महाशिवरात्रि पर सबसे ज्यादा फलदायी मानी जाती है इस ज्योतिर्लिंग की पूजा

सबसे ज्यादा फलदायी मानी जाती है इस ज्योतिर्लिंग की पूजा

By: deepak deewan

Updated: 18 Feb 2020, 10:02 AM IST

ओंकारेश्वर. ओंकारेश्वर को तीर्थनगरी के रूप में भी जाना जाता है। यहां न केवल 12 ज्योतिर्लिंग में से एक ज्योतिर्लिंग विद्यमान है बल्कि शिवपुत्री के रूप में जानी जाती मां नर्मदा भी बहती है। नर्मदा के बिल्कुल किनारे पर स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंंग के दर्शन और पूजन की महत्ता अलग ही मानी जाती है।


ओंकारेश्वर में 21 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारी चल रही है। इस दिन यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं। महाशिवरात्रि पर्व के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला एक दिन पूर्व ही शुरू हो जाता है। इस महापर्व पर मालवा-निमाड़ सहित देशभर से बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचेंगे। इस दिन ब्रह्ममुहुर्त में नागरघाट, कोटितीर्थघाट, गौमुखगाट, केवलरामघाट, चक्रतीर्थघाट, नर्मदा-कावेरी संगमघाट सहित अन्य घाट श्रद्धालुओं से भर जाते हैं। भक्त पहले नर्मदा स्नान करते हैं और इसके बाद श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन और पूजा करते हैं। इसके साथ ही ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर ओंकार पर्वत की परिक्रमा भी लगाते हैं। इसके साथ ही यहां अन्य कई बड़े मंदिर भी हैं। यहां के मठ और आश्रमों में भी महाशिवरात्रि पर्व भव्य स्तर पर मनाया जाता है।


महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के पट 24 घंटे खुले रहेंगे। आम दिनों में सुबह से लेकर सायं चार बजे तक ही भगवान के मूल स्वरूप पर जल व पूजन सामग्री चढ़ाने की अनुमति है लेकिन महाशिवरात्रि पर व्यवस्था बदली जा रही है। इस दिन श्रद्धालु रात्रि आठ बजे तक पूजन सामग्री अर्पित कर सकेंगे।

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