मेधा पाटकर के नेतृत्व में सेंचुरी यार्न श्रमिकों ने किया प्रदर्शन

मेधा पाटकर के नेतृत्व में सेंचुरी यार्न श्रमिकों ने किया प्रदर्शन
Century Yarn workers led by Medha Patkar

Hemant Jat | Publish: Jun, 06 2019 09:48:28 PM (IST) Khargone, Khargone, Madhya Pradesh, India

श्रम कार्यालय के बाहर श्रमिकों ने की नारेबाजी, बोले-वीआरएस नहीं रोजगार चाहिए, कंपनी के गेट खोलकर काम देने की मांग, हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने का लगाया आरोप

खरगोन.
जिले के औद्योगिक क्षेत्र सत्राटी में संचालित सेंंचुरी यार्न के श्रमिकों द्वारा अपने अधिकारों को मोर्चा खोल रखा है। मिल प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ श्रमिक पिछले करीब डेढ़ साल से सत्यागृह आंदोलन कर रहे हैं। गुरुवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में श्रमिक तथा परिवार की महिलाएं खरगोन पहुंची। यहां श्रम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। श्रमिकों ने इस दौरान जमकर नारे लगाए। दोपहर साढ़े १२ बजे से तीन बजे तक श्रमिक यहां बैठे रहे। मेधा पाटकर ने मजदूरों का पक्ष रखते हुए बताया कि सेंचुरी यार्न को बंद करके प्रबंधन सैकड़ों श्रमिक और उनके परिवारों का हक मार रहा है। यह एक सोची समझी साजिश हैं। इससे श्रमिकों के साथ कई लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। इसलिए सभी श्रमिक मिलकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। पाटकर ने आरोप कि हाईकोर्ट ने आदेशों का भी मिल प्रबंधन खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ टेक्सटाइल सेक्टर से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार देने की बात कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सेंचुरी यार्न जैसी कंपनियां मजदूरों का रोजगार छीन रही है। मेधा पाटकर सहित श्रमिकों ने श्रम अधिकारी शैलेंद्रसिंह सोलंकी के समक्ष नए विवाद प्रस्तुत किया था। जिसमें रोजगार देने अथवा कंपनी की शर्त अनुसार एक रुपए में मिल का संचालन मजदूरों को सौंपे जाने की बात कही। इस दौरान मिल प्रबंधन की ओर से डिप्टी मैनेजर अनिल दुबे भी मौजूद थे।

2017 से कंपनी में प्रोड्क्शन बंद
श्रमिकों के अनुसार सेंचुरी में 2017 से मिल के अंदर प्रोड्क्शन बंद है। जिससे वर्षों से काम कर रहे श्रमिकों की रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया। १७ अक्टूबर २०१७ से श्रमिकों द्वारा मिल को फिर से चालू करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। गुरुवार आंदोलन को 598 दिन पूरे हुए। लेकिन प्रबंधन ने कंपनी को चालू नहीं किया। श्रमिक जनता संघ के बैनर तले मजदूर, मिल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

श्रमिक बोले-मुफ्त का पैसा नहीं, काम चाहिए
मिल के खरगोन जिले सहित देश के कई राज्यों के श्रमिक काम करते हैं। इनकी संख्या 933 हैं। यूपी के रहने वाले राम आशीष यादव, भुवानसिंह, सत्येंद्र यादव, राकेश कुमरावत आदि ने बताया कि बीते 25 से 30 वर्षों से हम यहां काम कर रहे थे। अचानक मिल बंद होने से सैकड़ों परिवार बेरोजगार हो गए। श्रमिकों ने अपने अधिकारों के लिए श्रम विभाग और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जिसके बाद कोर्ट ने मजदूरों को वेतन और रोजगार देने के आदेश दिए गए, लेकिन कंपनी ने सिर्फ वेतन दिया, काम नहीं। श्रमिकों का कहना है कि हमें मुफ्त का पैसा नहीं, बल्कि काम चाहिए।

प्रकरण विचाराधीन
श्रमिक पक्ष ने रोजगार देने और मिल को चालू करने संबंधित विवाद दायर किया था। चूंकि मामला पूर्व से न्यायालय में विचाराधीन है। मिल प्रबंधन इस संबंध में स्थगन आदेश लेकर आया था। इसलिए दोनों पक्षों को सुना गया।
शैलेंद्रसिंह सोलंकी, जिला श्रम अधिकारी

न्यायलय का फैसला मानेंगे
कंपनी द्वारा श्रमिकों का वेतन का भुगतान किया जा रहा हैं। हमने अपनी कुछ मांगे न्यालालय के समक्ष रखी। वहां से जो फैसला आएगा, उसे मानेंगे।
अनिल दुबे डिप्टी मैनेजर सेंचुरी यार्न

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