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जिला मुख्यालय पर वन-क्लास मंडियां, फिर भी करोड़ों की उपज बाहर बिकी, जानें कारण

-अप्रैल में कफ्र्यू के कारण 16 दिन पूरी तरह बंद रही मंडियां, मई के शुरुआती दो दिन भी ताले, दो लाख क्विंटल से अधिक उपज अन्य शहरों तक पहुंची

खरगोन

Published: May 08, 2022 09:30:29 am

खरगोन.
अप्रैल का माह कारोबार की दृष्टि से व्यापारी वर्ग, किसान वर्ग सबके लिए मुसीबतें लेकर आया। दस अप्रैल को यहां रामनवमीं पर निकली शोभायात्रा के दौरान हुए पथराव व आगजनी ने बड़ा रूप लिया। खरगोन के इतिहास में पहली बार २४ दिन का कफ्र्यू लगा और इन दिनों में शहर का कारोबार उपद्रव की भेंट चढ़ गया। शहर में संचालित वन क्लास मंडियों में ताले लगे रहे। इससे दो लाख क्विंटल उपज अन्य शहरों में चली गई। व्यापार-व्यवसाय की दृष्टि से बेपटरी हुए शहर को पटरी पर लौटने में कितना समय लगेगा यह तो वक्त बताएगा लेकिन फिलहाल कफ्र्यू खुलने के बाद धीरे-धीरे जन-जीवन सामान्य हो रहा है।
अप्रैल में शहर की अनाज व कपास मंडी महज 5 दिन पूरा समय संचालित हो पाई। उपद्रव के बाद 16 दिन मंडी पूरी तरह बंद रही। मई के शुरुआती तीन दिन भी ताले लगे रहे। इस दरम्यान करीब 2 लाख क्विंटल से अधिक उपज मंडी तक नहीं पहुंच सकी। इससे बड़ा नुकसान मंडी प्रबंधन सहित व्यापारी, किसान व हम्माल वर्ग को हुआ है। बंद के दौरान करीब 50 करोड़ से ज्यादा की उपज अन्य शहरों व मंडियों में बिका है। अब मंडियों में ढील के दौरान नीलामी तो शुरू हो गई लेकिन व्यापारियों को खरीदी उपज को निर्यात करने में पसीने छूट रहे हैं। ट्रांसपोर्टिंग नहीं हो रही।
crores of produce was sold out
खरगोन. सामान्य दिनों में व्यापारियों द्वारा जो उपज खरीदी गई है वह ट्रांसपोर्ट नहीं हो रहा। इसे सहेजना बड़ी चुनौती है।
पहली बार दंगे की वजह से लंबे अंतराल तक बंद रही मंडी
व्यापारियों ने बताया शहर इसके पहले ही दंगों की आग में झुलसा है, लेकिन इतना लंबा कफ्र्यू कभी नहीं लगा। इससे अप्रैल माह में मंडी नियमित रूप से संचालित नहीं हो पाई। असर यह रहा कि 2 लाख क्विंटल उपज (गेहंू, चना, सोयाबीन, मक्का आदि) मंडी तक नहीं पहुंंचा।
50 लाख से ज्यादा मंडी शुल्क का घाटा
अभी गेहूं, चने का सीजन चल रहा है। सामान्य दिनों में 15 हजार से ज्यादा की उपज रोजाना मंडी तक पहुंच रही थी। इससे मिलने वाला मंडी शुल्क भी छिटक गया। अप्रैल में जितने दिन मंडी बंद रही उसमें 50 लाख रुपए से ज्यादा मंडी शुल्क का घाटा हुआ। इसके अलावा गेहंू का निर्यात भी रुका है। इससे व्यापारियों को नुकसान हुआ है।
20 हजार क्विंटल रोजाना थी आवक
मंडी सचिव केडी अग्निहोत्री ने बताया अनाज व कपास मंडी में मिलाकर रोजाना 20 हजार क्विंटल उपज लेकर किसान सामान्य दिनों में आते हैं। कफ्र्यू के कारण यह आवक अन्य मंडियों व शहरों में डायवर्ट हो गई। इससे मंडी का कारोबार बाधित हुआ है। इसकी भरपाई करना बड़ी चुनौती होगा। अनाज व कपास मंडी में 1.70 प्रतिशत शुल्क लगता है। इस हिसाब से जिनते दिन मंडियां बंद रही है नुकसान बड़ा हो चुका है।
अप्रैल में इस तरह खुली मंडियां
-01 से 8 अप्रैल तक अवकाश छोड़ मंडी खुली।
-10 अप्रैल को उपद्रव के बाद कफ्र्यू लगा।
-24 अप्रैल तक मंडियां पूरी तरह बंद रहीं।
-25 से 30 अप्रैल से ढील अवधि में मंडियां खुली।
-एक मई से 3 मई तक मंडी फिर बंद रही।
कफ्र्यू के कारण मंडियों से जुड़े किस वर्ग को क्या परेशानी
व्यापारी वर्ग : व्यापारी बाबू जैन ने बताया अप्रैल में सामान्य दिनों के दौरान जो उपज खरीदी, कफ्र्यू लगने के बाद उसका ट्रांसपोर्ट नहीं कर पाए। अब उपज को सुरक्षित रखना व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती है। अभी भी हालात यह है कि १० वाहन बुकिंग कराने पर तीन ही मिल रहे हैं। ऐसे में खरीदी गई उपज की क्वालिटी बिगड़ रही है।
किसान वर्ग : किसान पप्पू यादव, जगदीश पाटीदार ने क$फ्र्यू के कारण ए-क्लास मंडी तक उपज लेकर नहीं जा पाए। अन्य शहरों व कस्बों में खुले तौर पर उपज कम दाम पर बिकी। इससे नकद उपज का सही भुगतान नहीं मिला। गर्मी सीजन की बोवनी माथे पर है, ऐसे मेंं हाथ तंग रहेगा।
हम्माल वर्ग : हम्माल गब्बू, लाला व मोनू ने बताया रोजाना मंडी में हम्माली से जो मजदूरी मिलती है उससे परिवार चलाते हैं। इस माह मंडी ही बंद रही तो काम भी नहीं मिला। ऐसे में घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। मंडियों में रोजाना ५०० से ७०० तक का काम हो जाता है। अभी वह नहीं मिल रहा।
वर्जन...
धीरे-धीरे सुधर रही हैं व्यवस्थाएं
-कफ्यऱ्ू के कारण मंडियां लंबे समय तक बंद रही है। अब ढील अवधि के साथ नीलामी भी हो रही है। धीरे-धीरे व्यवस्थाएं पटरी पर लौट रही है। -केडी अग्निहोत्री, मंडी सचिव, खरगोन

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