रेलवे ने प्राथमिक सर्वे में नकारा, सांसद ने फिर भेजा रिमाइंडर प्रस्ताव

खंडवा-खरगोन की रेल लाइन के लिए भेजा था प्रस्ताव, पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक को संसदीय क्षेत्र खरगोन-बड़वानी के निकटतम रेलवे मार्ग आलीराजपुर, धार व सेल्दा प्लांट से जोडऩे का भेजा प्रस्ताव

खरगोन. निमाड़ के खरगोन व बड़वानी जिलों को रेलवे से जोडऩे के प्रयास लगातार जारी है। क्षेत्र के सांसद गजेंद्र पटेल ने पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक को खंडवा-धार व्याहा खरगोन की रेलवे लाइन को लेकर एक बार फिर रिमाइंडर प्रस्ताव भेजा है। इसमें फिर से क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का सर्वे कर लाइन शुरू करने की बात कही गई है। इसके अलावा संसदीय क्षेत्र के निकटतम रेलवे मार्ग आलीराजपुर, धार व सेल्दा डाल्ची प्लांट से जोडऩे का प्रस्ताव भी भेजा है। सांसद ने कहा- यह काम हमारी प्राथमिकता है। इसके लए लड़ाई जारी रहेगी।
गौरतलब है कि करीब दो साल पहले खंडवा से धार व्हाया खरगोन रेलवे लाइन को प्राथमिक सर्वे में यह कहकर नकार दिया कि जिला आदिवासी बहुल है और यहां रेलवे अगर निवेश करता है तो उसे घाटा उठाना पड़ेगा। सर्वे रिपोर्ट में खरगोन की आबादी, औद्योगिक क्षमता और भौगोलिक स्थिति 25 साल पुराने आंकड़ों को आधार बनाकर निमाड़ में आय के स्रोत तलाशे गए। 25 साल पहले निमाड़ का यह हिस्सा पिछड़ा हुआ था, लेकिन वर्तमान में हालात काफी बेहतर हैं। ऐसे में अगर रेलवे पुन: सर्वे करे तो यह क्षेत्र भी आय देने वाला क्षेत्र साबित हो सकता है। इससे जहां निमाड़ का बड़ा भाग रेल सुविधा से जुड़ जाएगा वहीं बड़े पैमाने पर कपास, गेहूं, मिर्च और अन्य उपज देशभर में समय पर आसानी से पहुंचाई जा सकेंगी। वहीं स्थानीय लोगों को देश का अन्य हिस्सों से जुड़ाव होगा इससे न सिर्फ निमाड़ तरक्की करेगा बल्कि रेलवे के आय के साधन भी बढ़ेंगे।

और कितने आंदोलन चाहिए रेल के लिए
आजादी के बाद से निमाड़ में रेलवे लाइन डालने के लिए जनता ने नेताओं पर दबाव बनाए रखा। इसके लिए अब तक निमाड़ में कई बड़े आंदोलन किए गए। छोटा उदयपुर से धार रेलवे लाइन की बात चली थी, लेकिन वह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई। इस रेलवे लाइन से खरगोन सीधे रेल लाइन से जुड़ रहा था। इसके अलावा इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन की फाइल भी बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रही है।

खरगोन में रेललाइन डली तो फायदेमंद होगा
पश्चिम निमाड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल के अनुसार परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। आज जिले के सड़कों के रास्ते से माल परिवहन होता है। या इसके लिए उपज खंडवा भेजी जाती है। अगर खरगोन में रेल लाइन डली तो व्यापारियों के लिए फायदेमंद होने के साथ ही यहां उत्पादन और निर्यात में भी बढ़ोतरी आएगी। अभी व्यापारियों को खंडवा से मुंबई माल भेजने के लिए जहां ट्रक से 25 हजार रुपए खर्च करना पड़ता है वहीं रेलवे में इतने ही माल का उसे सिर्फ 12 हजार रुपए खर्च करना पड़ेगा।

तब इन बिंदुओं पर फेल हुआ था सर्वे
आर्थिक रूप से पिछड़ापन
औद्योगिक रूप से पिछड़ापन
जिले की एक तिहाई आबादी आदिवासी
रेल मार्ग वाले क्षेत्र में कोई बड़ा काम नहीं हो रहा
पैसेंजर और गुडस में कोई स्टेटस नहीं दिया गया

ऐसे तैयार हुई थी रिपोर्ट और यह हकीकत
रिपोर्ट: सर्वे के लिए रेलवे ने 1991 की जनगणना को आधार बनाया। इसमें जिले की जनसंख्या 11 लाख 94 हजार 723 और शहर की जनसंख्या 66 हजार ***** बताई गई।
हकीकत: 2011 में जिले की जनसंख्या 18 लाख 73 हजार 046 है और शहर की जनसंख्या 1 लाख 16 हजार 150 दर्ज की गई थी। अब आबादी दोगुना हो चुकी है।
रिपोर्ट: रिपोर्ट में बताया गया कि 260 किमी की रेलवे लाइन में 50 किमी का क्षेत्र पहाड़ों से होकर गुजरता है। यहां रेलवे को सुरंग जैसे कामों पर काफी खर्च वहन करना पड़ेगा।
हकीकत: जिस क्षेत्र से रेल लाइन लाई जाना है वहां ऐसे कोई बड़ा पहाड़ नहीं है जिससे रेल लाइन निकालने में दिक्कत आए। यह मुद्दा सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया।
रिपोर्ट: रेल लाइन के रास्ते में खरगोन में कुंदा नदी, जुलवानिया के पास डेब नदी और बड़वानी में नर्मदा नदी पर बड़े पुल सहित कई पुलियाएं बनाने की जरूरत पड़ेगी।
हकीकत: देश में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां नदियां या पहाड़ नहीं हैं फिर भी रेल लाइन डालने के लिए ब्रिज का इस्तेमाल किया गया है। रेल लाइन के लिए यह एक सामान्य प्रक्रिया है।

पश्चिम रेलवे को भेजा है रिमाइंडर प्रस्ताव
खरगोन-बड़वानी जिले रेलवे लाइन से जुड़े इसके लिए पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक को रिमाइंडर प्रस्ताव बनाकर भेजा है। इसमें वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर फिर से सर्वे कराने की बात कही गई है।
-गजेंद्र पटेल, सांसद, खरगोन-बड़वानी संसदीय क्षेत्र

Jay Sharma
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