साल में एक बार मंदिर से बाहर आ जाते हैं ये गणेश, खाते हैं शकरकंद

मंदिर से बाहर आ जाते हैं ये गणेश

ओंकारेश्वर. क्षेत्र में मकर संक्रांति और लोहड़ी की धूम मची हुई है। इससे पहले सोमवार को संकष्टी चतुर्थी व्रत भी मनाया गया। आम बोलचाल में लोग इसे संकट चौथ भी कहते हैं। इस मौके पर मंदिरों में गणेशजी की दर्शन-पूजन के लिए लोगों की कतार लग गई थी।


साल की इस बड़ी संकष्टी गणेश चतुर्थी पर ओंकारेश्वर मध्याह्नकाल पुजारी पं. बाला सुधाकर राव शास्त्री के निवास स्थित प्राचीन गणेश मंदिर का पट खोला गया। वरिष्ठ पं. सुरेशचंद्र त्रिवेदी द्वारा महाअभिषेक किया गया। ये आयोजन पीढिय़ों से पुजारी परिवार द्वारा किया जा रहा है। शास्त्री परिवार के वरिष्ठ आनंद शास्त्री ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से हमारे पूर्वजों द्वारा चली आ रही है। जिसका हम निर्वाह कर रहे हंै।

गणेश को शकरकंद का भोग लगाना व शकरकंद सेवन करने की भी परंपरा

वर्ष भर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए एक बार भगवान श्री गणेश के पट खोले जाकर 11 सौ गणेश अथर्वशीर्ष पाठ से अभिषेक पं. सुरेशचंद्र त्रिवेदी के आचार्यतत्व में किया जाता हैं। इसके बाद भोजन प्रसादी भंडारे का आयोजन किया गया। शास्त्री ने बताया इस दिन भक्त भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और उनकी पूजा अर्चना करते हैं। शाम को चांद निकलने के बाद व्रत खोला जाता है। संकट चौथ के दिन भगवान गणेश को शकरकंद का भोग लगाना व शकरकंद सेवन करने की भी परंपरा है। इस व्रत को महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश के ज्यादातर इलाकों में किया जाता है।

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