संयुक्त परिवार में रहने की दी सीख, कर्ज से बचने की दी सलाह, स्वास्थ्य बेहतर हो इसका संदेश देते चले युवा

52वें धर्मगुरू डॉ. सयैदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के 109 वें व वर्तमान में 53वें धर्मगुरू डॉ. आलीकदर सयैदना मुफद्दल सैफुद्दीन के 76 वें जन्मदिन पर बोहरा समाज से निकाला जुलूस

By: rohit bhawsar

Published: 03 Dec 2019, 04:14 PM IST

खरगोन. सफेद पोषाक। अनुशासन का पाठ पढ़ाते कतारबद्ध समाजजन और सद्भावना का संदेश लेकर सड़क पर निकला स्काउट दल। शनिवार को कुछ इसी अंदाज में बोहरा समाज ने शहर के मुख्य चौराहों, सड़कों से जुलूस निकाला। यह जुलूस 52 वें धर्मगुरू डॉ. सयैदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के 109 वें व वर्तमान में 53 वें धर्मगुरू डॉ. आलीकदर सयैदना मुफद्दल सैफुद्दीन के 76 वें जन्मदिन पर दोपहर 2.30 बजे से निकला। इसमें अलग-अलग झांकियों के जरिए समाज ने संयुक्त परिवार में रहने की सीख व कर्ज से बचने की सलाह दी। स्वास्थ्य बेहतर रहे शरीर तंदुरुस्त रहे इसके लिए जुलूस में कुछ युवा साइकिल लेकर आए। खेल गतिविधियों से बचपन को कैसे संवारे इसका संदेश देने के लिए बच्चे हाथों में फुटबॉल, बैट आदि लेकर जुलूस में शामिल हुए। यह जुलूस बोहरा बाखल से शुरू होकर हैदर मस्तान चौक, बावड़ी बस स्टैंड, राधा वल्लभ मार्केट, पोस्ट ऑफिस चौराहा, बस स्टैंड होते हुए श्रीकृष्ण टॉकिज से जवाहर नगर, डायवर्शन रोड और बोहरा बाखल पहुंचकर समाप्त हुआ।
समाज सचिव सैफुद्दीन धूपावाला ने बताया जुलूस का नेतृत्व मुख्य आमिल मोहसिन हसनी व उप आमिल ताहेर हसनी ने किया। मुंबई के हुजैफा हुसामी मुख्य अतिथि रहे। जुलूस में बुरहानी गाड्र्स् इंटरनेशनल व सैफिया हायर सेकंडरी स्कूल का स्काउट दल आकर्षक प्रस्तुति देते हुए चल रहा था। जुलूस में 4 पायलट, 20 घुड़सवार, 4 बग्गी और 6 विभिन्न विषयों पर बनाई गई झॉकियों ने सबका मन मोहा। मर्षिया पार्टी ने मौला की शान में मदेह पढ़ा।
जुलूस ने कुछ इस ढंग से दिया जागरूकता का संदेश
पर्यावरण संरक्षण : ना कर तू मेरा-तुम्हारा, पर्यावरण है हमारा। इस स्लोगन के साथ एक ट्रॉली को सजाया। इसमें कई तरह के पौधे रखे। लॉन बिछाई गई। लोगों से आग्रह किया कि पर्यावरण को सहेजे, यह जीवन है।
सेहत : जुलूस में लाल रंग की टीर्शट पहले बच्चे हाथों में खेल उपकरण लेकर चले। साइकिलिंग करते युवाओं ने यह संदेश दिया कि इन गतिविधियों को जीवन में उतारकर स्वस्थ्य रहा जा सकता है।
एकजुटता : बच्चे-बुढ़े और जवान, खाए खाना एक समान। है ये मौला का अरमान हो सबके पास रोटी, कपड़ा और मकान। एक झांकी को इन स्लोगन से तैयार किया गया। हम सब एक है, समान है यह सीख दी।
संस्कार : पिता से ही सुख संपदा, मां से ही संस्कार, जिस घर में न ये रहे वो घर है बेकार। संस्कारों का पाठ पढ़ाने और बड़ों का सम्मान करने वाली यह सीख भी जुलूस में शामिल एक झांकी के जरिए दी गई।
शिक्षा और रोजगार : तरह तरह के बने वैज्ञानिक मॉडल से सजी एक झांकी में बच्चे कई तरह के प्रयोग करते नजर आए। झांकी से जीवन में शिक्षा का महत्व क्या है यह समझाया गया।
लालच न करें : एक ट्रॉली पर लिखा था करजन हसनाह (बिना ब्याज केे लोन) देने वाले कार्य को दान देने से अधिक बढ़ा बताया है। इसके जरिए समाज ने ब्याज के चक्कर में गरीबों को परेशान न करने की हिदायत दी गई। लालच से दूर रहने की सीख दी।
पर्यावरण संरक्षण : जुलूस में बैलगाडिय़ों को भी शामिल किया गया। इन्हें आकर्षक ढंग से सजाया। वाहनों के धूएं बढ़ते पर्यावरण को कैसे रोका जा सकता है इसका संदेश दिया गया।

rohit bhawsar
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