महेश्वर तहसील का बाबू पांच हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथ धराया

लोकायुक्त इंदौर टीम ने रिश्वत के साथ धरदबोचा, निलंबित पटवारी से जांच प्रतिवेदन बनाकर देने के एवज में मांगे थे दस हजार

खरगोन.
महेश्वर तहसील कार्यालय में शुक्रवार को कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी उस वक्त सकते में आ गए, जब यहां लोकायुक्त टीम ने दबिश दी। टीम ने परिसर में बाबू (नाजिर) बलीराम सोलंकी को पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ धरदबोच लिया। सोलंकी के खिलाफ निलंबित पटवारी दिनेश पाटीदार ने 12 फरवरी को लोकायुक्त में शिकायत की थीं। जिसके आधार पर उक्त कार्रवाई की गई। लोकायुक्त डीएसपी प्रवीण बघेल ने बताया कि पटवारी दिनेश को महेश्वर एसडीएम ने आपदा पीडि़तों के सर्वे में लापरवाही बतरने पर निलंबित किया था। जिसकी जांच का जिम्मा तहसीलदार को सौंपा था । तहसीलदार के नाम से बाबू द्वारा रिश्वत मांगी गई। बलीराम और दिनेश के बीच दस हजार में सौदा तय हुआ। इसमें से बाबू पांच हजार रुपए पहले वसूल चुका था। वहीं शुक्रवार को जैसे ही पटवारी दिनेश उसके पास शेष 5 हजार रुपए लेकर पहुंचा, वैसे ही लोकायुक्त टीम ने ट्रेप करते हुए बाबू को पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद बाबू के चेहरे की हवाईयां उड़ गई। डीएसपी बघेल ने बताया कि आरोपी बाबू के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। वही इस प्रकरण में तहसीलदार की क्या भूमिका रही, उसकी जांच भी की जा रही है।

अपने हिसाब से जांच प्रतिवेदना बनाने का दबाव
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार 8 जून 2019 को आंधी-तुफान के चलते महेश्वर तहसील के कई गांवों में जान-माल का नुकसान हुआ था। इसमें आपदा पीडि़तों के सर्वे सहित मुआवजा राशि का वितरण होना था। हल्का नंबर 48/60 के तत्कालीन पटवारी दिनेश पाटीदार ने अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन नहीं किया। लापरवाही बरतने के कारण मंडलेश्वर एसडीएम ने पाटीदार को निलंबित कर दिया। 27 अगस्त 2019 को जांच तहसीलदार को सौंपी गई। यहां एक-दूसरे की बात को ढकने के लिए आपस में तहसील के बाबू और पटवारी ने सरकारी सिस्टम का ही सौदा कर डाला। बाबू ने पटवारी के सामने रिश्वत का प्रस्ताव रखा कि यदि वह उसकी डिमांड पूरी करता है, तो जांच प्रतिवेदन उसके पक्ष में तैयार कर देगा।

कार्रवाई के चलते लगी भीड़
तहसील कार्यालय में हुई लोकायुक्त की कार्रवाई की खबर लगते ही लोगों की भीड़ भी जमा हो गई। लोकायुक्त डीएसपी बघेल के मुताबिक बाबू से ब्रांड लेटर भरवाया गया।

दो महीने में चौथी कार्रवाई
सरकारी विभागों में रिश्वत लेने और देने के मामले 2020 में लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले दो महीने में लोकायुक्त की यह जिले में चौथी कार्रवाई की है। इसके पूर्व महेश्वर में ही 17 दिसंबर 2019 को काकड़दा चौकी प्रभारी कैलाश डांगी को दस हजार की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त टीम ने पकड़ा था। वहीं 13 जनवरी को सेगांव ब्लॉक पीएम आवास योजना की राशि स्वीकृति कराने की आड़ में पूर्व विधायक विजयसिंह सोलंकी के भाई भूपेंद्रसिंह सोलंकी को पांच हजार रुपए रिश्वत लेते पकड़ा गया था। इसी तरह चौथी कार्रवाई 8 जनवरी को भगवानपुरा में हुई थी। यहां लोकायुक्त ने मनरेगा के एपीओ आशोक पाटीदार को तीन हजार लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था।

हेमंत जाट Bureau Incharge
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