राज्यपाल आनंदी बेन ने किया हरियाली से घिरे रास्ते पर बैलगाड़ी का सफर

दो दिनी भ्रमण के दौरान आस्था ग्राम पहुंची राज्यपाल, बच्चों ने इशारों में समझा उनकी मां का नाम और स्लेट पर लिख दिया

By: राहुल गंगवार

Published: 20 Jul 2018, 02:02 AM IST

खरगोन. राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का जिले मेें दो दिनी भ्रमण गुरुवार को पूरा हो गया। दूसरे दिन की शुरुआत राज्यपाल ने जुलवानिया रोड स्थित आस्था ग्राम ट्रस्ट से की। यहां वे सुबह १० बजे पहुंची। सबसे पहले त्रिवेणी का रोपण किया। इसके बाद यहां अपनी वातानुकुलित कार छोड़ निमाड़ की पहचान बैलगाड़ी पर सवार हुई। हरी-भरी पहाड़ी के डेढ़े-मेढ़े रास्तों का उनका यह सफर किसी जंगल सफारी से कम नहीं रहा।

गाड़ी हांकने वाले पहाड़सिंगपुरा निवासी संतोष मारू ने बताया राज्यपाल करीब १० मिनट बैलगाड़ी पर रहीं। उनके साथ आस्था ग्राम ट्रस्ट संचालिका डॉ. मेजर अनुराधा भी थीं। दोनों के बीच पहाड़ी पर फैली हरियाली को लेकर चर्चा हुई। मेजर अनुराधा ने इस बीच राज्यपाल से उनके पैर का दर्द भी पूछा। बीचमें राज्यपाल ने बैलगाड़ी चालक संतोष से भी चर्चा की और गाड़ी हांकने के तरीके को समझा। राज्यपाल की बैलगाड़ी सवारी ट्रस्ट ने पहले से ही तय कर ली थी। लिहाजा गाड़ी को फूल मालाओ, गुब्बारों से सजाया गया। बैलों को भी अच्छी तरह शृंगारित किया गया था। राज्यपाल की सवारी का यह दृश्य जिसने भी देखा व खुश हो गया। इस दौरान कलेक्टर शशिभूषणसिंह, अपर कलेक्टर एमएल कनेल, पीटीएस इंदौर, एसपी अजयसिंह मौजूद थे।

राज्यपाल ने इशारों में बताया मां का नाम, बच्चे ने लिखा मैना देवी
राज्यपाल पटेल आस्था ग्राम में शिक्षा ले रहे बच्चों की सांकेतिक भाषा को जानकर अभिभूत हुई। यहां उन्होंने श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित, मूकबधिर और मानसिक रोगी को दी जाने वाली शिक्षा को जाना। यहां एक सामान्य बच्चें को राज्यपाल ने अपनी माता का नाम बताया। श्रवणबाधित बच्चे ने इशारों से राज्यपाल की माता नाम समझा और स्लेट पर लिखा माताजी का नाम मैना देवी हैं। बच्चों ने समेकित के जादू, तिकड़ी का कमाल, तुम डाल-डाल हम पात-पात कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगों के हुनर को जाना। यहां के बच्चों ने संक्षिप्त नाटिका सबसे बुद्दु कौन के माध्यम से स्वच्छता का सबसे सुंदर संदेश दिया।

राज्यपाल ने कहा- आपसे सीख कर जा रही हंू व्यवहारिक ज्ञान
दिव्यांगों को राज्यपाल ने संबोधित करते हुए कहा ऐसे बच्चों से मिलकर में बहुत खुश हूं जो आत्मनिर्भर होने के लिए आपस में जिस तरह का व्यवहार और आपस में एक-दूसरे को भाषा सिखाते हंै। यह प्राकृतिक व्यवहार को बताता है। बच्चे ही बच्चे को बेहतर तरीके से समझा सकते हंै। मुझे यह पहली संस्था लगी, जहां सभी तरह के दिव्यांग बच्चे सामान्य बच्चों के समान रहते हैं। आप लोगों से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला है। आप सभी से मैं सिखकर जा रही हंू। आप सभी पर ईश्वर का आशीर्वाद बना रहे।

राहुल गंगवार Desk
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