मनरेगा में बजट का संकट, पिछले साल से आधे मजदूरों को नहीं मिला काम

काम का इंतजार...गतवर्ष तीन लाख मजदूरों को मिला काम, 207 करोड़ का भुगतान, अप्रैल से जून तक एक लाख 7 हजार मजदूरों को रोजगार और 38.16 करोड़ का भुगतान

By: harinath dwivedi

Published: 10 Jun 2021, 12:05 PM IST

खरगोन. कोरोना महामारी में उद्योग-धंधे बंद रहे तो वहीं मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। दो जून की रोटी की तलाश में मजदूर परेशान हो रहे हंै। मनरेगा योजना में भी इस बार हजारों हाथों को काम नहीं किया। क्योंकि पर्याप्त बजट नहीं है। कोविड संक्रमण से निपटने के लिए सरकारी धन खर्च हुआ। ऐसे में मनरेगा योजना के तहत राशि कम मिली और उसका सीधा असर दिहाड़ी मजदूरों पड़ा है। पिछले साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में काम करने गए मजदूरों को वापस लौटना पड़ा। झिरन्या, भगवानपुरा, सेगांव और भीकनगांव ब्लॉक में प्रवासी मजदूर बाहर से आए हैं। मनेरगा में इस समय 26000 काम चल रहे हैं। इनमें तीन हजार कार्य जलसरंचना से जुड़े है। इनमें छोटे तालाब, खेत तालाब, वॉटर पौंड, स्टे्रक्चर, शासकीय बिल्डिंगों में रुफवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना शामिल है। तीन सौ सड़क कच्ची सड़कें बनाई जा रही है।

तीन महीने में 38.16 करोड़ का भुगतान
जिपं से मिली जानकारी के अनुसार जिले में गतवर्ष 2 लाख 99 हजार 822 लोगों को रोजगार दिया गया। इसमें 10 हजार से अधिक प्रवासी मजदूर भी शामिल रहे। पूरे साल में 207 करोड़ का भुगतान हुआ। झिरन्या जनपद काम देने के साथ भुगतान करने में अव्वल रही। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि इस वर्ष अप्रैल-मई और 9 जून तक एक लाख 07 हजार 186 को लोगों को ही काम मिला और 38.16 करोड़ का भुगतान किया गया। वहीं 13 करोड़ की सामग्री खरीदी गई, जिसकी राशि अभी शासन स्तर से जारी नहीं हुई।

harinath dwivedi Editorial Incharge
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