पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद होने से आमजन की बढ़ी परेशानी

-लंबी दूरी की यात्रा के बारे में सोच भी नहीं पा रहे लोग, आवश्यक कार्य भी टाले
-तीन गुना किराया वसूल रहे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर छोटे वाहन चालक
-लॉक डाउन में खड़ी रही बसें, अब बस संचालक कर रहे टैक्स माफ करने की मांग

खंडवा.
कोरोना संक्रमण के चलते दो माह लॉक डाउन के बाद तीन सप्ताह से ज्यादा समय अनलॉक हुए हो चुका है। बस स्टैंड का लॉक डाउन अब भी जारी है। मार्च से थमे बसों के पहिए अब तक शुरू नहीं हो पाए है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हो रही है जो लंबे समय से बाहर जाने की तैयारी में थे। बस संचालन बंद होने से रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड से अन्य शहरों में जा रहे छोटे वाहन चालक मनमाना किराया वसूल कर रहे है। वहीं, डीजल के बढ़े भावों के चलते निजी टैक्सी का किराया भी बढऩे से अधिकतर लोग अपनी यात्रा टाल रहे हैं।
23 मार्च को लगे लॉक डाउन के बाद से शहर के दोनों प्रमुख बस स्टैंड पर अब तक सन्नाटा छाया हुआ है। 3 जून से लॉक डाउन खुलने के बाद भी बसों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। बस संचालकों की मांग है कि तीन माह का टैक्स माफ किया जाए और बढ़े हुए डीजल के भाव के हिसाब से बस का किराया भी बढ़ाया जाए। दूसरा मुद्दा कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन कराना है, जिसके चलते सवारियों की संख्या भी बस संचालकों को कम करना पड़ेगी। इन मुद्दों पर बस संचालकों और सरकार के बीच सहमति नहीं बनने से बसों का संचालन भी अधर में है।
बसें बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी इंदौर, खरगोन, बड़वानी, मूंदी, पुनासा और ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को हो रही है। इन रूट पर सार्वजनिक परिवहन का कोई दूसरा साधन नहीं है। जिसके चलते यात्रियों को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड से चल रहे छोटे वाहनों, ऑटो का सहारा लेना पड़ रहा है। यहां यात्रियों से मनमाना किराया वसूल किया जा रहा है। इंदौर के लिए प्रति यात्री 400 से 500 रुपए लिए जा रहे है। जबकि लॉक डाउन लगने से पूर्व तक प्रति यात्री 120 से 150 रुपए तक का किराया लगता था। खरगोन के लिए अब दौ सौ से तीन सौ रुपए लिए जा रहे है। बाहर से आ रहे यात्रियों को मजबूरन जाना पड़ रहा है। वहीं, टूर एंड ट्रैवल्स पर भी टैक्सी वाहन का किराया दौ सौ से तीन सौ रुपए तक बढ़ गया है।
इंजेक्शन लगाने के लिए जाना पड़ता इंदौर
गणेश तलाई निवासी सुनीता शाह ने बताया कि उन्हें शुगर की बीमारी है और आंखों में भी तकलीफ है। उनकी आंखों में इंजेक्शन लगाना पड़ता है। जिसके लिए हर 15 दिन में इंदौर जाना पड़ता है। पहले बस से चले जाते थे, अब बस बंद है तो 400 रुपए में निजी वाहन से जाना पड़ रहा है। वहीं, बुधवारा निवासी सतीश शर्मा ने बताया कि उन्हें जरूरी काम से बड़वानी जाना था। निजी ट्रेवल्स पर पता किया तो तीन हजार रुपए की किराया टैक्सी का लग रहा है। बस स्टैंड से जाने वाले निजी वाहन 500 रुपए प्रति सवारी मांग रहे है। सरकार को बसों का संचालन जल्द चालू कराना चाहिए, ताकि लोगों की परेशनी दूर हो।
पांच साल से नहीं बढ़ा किराया
बस संचालक सुनील आर्य ने बताया कि पिछले पांच साल से सरकार ने बसों का किराया नहीं बढ़ाया है। आज भी बस संचालक 97 पैसे किमी के हिसाब से किराया ले रहे है। लॉक डाउन में तीन माह बसें खड़ी रही, उसके बाद भी ऑनलाइन टैक्स और बीमा भरना पड़ा। डीजन का भाव तीन माह में 12 रुपए तक बढ़ गया। सरकार न तो टैक्स में छूट दे रही है, न बीमा में और न ही किराया बढ़ा रही है। बसों में सवारी भी सोशल डिस्टेंस के हिसाब से बिठाना है। ऐसे में बसें चलाने से ज्यादा बेहतर बसों को खड़ा रखना है।

मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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