्पण दिसंबर में दिवंगत सांसद नंदकुमारसिंह चौहान द्वारा किया गया था। 10 बेड के आइसीयू में आधुनिक उपकरण भी स्थापित किए गए। पिछले एक माह से आइसीयू के एसी का पैनल खराब होने से इसका उपयोग बंद कर दिया गया है। यहां लगे एसी अभी गारंटी अवधि में ही है। भोपाल से आए कंपनी के इंजीनियर ने जांच के बाद एसी का पैनल सुधार के लिए कंपनी भेजा था। इसको भी एक सप्ताह से ज्यादा समय हो गया है। अब तक एसी का पैनल नहीं सुधर पाया है। जिसके चलते गंभीर बीमारों के लिए खासतौर पर हृदय रोगियों को इंदौर रेफर करना पड़ रहा है। आपात स्थिति में चार बेड के पुराने आइसीयू में मरीज भर्ती किए जा रहे है।
आठ माह से अधिक समय से बंद सोनोग्राफी
जिला अस्पताल के नैदानिक केंद्र में स्थित सोनोग्राफी कक्ष पर पिछले 8 माह से भी अधिक समय से ताला लटका हुआ है। जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट को लकवा होने से वे मेडिकल अवकाश पर है। करीब सालभर पहले मेडिकल कॉलेज की रेडियोलॉजिस्ट भी काम के दबाव में इस्तीफा दे चुकी है। इसके बाद से यहां कोई भी रेडियोलॉजिस्ट अस्पताल प्रबंधन या मेडिकल कॉलेज की ओर से नहीं आया है। लेडी बटलर में महिला चिकित्सक खुद ही महिलाओं की सोनोग्राफी कर रहीं हैं। जबकि जिला अस्पताल के मरीजों को निजी सेंटर्स पर जाकर सोनोग्राफी करवाना पड़ रही है।
एक दिन छोड़कर हो रहे ऑपरेशन
जिला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में रोजाना होने वाले ऑपरेशन भी अब एक दिन छोड़कर हो रहे है। निश्चेतना विशेषज्ञ की कमी के चलते डॉक्टर्स भी ऑपरेशन नहीं कर पा रहे है। जिला अस्पताल में तीन मेन ओटी, एक नेत्र ओटी और लेडी बटलर में एक ओटी संचालित होती है। यहां कुल मिलाकर तीन ही एनेस्थेटिक जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के पास है। लेडी बटलर में सीजर ऑपरेशन जरूरी होने से सभी एनेस्थेटिक की ड्यूटी वहां लगाई गई है। जिला अस्पताल में माइनर ऑपरेशन के लिए भी मरीजों की लंबी कतार लगी हुई है। यहां हड्डी रोग, सर्जरी विभाग, इएनटी, ऑप्थो के मेजर ऑपरेशन लगभग बंद है।
कोविड कॉल के बाद बढ़ी परेशानी
एनेस्थिसिया, रेडियोलॉजिस्ट की कमी हमारे पास लंबे समय से है। कोविड कॉल में एनेस्थेटिक और रेडियोलॉजिस्ट की मांग बड़े शहरों में बढ़ी है, जिसके कारण खंडवा कोई आना नहीं चाह रहा। हम कई बार इसके लिए विज्ञप्ति भी जारी कर चुके हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग को भी इसकी जानकारी है।
डॉ. अनंत पंवार, डीन, एनकेएस चौहान मेडिकल कॉलेज
उच्च अधिकारियों को दी है जानकारी
आइसीयू के पैनल को सुधारने के लिए कंपनी के अधिकारियों से कह चुके हैं। हमारा रेडियोलॉजिस्ट बीमार होकर अवकाश पर है। दो एनेस्थेटिक लेडी बटलर में सेवा दे रहे है। डॉक्टर्स की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है।
डॉ. ओपी जुगतावत, सिविल सर्जन जिला अस्पताल

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मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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