लैब में महिला, पुरुष के लिए एक ही शौचालय

नैदानिक केंद्र लैब में व्यवस्थाओं का अभाव
-जांच के लिए आए मरीजों के खड़े रहने की भी जगह नहीं

खंडवा.
जिला अस्पताल की नैदानिक केंद्र लैब में व्यवस्थाओं के अभाव में मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। नए भवन में शिफ्ट किए जाने के बाद यहां मरीजों के खड़े रहने की जगह भी कम पडऩे लगी है। साथ ही सबसे ज्यादा परेशानी यूरीन सैंपल के लिए हो रही है। सैंपल के लिए एक ही शौचालय होने से महिलाओं और पुरुषों को बारी-बारी उपयोग करना पड़ रहा है। पुरुषों के आने से कई बार महिलाएं झिझक के चलते सैंपल दिए बिना ही वापस जा रही है।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल बनने के बाद से जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में बार-बार परिवर्तन हो रहा है। नैदानिक केंद्र को भी बायो कैमेस्ट्री की आधुनिक लैब बनाए जाने के चलते पुराने एआरटी भवन में शिफ्ट किया गया है। यहां जांच के लिए आए मरीजों को पहले तो नीचे कक्ष में पंजीयन कराना होता है, उसके बाद ऊपरी मंजिल पर जाकर सैंपल देने पड़ते है। ऊपरी मंजिल पर छोटा सा गलियारा होने के कारण मरीजों की संख्या के अनुसार जगह छोटी पड़ रही है। जिसके कारण स्टाफ को भी बाहर आने जाने मेें परेशानी होती है। वहीं, यहां सिर्फ एक ही शौचालय है जो स्टाफ के लिए बनाया गया है। महिला मरीजों के यूरीन सैंपल के लिए इसे ही इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही पुरुष मरीजों को भी इसी शौचालय में सैंपल के लिए भेजा जाता है। महिला मरीजों की संख्या अधिक होने से पुरुष मरीज को सैंपल के लिए पास बने सार्वजनिक सुलभ शौचालय भेज दिया जाता है।
आदेश के अनुसार कर रहे कार्य
नैदानिक केंद्र लैब छोटी होने से सभी को परेशानी हो रही है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की लैब प्रस्तावित है और पुराने भवन से भी नई लैब को जोड़ा जा रहा है। इस कारण से छोटे भवन में लैब को स्थानांतरित किया गया है। अस्पताल के प्रशासनिक आदेश के अनुसार कार्य किया जा रहा है। एक और शौचालय का प्रस्ताव भी बनाया गया है।
डॉ. अतुल माने, नैदानिक केंद्र प्रभारी

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मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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