बाजार से करोड़ों के बीज की बिक्री, नहीं होती गुणवत्ता की जांच, ठगे जा रहे किसान

कृषि विभाग की कार्रवाई सेंपल तक समिति, अमानक बीज की बिक्री पर नहीं रोक, कपास, सोयाबीन, मिर्च और मक्का बीज की खरीदी पर ढिली हो रही किसानों की जेब

By: हेमंत जाट

Published: 01 Jul 2019, 02:34 PM IST

खरगोन.
बारिश आने के बाद बुआई के लिए बाजार में बीज की दुकानों पर किसानों की भीड़ लग रही है। इसमें सबसे ज्यादा कपास, मिर्च, सोयाबीन और मक्का बीज खरीदा जा रहा है। विडंबना यह है कि जिस बीज को किसान खरीद रहे हैं, वह मानक है या नहीं इसकी जांच के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है। बगैर गुणवत्ता जांचे ही करोड़ों रुपए का बीज निजी कंपनियां बाजार में खपा रही है। यह सिलसिला कई सालों से चल रहा है। इससे किसान ठगे जा रहे हैं। आमूमन कृषि विभाग के अधिकारी सीजन की शुरुआत में खाद, बीज और कीटनाशक के सेंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजते हैं, लेकिन यह कार्रवाई महज खानापूर्ति तक समिति रह जाती है। कई बार जांच रिपोर्ट आने में डेढ़ से दो महीने लग जाते हैं और ऐसी स्थिति में बीज खराब होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। पिछले दिनों ही खरगोन में एसडीएम सहित कृषि अधिकारियों ने खाद-बीज विक्रय की दुकानों पर पहुंचकर विक्रेताओं को अमानक बीज नहीं बेचने की ताकीद दी थी।

दो हजार से खाद-बीज की दुकानें
जिले में लाइसेंसी खाद, बीज और औषधी सरंक्षण की दो हजार से अधिक दुकानें संचालित हो रही है। इस वर्ष लगभग नौ लाख कपास के पैकेट सहित मिर्च, सोयाबीन बीज की बिक्री निजी दुकानों से की जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक एक दुकान का सालभर का कारोबार यदि ५ लाख भी है, तो बीज खरीदी का आंकड़ा एक अरब तक पहुंचता है। इस स्थिति में बीज गुणवत्ता की कसौटी पर सही है या नहीं। इसकी कोई गारंटी लेने वाला नहीं।

319 में से 15 नमूने अमानक निकले
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में विभाग द्वारा बीज के 319 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। इनमें से 15 नमूने अमानक पाए गए। इसी तरह खाद के 384 नमूनों में 43 अमानक पाए गए। जबकि कीटनाशक के 92 नमूने लिए गए थे और उसमें 10 नमूने अमानक पाए गए। इन सभी में लाइसेंस निरस्त किए गए, लेकिन ऐसी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे प्राइवेट कंपनी अथवा व्यापारियों को सबक लग सके। इस वर्ष भी विभाग ने बीज के 217, खाद के 87 और कीटनाशक के दो नमूने लेकर ग्वालियर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे हैं।

अमानक बीज को लेकर शिकायतें
कपास:- समय से पहले पौधे सूखने, फूल-पुड़ी अथवा घेटे नहीं लगे आदि।
मिर्च:- पौधों पर वायरस की समस्या। हर साल सैकड़ों एकड़ की फसलें इसी समस्या के चलते खराब हो रही है।
सोयाबीन:-सोयाबीन में अफलन की समस्या प्रमुख कारण अमानक बीज है। पौधों में फूल व फलियां नहीं आने से उत्पादन प्रभावित होता है।

जिला मुख्यालय पर हो जांच
जिले में अमानक बीज की बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही है। इसके लिए मुख्यालय पर लेब होना चाहिए। किंतु इस ओर शासन-प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। भाकिसं ने कई बार इस मुद्दे को उठाया है।
सीताराम पाटीदार, पूर्व अध्यक्ष भाकिसं

दो एफआईआर हुई है
विभाग द्वारा हर साल खाद, बीज और कीटनाशक के नमूने लिए जाते हैं। पिछले साल दो कंपनियों के खिलाफ एफआईआर हुई है। पांच व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त किए है। इस वर्ष भी बीज के 180 नमूने लिए हैं। जिसमें से 51 मानक पाए गए हैं।
एमएल चौहान, उप संचालक कृषि विभाग

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हेमंत जाट Bureau Incharge
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