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Superstition... खून की कमी का इलाज गर्म सलाखों से गोदकर

-7 माह के बालक, 10 माह की बालिका को लगाया चचुआ
-सरकारी तंत्र फेल, स्वास्थ्य विभाग, महिला बाल विकास की योजनाओं पर प्रश्न चिह्न
-मामला खालवा ब्लॉक के गांवों का, दोनों बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती

खंडवा

Updated: June 11, 2022 12:25:16 am

खंडवा.
स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी आदिवासी अंचल में सरकार का सिस्टम फेल नजर आ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में कमी का फायदा आदिवासी अंचल में झोलाछाप और तांत्रिक उठा रहे है। आदिवासी अंचल में अंधविश्वास इतनी पराकाष्ठा पर पहुंच गया है कि इलाज के नाम पर नवजात से लेकर 10 माह के बच्चों को गर्म सलाखों से दागा जा रहा है। ऐसे ही दो मामले जिला अस्पताल में पहुंचे है। जिसमें सात माह के बालक और 10 माह की बालिका का पहले चचुआ (गर्म सलाख) लगाकर किया गया। स्थिति गंभीर होने पर परिजन बच्चों को अस्पताल में लेकर पहुंचे।
जिला अस्पताल के शिशु रोग वार्ड में तीन दिन पूर्व खालवा ब्लॉक के ग्राम चिमईपुर निवासी सात माह के बच्चे को भर्ती कराया गया। बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही थी, जांच में उसे निमोनिया और खून की कमी पाई गई। बच्चे के पेट पर गर्म चिमटे से दाग के निशान थे। बच्चे के पिता ने बताया कि तीन माह पूर्व भी बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। गांव के लोगों ने कहा था बड़वा बाबा (तांत्रिक) से चचुआ लगवा लो ठीक हो जाएगा। जिसके कारण चचुआ लगवाया था। बच्चे की तबीयत फिर भी नहीं सुधरी, तब से ही बीमार है। एक सप्ताह पहले हरदा में भर्ती कराया था। वहां खून चढ़ाया, अब जिला अस्पताल ले आए हैं। वहीं शुक्रवार को खालवा ब्लॉक की ही 11 माह की बालिका को भी सांस लेने में तकलीफ के चलते परिजन जिला अस्पताल लेकर आए। उदियापुरा निवासी बालिका के पेट पर भी गर्म सलाखों से दागने के निशान थे। इस बारे में उसके परिजन ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।
नहीं हो रही एनीमिया की जांच
प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल के ड्रीम प्रोजेक्ट मिशन हिमोग्लोबिनपैथी में सिकलसेल, एनीमिया की स्क्रीनिंग कर खून की कमी के मरीजों को चिह्नित किया जाना है। आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं के ये हाल है कि उप स्वास्थ्य केंद्रों के ताले ही नहीं खुल रहे है। भर्ती बच्चे के पिता ने बताया कि गांव के अस्पताल में कोई नहीं आता, इसलिए चचुआ लगवाया था। कुपोषण और एनीमिया की जांच के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को भी घर-घर जाकर जानकारी लेना है, लेकिन यहां भी लापरवाही हो रही है।
बच्चे के शरीर पर लगे गर्म सलाख के दाग
शिशु रोग वार्ड में दो बच्चों को भर्ती किया है, जिन्हें निमोनिया की शिकायत है और खून की कमी है। बच्चों का इलाज किया जा रहा है। दोनों बच्चों के शरीर पर गर्म सलाख या चिमटे से दागने के निशान भी है। अंधविश्वास के कारण आदिवासी लोग बच्चों का इस तरह से इलाज करवा रहे हैं, जो गलत है।
डॉ. प्रमिला वर्मा, एचओडी शिशु रोग विभाग
अज्ञानता और अंधविश्वास है
अंधविश्वास के चलते इस तरह से दाग लगवाते है, इसके लिए महिला बाल विकास के माध्यम से जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। यदि संबंधित क्षेत्र में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं खुल रहे या स्टाफ नहीं आ रहा है तो जानकारी लेकर कार्रवाई करेंगे।
डॉ. शरद हरणे, सीएमएचओ




Superstition... खून की कमी का इलाज गर्म सलाखों से गोदकर
खंडवा. सात माह के बालक के शरीर पर लगे गर्म चिमटे से दागने के निशान।

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