उच्च न्यायालय ने डूब प्रभावितों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को दिया नोटिस

महेश्वर परियोजना प्रभावितों की ओर से याचिका इंदौर हाईकोर्ट में दायर

By: हेमंत जाट

Published: 18 Aug 2017, 01:48 PM IST

खरगोन. महेश्वर बांध परियोजना के डूब प्रभावितों द्वारा नए भू-अर्जन कानून के तहत बढ़ा हुआ मुआवजा देने संबंधित याचिका  इंदौर हाईकोर्ट में दायर की गई है। इस पर गुरुवार को उच्च न्यायालय में विशेष सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। हाल ही में बांध की जद में आ रहे आधा दर्जन गांवों में सरकार की ओर से डूब प्रभावितों को मुआवजे के नोटिस भेजे गए थे। इसमें मुआवजा कम होने से प्रभावितों की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। गुरुवार को इंदौर खंडपीठ में न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा महेश्वर बांध की डूब में आ रहे ग्राम भटयान के विस्थापितों की याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को आदेश दिया कि वह अपना जवाब प्रस्तुत करें। इसके पश्चात मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर को सुनवाई होगी। नबआं से जुड़ी चित्तरूपा पालित ने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावितों को मुआवजे के अधिकार से वंचित रखना चाहती है। इसलिए लोगों को जानबूझकर कम मुआवजा दिया जा रहा है।


ये है मामला

पिछले दिनों महेश्वर परियोजना से डूब में आने वाले गावों भटयान, अमलाथा, सुलगांव, पथराड, नगवां, मर्दाना, ससाबढ़ आदि में मुआवजे के नोटिस भेजे गए थे। इन नोटिस को देखकर ग्रामीण आश्चर्य में पड़ गए। ग्रामीणों के अनुसार 2013 में नए भू-अर्जन कानून बनने के बावजूद सभी को पुराने कानून के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 1 जनवरी 201३ से नया भू-अर्जन कानून लागू हो गया है। प्रभावितों का कहना है कि सरकार द्वारा उन्हें जानबुझकर कम मुआवजा दिया जा रहा है।


सरकार को नोटिस जारी

सरकार के इस गैर कानूनी कदम के खिलाफ विस्थापितों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की है कि उनका मुआवजा नए भू-अर्जन कानून के अनुसार दिया जाए। इस संदर्भ में न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव के समक्ष ग्राम भटयान के विस्थापितों की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर ने पैरवी करते हुए कहा कि सरकार द्वारा पुराने भू-अर्जन कानून का उपयोग कर विस्थापितों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, जो कि सर्वोच्च न्यायालय के तमाम आदेशों का भी खुला उल्लंघन है। 

हेमंत जाट Bureau Incharge
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