ओंकारेश्वर बांध जलाशय पर बनेगा विश्व का सबसे बड़ा तैरता हुआ सौर उर्जा प्लांट

-सूर्य से बनेगी 600 मेगावाट बिजली, 3 हजार करोड़ रुपए का होगा निवेश
-वल्र्ड बैंक व अतंर्राष्ट्रीय वित्त निगम ने पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन की योजना को दी सहमति
-2022-23 तक मिलने लगेगी सौर बिजली

खंडवा.
देश में सबसे बड़े सोलर पॉवर प्लांट के बाद अब प्रदेश को दुनिया का सबसे बड़ा तैरता हुआ सौर उर्जा प्लांट बनाने का गौरव भी मिलने जा रहा है। सोमवार को पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन की इस योजना को विश्व बैंक और अतंर्राष्ट्रीय वित्त निगम ने सैंद्धांतिक सहमति दे दी है। यह प्लांट नर्मदा नदी पर ओंकारेश्वर में बनेगा। 600 मेगावाट बिजली उत्पादन के इस प्लांट को बनाने में करीब 3 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इससे 2022-23 से बिजली मिलने लगेगी।
प्रदेश द्वारा हरित उर्जा और नवकरणीय उर्जा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। रीवा में सबसे बड़े सोलर प्लांट के बाद अब संभाग के नर्मदा नदी पर ओंकारेश्वर बांध पर सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट लाया जा रहा है। नवीन और नवकरणीय ऊर्जा मंत्री हरदीपसिंह डंग के अनुसार पावर ग्रिड कार्पोरेशन के सहयोग से यह योजना लाई जा रही है। परियोजना के लिए प्राथमिक अध्ययन विश्व बैंक के सहयोग से पूरा हो गया है। परियोजना से वर्ष 2022-23 तक विद्युत उत्पादन मिलने की संभावना है।
इसी माह शुरू होगा लाइनों का सर्वे
प्लांट लगाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया, पॉवर ग्रिड द्वारा परियोजना क्षेत्र से खंडवा सब-स्टेशन तक ट्रांसमिशन लाइन रूट सर्वे का कार्य शुरू होगा। परियोजना क्षेत्र के पर्यावरण और सामाजिक प्रभाव अध्ययन भी शुरू किया जा रहा है। मप्र पॉवर मेनेजमेंट कंपनी द्वारा परियोजना से 400 मेगावॉट विद्युत लेने की सहमति भी बन गई है।
2 हजार हैक्टेयर में बनेगा प्लांट
सह परियोजना बांध के बैक वॉटर क्षेत्र में आकार लेगी। इसके लिए 2 हजार हैक्टेयर जल क्षेत्र में सोलर पैनल लगा कर बिजली उत्पादन किया जाएगा। पैनल पानी की सतह पर तैरेंते रहेंगे, जल स्तर उपर नीचे होने पर स्वत ही संतुलित होंगे। इन पर तेज लहरों और बाढ़ का भी प्रभाव नहीं होगा।
मिलेगी सस्ती बिजली
प्रदेश में हाल ही में रीवा में 750 मेगावॉट क्षमता का एशिया का सबसे बड़ा अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क 1500 हैक्टेयर में शुरू हुआ है, जबकि ओंकारेश्वर का सोलर प्लांट पानी पर तैरने वाला होने से जमीन नहीं खरीदनी पड़ेगी। इससे परियोजना की लागत कम आने से सस्ती बिजली मिल सकेगी।
प्रदेश का पॉवर हब है खंडवा
4040 मेगावॉट बिजली उपत्पादन के साथ पहलेे से ही खंडवा जिला प्रदेश का पॉवर हब बन चुका है। यहां पन बिजली परियोजनाओं में ओंकारेश्वर बांध से 520, इंदिरा सागर परियोजना से एक हजार मेगावॉट बिजली बन रही है। वहीं, सिंगाजी थर्मल पॉवर प्लांट भी 2520 मेगावॉट क्षमता वाला है। अब सोलर प्लांट लगने से 600 मेगावॉट बिजली की क्षमता ओर बढ़ जाएगी।

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मनीष अरोड़ा Bureau Incharge
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