साथी किसानों ने प्रयोग पर उड़ाई हंसी, अब मुनाफा देख दांतों तले दबा रहे हैं उंगली

किसान ने किया नवाचार- बिहार, महाराष्ट्र जाकर सीखी बांस की खेती, 16 एकड़ में लगाए चार हजार पौधे
मेनगांव के किसान विजय पाटीदार ने आने वाली तीन पुश्तों के लिए बांस को बना दिया लाभ का धंधा

 

By: tarunendra chauhan

Published: 28 Oct 2020, 11:53 AM IST

खरगोन. मन में यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो फिर हंसी उड़ाने वाले भी उसकी सफलता के कायल हो जाते हैं। खेती के प्रति ऐसा ही जज्बा और जुनून दिखाया है मेनगांव के युवा किसान विजय पाटीदार ने। विजय ने बांस की खेती का मन बनाया और इसकी बारीकियां सीखने के लिए बिहार, महाराष्ट्र तक दौड़ लगाई। वहां के किसानों से अनुभव लेकर अपने 16 एकड़ खेत में चार हजार बांस लगा दिया। विजय के इस प्रयोग पर साथी किसानों ने उसकी हंसी उड़ाई। लेकिन जब बांस की खेती के फायदे सामने आए तो टांग खींचने वाले वह साथी ही दांतों तले उंगली दबाने लगे।

किसान विजय पाटीदार का हमेशा यह मानना रहा है कि उसके परिवार की भी स्थाई इनकम होती रहे। इसे लक्ष्य बनाकर विजय ने चार हजार पौधे लगाए। दूसरी तरफ बंबू मिशन से जुड़कर प्रति जीवित पौधे पर 30 रुपए प्राप्त किए, जिससे योजना का सहारा पाकर विजय का उत्साहवर्धन हुआ और अपनी गति से बढ़ता गया। आज विजय के 16 एकड़ भूमि पर 4 हजार पौधे जीवित है, जिससे उन्हें अगले वर्ष से शुद्ध मुनाफा होने लगेगा।

अंतरवर्तीय फसल से हुआ भरपूर मुनाफा
इस वर्ष मिर्च की फसल में वायरस अटैक से हर किसान परेशान है। लेकिन विजय अपनी मिर्च की फसल से संतुष्ट है। विजय का कहना है कि बांस की खेती से इस वर्ष उनकी मिर्ची फसल में वायरस का अटैक नहीं हुआ। जबकि आसपास के खेतों में मिर्च खराब हो गई। इससे पूर्व 2019 में बांस के बीच में अंतरवर्तीय फसल लेकर इसी मिर्च की फसल से 46 लाख का मुनाफा लिया है। इसके अलावा वर्ष 2018 में मिर्च से 2 लाख प्रति एकड़ और कपास से ढाई लाख प्रति एकड़ मुनाफा लिया है।

सिर्फ एक पानी से ही पनपता है बांस
विजय बताते हैं बांस को केवल गर्मी के मौसम में सिर्फ एक पानी से ही काम चल जाता है। बिहार व महाराष्ट्र के किसानों के अनुभव के आधार पर विजय ने 20 बाय 7 के अनुपात में बांस लगाकर बीच.बीच में मिर्च, कपास, अरबी, धनिया व अन्य तरह की सब्जियां भी अंतरवर्तीय फसलों के तौर पर ले रहे हैं। विजय अपने फसलों के रख रखाव में धीरे-धीरे जैविक खेती के रूप में भी आगे बढ़ रहे हंै।

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