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आस्था पर अंधेरे का साया, लाखों रुपए से निर्मित घाट पर नहीं है बिजली व्यवस्था

डूब के चलते गर्मी में भी विद्युत से वंचित शहर के समीप मां नर्मदा तट, श्रद्धालुओं ने उठाई मांग

खंडवा

Published: May 22, 2022 05:59:30 pm

बड़वानी. नर्मदा तट राजघाट पर इन दिनों रंगाई-पुताई के बाद सौंदर्य देखते ही बन रहा हैं। भीषण गर्मी से जूझ रहे शहरवासी बड़ी संख्या में शाम के समय स्नान व पूजन-दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि इस दौरान आस्था पर अंधेरे का साया नहीं हट पा रहा हैं। डूब के बावजूद श्रद्धालुओं घाट निर्माण समिति के तत्वावधान में यहां लाखों रुपए खर्च कर भव्य नया घाट निर्माण करवाया है। इससे श्रद्धालुओं को स्नान में सहुलियत मिली है। वहीं घाट को रोशन करने को लेकर प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हो सकी। ज्ञात हो कि जिला मुख्यालय पर एकमात्र नर्मदा का तट होकर घाट से पौराणिक, प्राचीन व इतिहासिक महत्व जुड़ा हैं। वर्षभर श्रद्धालु तीज-त्योहारों पर यहां पहुंचते हैं।
आस्था पर अंधेरे का साया, लाखों रुपए से निर्मित घाट पर नहीं है बिजली व्यवस्था
आस्था पर अंधेरे का साया, लाखों रुपए से निर्मित घाट पर नहीं है बिजली व्यवस्था
मुख्यमंत्री से करेंगे मांग
नर्मदा भक्त व घाट निर्माण समिति के सचिन शुक्ला, अश्विन पप्पू पुरोहित, राजेंद्र पांडेय, प्रमोद जोशी, संजय पुरोहित, अजयसिंह ठाकुर ने बताया कि घाट निर्माण समिति के तत्वावधान में यहां साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता हैं। वर्तमान में रंगाई-पुताई से घाट की सुंदरता बढ़ गई हैं। दिनभर गर्मी से राहत पाने के लिए सायंकाल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। कोई जलक्रीड़ा, तो कोई घाट पर बैठकर अध्यात्मिक सुकून पाता हैं। हालांकि घाट पर विद्युत व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं को दिक्कत आती है। वहीं अंधेरा होने पर हादसों की आशंका बनी रहती है। प्रशासन ने यहां घाट पर पर्याप्त विद्युत व्यवस्था करवाना चाहिए। वर्षाकाल में विद्युत उपकरण निकालने व शेेष समय लगे रहने की व्यवस्था करना चाहिए। श्रद्धालुओं ने बताया कि जिले में गौरव दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के आएंगे, तब उनको नर्मदा तट पर विद्युत व्यवस्था की मांग से अवगत कराएंगे।
सात-आठ डूब से बाहर रहता रहता है तट
बता दें कि सरदार सरोवर बांध की डूब में शामिल ग्राम कुकरा-राजघाट का यह नर्मदा तट पर बारिश के दौरान डूब या टापू की स्थिति बनती है। हालांकि वर्ष में सात से आठ माह नर्मदा का बैकवाटर लेवल डूब व खतरे के निशान से नीचे रहता है। पूर्ण डूब के चलते प्रशासन ने यहां विद्युत सप्लाय बंद करवाया दिया जाता है। वर्षा के बाद अक्टूबर-नवंबर में घाट से बैकवाटर कम होकर लोगों की आवाजाही शुरु हो जाती है, जो वर्षाकाल जुलाई-अगस्त तक रहती हैं। बैकवाटर खतरे के निशान को लांघने के बाद घाट डूबता हैं।

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