scriptFor the first time in the history of Khargone | खरगोन के इतिहास में पहली बार 23 दिन का कफ्र्यू, 1989 में भी हुई थी हिंसा तब एक सप्ताह रहा था बंद | Patrika News

खरगोन के इतिहास में पहली बार 23 दिन का कफ्र्यू, 1989 में भी हुई थी हिंसा तब एक सप्ताह रहा था बंद

-दंगे की आग में धधका खरगोन, इसके बाद लगे लंबे कफ्र्यू ने तोड़ दी लोगों की आर्थिक कमर, कर्जदार बने छोटे व्यापारी

खरगोन

Published: May 04, 2022 07:03:08 pm

खरगोन.
दस अप्रैल को रामनवमीं पर निकली शोभायात्रा के दौरान हुए पथराव, आगजनी के बाद शहर में 3 मई तक कफ्र्यू के दायरे में रहा। सांप्रदायिक हिंसा के दौरान लगू कफ्र्यू का यह टाइम पीरियड सबसे ज्यादा रहा है। 1989 से लेकर अब तक चार बार यहां हिंसा हुई। हर बार कफ्र्यू भी लगा लेकिन अबकि बार 23 दिन का लंबा कफ्र्यू लगाया गया। इन 23 दिनों ने हर वर्ग की आर्थिक कमर तोड़कर रख दी। शादियों का सीजन हिंसा की भेंट चढ़ा। व्यापारी गेहंू, चने, सोयाबीन की उपज नहीं बेच पाए। छोटे व्यापारियों का कामकाज पूरी तरह ठप्प हो गया। कई लोग कर्जदार हो गए है।
बीते २४ दिन बाजार नियमित नहीं खुला। ऐसे में उन लोगों की आर्थिक कमर टूटी जो शहर में फेरी लगाकर रोजमर्रा का उपयोगी सामान बेचते हैं। कामकाज बंद होने से किसी पर कर्ज का बोझ बढ़ा तो किसी को आजीविका चलाने में परेशानियां हुई। व्यापारियों ने कहा- इस माह जो बजट बिगड़ा है उसे सुधारने में छह माह लग जाएंगे।
For the first time in the history of Khargone
खरगोन. ग्राहकी के इंतजार में हुसैनी हकीम।
हाथ पर हाथ धरे घरों में बैठे रहे लोग
बाजार में घुमकर कांच बेचने वाले धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कफ्र्यू के बीच मिली ढील में भी दुकान नहीं लगा पाए। इस माह का पूरा बजट बिगड़ गया। पांच हजार रुपए सामान खरीदने के लिए रखे थे, उसी से परिवार के खर्च चलाए। घर में पत्नी व दो बेटियां हैं। किराणा सामान भी उधारी में लिया है। इसी तरह एमजी रोड पर ताला चाबी की अस्थाई दुकान लगाने वाले आदित्य सोनी ने बताया उनके भाई लक्ष्य के इलाज में 8.50 लाख का कर्ज हो गया। दुकान के सहारे ही कर्ज चुका रहे हैं। 23 दिन बाजार बंद रहा। ऐसे में घर-परिवार को चलाने के साथ कर्ज चुकाना भारी पड़ रहा है।
22 दिन कोई काम नहीं
ठेले पर बच्चों के कपड़े बेचने वाले बोहरा बाखल के हुसैनी हकीम बोहरा(६५) बताते हैं कि 22 दिन हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। घर में पत्नी व दो बेटियां है। कपड़े बेचकर जो रकम मिलती है उसी से घर-परिवार चलाते हैं। कफ्र्यू ने कमर तोड़ दी है। ढील भी मिली लेकिन कामकाज सामान्य दिनों जैसा नहीं रहा।

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