scriptएक हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती करेंगी महिलाएं, खेती को लाभ का धंधा बनाएंगी ‘ ड्रोन दीदी ’ | Women will do natural farming, ' daughters will make farming a profitable business | Patrika News
खंडवा

एक हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती करेंगी महिलाएं, खेती को लाभ का धंधा बनाएंगी ‘ ड्रोन दीदी ’

चार बेटियों को तकनीकी प्रशिक्षण

खंडवाJun 17, 2024 / 01:07 pm

Rajesh Patel

आजीविका मिशन ने एक हजार हेक्टेयर में खेती का तैयार किया ब्लू प्रिंट, ट्रेनिंग से लौटी ड्रोन दीदियां खेत पर पहुंची

चार बेटियों को तकनीकी प्रशिक्षण

खरीफ सीजन में समूह की महिलाएं एक हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती करेंगी। इस खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए ‘ ड्रोन दीदी ’ सहयोग करेंगी। प्रारंभिक चरण में खंडवा, छैगांव माखन, हरसूद और पंधाना में समूह की चार बेटियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया है। भोपाल और ग्वालियर में प्रशिक्षण लेकर लौटी बेटियां ड्रोन के साथ खेती पर पहुंचीं। इंजीनियर्स के सहयोग से ड्रोन पायलट बन गईं। चार ब्लाक में एक-एक समूह की बेटियां प्राकृतिक खेती को कम लागत के साथ ही समय और पानी की बचत का हुनर सीख रहीं हैं।
55 महिलाओं को प्रशिक्षित

आजीविका मिशन ने खरीफ सीजन में प्राकृतिक खेती करने के लिए कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन ( सीआरपी ) तैयार कर रहा है। अब तक सीआरपी के दो बैच में 55 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया। इसमें चार ब्लाकों की महिलाएं शामिल हैं। महिलाएं प्रशिक्षण के बाद प्राकृतिक खेती की तैयारी में जुट गई हैं। कुछ महिलाओं ने घरेलू सामग्री से जैविक खाद तैयार करना शुरू कर दिया है। हरसूद ब्लाक में संत सेवालाल आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाएं प्राकृतिक खेती को लेकर खासी उत्साहित हैं। महिलाओं ने कहा कि प्राकृतिक खेती को लाभ का धंधा बनाने बेटी को ‘ ड्रोन दीदी ’ बनाने भोपाल में ट्रेनिंग के लिए भेजा है। बेटी ड्रोन पायलट बनकर लौटी है। अब खेत पर डेमो के लिए ड्रोन से पानी और खाद के घोल का छिड़काव करना सीख रहीं हैं।
ड्रोन की मदद से पानी, पैसा और समय बचाएंगे

समूह की बेटी कविता चौहान स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुकी। अब माता-पिता के साथ प्राकृतिक खेती में हाथ बंटाने ड्रोन दीदी बन गईं। कविता का कहना है कि प्राकृतिक खेती से पानी, पैसा और समय तीन बचत करेंग। इसी बचत से खेती लाभ का धंधा बनेगी। गौ-मूत्र से जैविक खाद का घोल तैयार करेंगे। ड्रोन से छिड़काव करने में पानी, लागत और समय बचेगा। एक एकड़ में ड्रोन से छिड़काव पांच से दस मिनट लगेंगे। सामान्य तौर पर डेढ़ से दो घंटे छिड़काव में लगते हैं। इसी तरह पानी पंद्रह लीटर के बजाए पांच लीटर में लगेगा। बाजार की महंगी खाद से मुक्ति मिलेगी। स्वयं देशी सामग्री से जैविक घोल तैयार करेंगे।
समूह की ये बेटियां बनी ‘ ड्रोन दीदी

आजीविका मिशन की ओर से खंडवा, पंधाना, हरसूद और छैगांव माखन ब्लाक से समूह की एक-एक बेटियों को ग्वालियर और भोपाल भेजकर ड्रोन पायलट बनने की ट्रेनिंग दिलाई। खंडवा में आशा पटेल ड्रोन दीदी बनी हैं। आशा 12 वीं तक पढ़ाई करने के बाद परिवार के साथ खेती शुरू कर दिया है। अब ड्रोल से आस-पास के किसानों को भी लाभ पहुंचाएंगी। इसी तरह हरसूद में कविता चौहान, छैगांव माखन ब्लाक में मनीषा पटेल ओर पुनासा में रंजना चौहान ड्रोन दीदी बन गई हैं। सभी ड्रोन दीदी ट्रेनिंग के बाद अपने-अपने गांव में ड्रोन से छिड़काव कर रहीं हैं।
ऐसे होगा फायदा

आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक आनंद शर्मा ने बताया कि ड्रोन एक बार में 10 लीटर पानी के माध्यम से एक एकड़ में दवाओं का छिडकाव करेगा। मात्र पांच से मिनट में छिड़काव पूरा हो जाएगा। एक समान फसलों पर छिड़काव होने से फसलों पर कृषि रसायनों का दुष्प्रभाव कम होगा और फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा। ड्रोन दीदी को भविष्य में आय भी होगी। नमो ड्रोन योजना में केंद्र ने कार्य योजना तैयार की है कि ड्रोन दीदी को प्रशिक्षण के बाद स्व सहायता समूहों को ड्रोन खरीदी पर सब्सिडी मिल सकेगी। और किसान किराए पर उपयोग कर सकेंगे।

Hindi News/ Khandwa / एक हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती करेंगी महिलाएं, खेती को लाभ का धंधा बनाएंगी ‘ ड्रोन दीदी ’

ट्रेंडिंग वीडियो