२० बैंककर्मियों को २ साल से नहीं मिल रहा वेतन फिर भी रोज दे रहे ड्यूटी

-जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक के २० चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने सुनाई पीड़ा
-कलेक्टोरेट जाकर दिया ज्ञापन

By: राहुल गंगवार

Published: 24 Jul 2018, 01:04 AM IST

खरगोन. भूखे पेट भजन नहीं होय गोपाला, ले तेरी कंठी ले तेरी माला...। भजन के इन पंक्तियों का सीधा सा मतलब यह है कि बिना पारिश्रमिक के क्षणिक कार्य भी नहीं किया जा सकता। लेकिन इस मतलब के ठीक विपरित जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक के २० कर्मचारी ऐसे हैं जो जुलाई २०१६ से बिना वेतन के ही रोजाना दफ्तर आ रहे हैं। दरअसल यह कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी में आते हैं। इनके मुताबिक डिफाल्टरों से ऋण वसूली नहीं हुईतो इनका वेतन २०१६ से ही बंद कर दिया गया। अब तो बातें यह भी होने लगी हैं कि इन कर्मचारियों के पद ड्राइंग केडर के तहत समाप्त कर दिए गए हैं। लेकिन यह कर्मचारी अब भी इस उम्मीद में हैं कि उन्हें उनका हक मिलेगा और उनका अन्य जगह संविलियन कर दिया जाएगा। फिलहाल यह कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कुछ कर्मचारी तो ऐसे हैं जो बड़वानी, धार और सेंधवा के हैं। यहां किराए के मकानों में रहते हैं। समय पर किराया नहीं देने की वजह से कई बार मकान मालिकों ने इनका सामान सड़क पर फेंक दिया है।

छह बेटियों व परिवार को लेकर कहां जाए
बड़वानी निवासी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नंदकिशोर गुप्ता ने बताया उनकी छह बेटियां हैं। नौकरी के दम पर यहां रहते है। किराए का मकान लिया है। हालत यह है कि मकान किराया देना तो दूर परिवार का भरण पोषण भी नहीं कर पा रहे। मजबूरी में मजदूरी कर रहे हैं। ऐसी ही व्यथा सेंधवा के अनूप कामठे, हीरालाल राठौड़, मगरिया के जितेंद्र कुशवाह व विधवा कर्मचारी लक्ष्मीबाई की है। कर्मचारियों ने बताया आर्थिंक तंगी के चलते बच्चों की परवरिश नहीं हो रही। पहले बच्चे अच्छी स्कूलों में जाते थे, अब फीस पूर्ति नहीं होने से कई की स्कूल छूट गईहैं।

दिनभर यहां ड्यूटी रात में पार्ट टाईम जॉब
कर्मचारियों ने बताया आस में दिनभर बैंक में आते हैं लेकिन यहां से कुछ पारिश्रमिक नहीं मिलता। परिवार का भरण पोषण भी करना है। इसलिए रात को पार्ट टाइम जॉब कर रहे हैं। कर्मचारियों में कोई मजदूरी तो कोई पेट्रोल पंप पर ड्यूटी कर आजीविका चला रहा है। कर्मचारियों ने बताया महंगाई के इस दौर में बच्चों की परवरिश और घर का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है।

कर्मचारियों ने बताया जुलाई २०१६ में हमारा वेतन रोक दिया गया। तब हम ३३ लोग थे। इसमें १३ कर्मचारियों का संविलियन अन्य बैंकों में कर दिया गया, लेकिन २० लोगों का समाधान अब तक नहीं हुआ है। दिनभर बैंक में हाथ पर हाथ धरे इस उम्मीद में बैठे रहते हैं कि आज नहीं तो कल, समाधान हो जाएगा। पूरी तरह आना बंद कर देंगे तो उम्र के इस पढ़ाव में कहां जाएंगे।

दो सालों में कई बार किया अनुरोध, समाधान नहीं
कर्मचारियों ने बताया बीते दो सालों में समस्या को लेकर कलेक्टोरेट से लेकर बैंक के गलियारों व सीएम तक गए लेकिन समाधान नहीं हुआ। इसी समस्या को लेकर सोमवार को कर्मचारियों ने फिर एकजुट होकर शाम करीब ४ बजे कलेक्टोरेट पहुंचकर ज्ञापन दिया। अब उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है।

कर्मचारी बोले= स्क्रीनिंग कमेटी में प्रबंधक संचालक ने नहीं की अनुशंसा
कर्मचारियों ने बताया १३ जुलाई को आयुक्त एवं संयुक्त पंजीयक की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें जिला सहकारी केंद्रिय बैंक के प्रबंधक संचालक ने भ़ृत्य के पद पर ड्राइंग केडर के होने से एवं भृत्य के पद रिक्त नहीं होने से संविलियन की अनुशंसा नहीं की। कर्मचारियों ने आयुक्त एवं पंजीयक के नाम लिखे ज्ञापन में संविलियन की मांग की है।

यह पद ड्राइंग केडर के स्क्रीनिंग कमेटी निर्णय लें
-चतुर्थ श्रेणी के २० कर्मचारियों के का पद ड्राइंग केडर में आए हैं। इस स्थिति में हमारे स्तर पर कुछ नहीं हो सकता। स्क्रीनिंग कमेटी निर्णय लें। -एमडी बार्चे, प्रबंध संचालक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, खरगोन

राहुल गंगवार Desk
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