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मप्र का वह मंदिर जहां आज से सूर्य प्रकाश १५ फीट नीचे बने गृभग्रह में करने लगेगा प्रवेश

locationखरगोनPublished: Jan 15, 2024 10:34:22 am

Submitted by:

Gopal Joshi

मकर संक्रांति विशेष...
-खरगोन के नवग्रह मंदिर में दिनभर होंगे धार्मिक अनुष्ठान, १५० पंडित करेंगे सत्यनारायण पूजन

Makar Sankranti special...
खरगोन. इस तरह गर्भगृह तक पहुंचती है सूर्य किरणें।
खरगोन.
कुंदा नदी तट पर बना २२६ पुराना नवग्रह मंदिर शहर की पहचान है। यह मप्र का पहला ऐसा मंदिर हैं जहां सूर्य के उत्तरायण होते ही किरणें मंदिर के १५ फिट नीचे बने गर्भगृह तक पहुंचना प्रारंभ होती है। जून-जुलाई तक प्रतिमाओं व सूर्य रथ पर पूर्ण प्रकाश पहुंचता है। सोमवार को मकर संक्रांति पर यह दुर्लभ संयोग बनेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आएंगे और पूजन अर्चन के साथ भगवान सत्यनारायण की कथा कराएंगे।
पुजारी लोकेश द. जागीरदार ने बताया मंदिर की स्थापना व रचना २२६ साल पहले उनके वंशज व पूर्वज कर्नाटक के शेषप्पा सुखावधानी वैरागकर ने प्राचीन ज्योतिष के सिद्धांतों अनुसार की थी। उनकी छठी पीढ़ी के रूप में जागीरदार परिवार यहां की व्यवस्थाएं संभाल रहा है। मंदिर के तीन शिखर त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक है। मंदिर में नवग्रह की अधिष्ठात्री माता बगलामुखी स्थापित होने से पीताम्बरा ग्रहशांति पीठ कहलाता है।
किवद्वंति : ऐसे हुई मंदिर की स्थापना
पंडित जागीरदार ने बताया शेषप्पा देशाटन के लिए दक्षिण भारत आए और भ्रमण करते हुए इस स्थान पर पहुंचे। यहां रात्रि विश्राम किया। अनके अनुसार माता बगलामुखी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर उक्त स्थान के नदी तट पर सरस्वती कुंड व बगलामुखी स्थान व सिद्ध शांति मंत्र के आधार पर मंदिर का निर्माण किया।
मकर संक्रांति का विशेष महत्व
मकर संक्रांति का ज्योतिष अनुसार विशेष महत्व है। ज्योतिष में ग्रहों और नक्षत्रों के साथ ही राशियों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ता है।मकर संक्रांति का पर्व सूर्य उपासना का दिन है। नवग्रह मंदिर सूर्य प्रधान मंदिर है। इसके चलते सूर्य उपासना के महापर्व मकर संक्रांति पद उदयमान साक्षात सूर्य व मंदिर में स्थापित सूर्य मूर्ति के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व है। 1५ जनवरी को मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होना शुरु होंगे। भगवान सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही धरातल से करीब १५ फीट नीचे गर्भगृह में स्थित सूर्य चक्र और सूर्यदेव के रथ की ओर सूर्य की रोशनी का गमन शुरू होगा।
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बनेगा कॉरिडोर, बढ़ेगी पहचान
मंदिर परिसर में नवग्रह कॉरिडोर तैयार होगा। इसका नक्शा बनकर तैयार हो गया है। राशि स्वीकृति के साथ एजेंसी भी नियुक्त हो चुकी है। जिस हिसाब से यह परिकल्पना है, वह धरातल पर आएगी तो मंदिर की प्रसिद्धि को मप्र ही नहीं, देशभर में नए आयाम मिलेंगे।
आज होगी भगवान सत्यनारायण की कथा
मंदिर परिसर में मकर संक्रांति पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान सत्यनारायण की कथा कराते हैं। इसके लिए मंदिर परिसर में विशेष इंतजाम किए हैं। पंडितों की बैठक व्यवस्था के लिए लगभग १५० ब्लॉक बनाए गए हैं।

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