विलुप्त होती रामलीला को बचाने शहर-शहर नि:शुल्क कर रहे धर्म प्रचार

35 साल से काशी उत्तरप्रदेश का धर्म प्रचारक रामलीला मंडल कर रहा रामलीला

By: dharmendra diwan

Published: 06 Jan 2020, 12:50 PM IST

खंडवा. कई दशक पहले जब भारत में टीवी, कम्प्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल नहीं हुए करते थे, तब मनोरंजन का साधन नाच, गम्मत, रामलीला और रासलीला हुआ करती थी। पर अब हर किसी के पास टीवी, कम्प्यूटर, मोबाइल है। हर कोई इंटरनेट से रामायण, महाभारत व अन्य धार्मिक कार्यक्रम देख लेते हंै। इससे आज शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रामलीला की परंपरा खत्म होने के कगार पर आ गई है। विलुप्त होती रामलीला का कायम रखने के लिए कुछ लोग इसका मंचन कर रहे है। इसमें से एक विंध्याचलधाम काशी (उत्तरप्रदेश) का धर्म प्रचारक रामलीला मंडल है।

यह मंडली 35 वर्षों से शहर-शहर जाकर नि:शुल्क कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे हंै। यह मंडल सालभर अलग-अलग स्थानों पर ऐसे ही कार्यक्रम कर विलुप्त होती रामलीला को बचाकर धर्म का प्रचार कर रहे हंै। विंध्याचल धाम काशी धर्म प्रचारक रामलीला मंडल अब खंडवा में भी अपना धर्म का प्रचार करने पहुंचे हैं। ये शहर के सियाराम चौक पर सोमवार से रामायण पाठ रामलीला के माध्यम से धर्म का प्रचार करेंगे।

35 साल से कलाकार निभा रहे हैं ये परंपरा
मंडल के संचालक प्रशांत मिश्रा ने बताया 35 साल से धर्म प्रचारक रामलीला मंडल रामलीला करते आ रहा है। इसमें 21 सदस्य है। ओमप्रकाश पांडे दशरथ, राजा जनक, रावण का पात्र कर रहे है। आशीष चतुर्वेदी भगवान राम, अरुण शुक्ला लक्ष्मण, राहुल तिवारी सीता, सुंदर लाल मिश्रा हनुमान, रामायण पाठ व्यासपीठ अवधेश प्रसाद शुक्ला, पारस नाथ दुबे सहित अन्य सदस्य शामिल है।

दान-दक्षिणा से परिवार का करते है भरण-पोषण
मंडल के ओमप्रकाश पांडे ने बताया हमारा मंडल रामलीला नि:शुल्क करते है। श्रोताओं द्वारा दिए दान-दक्षिणा से ही वे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पूरे 12 माह तक अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

दस दिन रामलीला में यह होगा मंचन
पहला दिन: पृथ्वी पुकार, पुत्र दृष्टि यज्ञ, प्रभु श्रीराम जन्म का मंचन।
दूसरे दिन : मुनि आगमन, मारीच सुबाहु वध।
तीसरे दिन : अहिल्या उद्धार, गंगा अवतरण, नगर दर्शन, फुलवारी में सीता-राम का पहली बार मिलन।
चौथ दिन : रावण बाणासुर संवाद, स्वयंवर, राजा जनक का विलाप, राम धनुष का खंडन।
पांचवें दिन : राम परशुराम संवाद, सीता-राम विवाह।
छठें दिन: राम वनवास, दशरथ प्रतिज्ञा, मंथरा-कैकई संवाद, दशरथ-कैकई संवाद।
सातवें दिन : केवट राम संवाद, अनुशुईया सीता उपदेश,सीता हरण।
आठवें दिन: राम हनुमान भेंट, लंका दहन।
नौवें दिन : रामेश्वर स्थापना, अंगद रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, कुंभ करण, मेघनाथ वध।
10वां दिन: रावण वध, राम राज्य अभिषेक।

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