दंडवत परिक्रमा कर लेटते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे, संस्कृत में दिया ज्ञापन

अनोखा प्रदर्शन...सड़क पर लेटकर आगे बढ़ते कलेक्टोरेट की चौखट पर पहुंचे, जिसने भी देखा अनोखा प्रदर्शन, मोबाइल में किया कैद, दिनभर रहे सुर्खियों में

By: हेमंत जाट

Published: 05 Feb 2021, 11:47 PM IST

खरगोन.
अपनी मांग को शासन-प्रशासन के सामने रखने के लिए आवेदक कई तरह के प्रयोग करते हैं। कोई मुंडन कराता है तो कोई शंख-घंटी बजाता है, लेकिन शुक्रवार को कुछ युवा दंडवत परिक्रमा की तर्ज पर कलेक्टोरेट पहुंचे। टीआईटी कॉम्प्लेक्स से लेकर कलेक्टोरेट की मुख्य चौखट तक करीब 500 मीटर लेटकर अभ्यर्थी दंड भरते हुए गए और यहां संस्कृत में अपनी समस्या अफसरों के सामने रखी। यह वह युवा थे, जो 2018 में हुई नियमित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के सहभागी बने, लेकिन शिक्षक नहीं बन पाए। 2018 में मप्र सरकार बदलने के बाद इनके दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो पाया और नियमित शिक्षक बनने का सपना अधूरा रह गया। संस्कृत में आवेदन देकर युवाओं ने कहा- लंबित प्रक्रिया यथा शीघ्र निराकणम् कृत्वा, सार्वजनिक मन्चै अस्मांक नियुक्त्या: निश्चित दिनांकाय घोषाणा कंरू। अर्थात लंबित प्रक्रिया का शीघ्र निराकरण कर हमें नियुक्ति दीजिए, उस तारीख की घोषणा कीजिए। युवाओं ने यह प्रदर्शन चयनित शिक्षक संघ मप्र के बैनर तले किया। इसमें 50 से अधिक चयनित अभ्यर्थी शामिल हुए। संघ के प्रदेश संयोजक भूतेश चंद्रा ने दंडवत प्रक्रिया पूरी की। 2018 के पूर्व उच्च माध्यमिक व माध्यमिक के लिए नियमित शिक्षकों की भर्ती पूरे प्रदेश में हुई। इसी दौरान प्रदेश में कमलनाथ सरकार बनी। फरवरी 2019 में परीक्षा हुई। परिणाम अगस्त 2019 में आया। नई सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को 2020 में शुरू किया। दस्तावेज सत्यापन मार्च 2020 में होना थे लेकिन कोरोना की वजह से यह प्रक्रिया आगे बढ़ गई। जुलाई 2020 में पचास प्रतिशत दस्तावेजों सत्यापन हुआ और आधा रह गया। तीन जुलाई के बाद से यह प्रक्रिया पूरी तरह रोक दी गई।

चार सौ से अधिक अभ्यर्थी
जिले में परीक्षा करीब 400 अभ्यर्थियों ने दी है। इसमें आधे के दस्तावेज का सत्यापन हो चुका है, आधे शेष है। इस मामले को लेकर कई बार मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री व अफसरों से मिल चुके हैं, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकला। ज्ञापन देते समय उमेश बिर्ले, बाबूलाल मंडलोई, योगेश पाटीदार, हेमलता राणे, विनिता वर्मा, दिप्ती चौधरी, रोशनी वर्मा आदि मौजूद थे।

इसलिए दंडवत परिक्रमा जैसा किया प्रयोग
संघ के प्रदेश संयोजक चंद्रा ने कहा- हम भगवान गिरिराज की परिक्रमा दंडवत करते हैं। इसके पीछे यह मान्यता है कि ऐसा करने से सभी मनोकामना पूरी होगी। इसी सोच के साथ प्रशासन से यह मांग करने आए हैं कि हमारी भी मनोकामना पूरी कर दीजिए। चंद्रा ने इस दौरान टीआईटी का प्लेक्स से कलेक्टोरेट के मुख्य गेट तक 70 बार दंड भरे, हर बार जमीन पर लेटकर माथा टेका और आगे बढ़े। इस प्रक्रिया को देखकर हर कोई अचंभित था।

कोई कर रहा मजदूरी कोई बेच रहा सब्जी
चयनित अभ्यर्थी होने से अब प्रायवेट स्कूल में भी जॉब नहीं मिल रही। ऐसे में कई युवा या तो मजदूरी कर रहे हैं या सब्जी बेच रहे हैं। गोगांवा क्षेत्र के गणेश मालाकार ने बताया परिवार चलाने के लिए मजदूरी करना पड़ रहा है, जबकि बंजारी के बाबूलाल मंडलोई सब्जी बेचकर गुजर-बसर कर रहे हैं।

हेमंत जाट Bureau Incharge
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