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अबकि बार 1.70 लाख मेट्रिक टन गेहंू खरीदी का था लक्ष्य, महज 907 क्विंटल ही खरीदा, पिछड़े

फिसड्डी रहा समर्थन : खरीदी के लिए जिले में बनाए थे 73 केंद्र, 44 दिन में तीन केंद्र पर 15 किसान ही पहुंचे

खरगोन

Published: May 12, 2022 09:22:10 am

खरगोन.
अबकि बार गेहंू और चने को सरकारी समर्थन नहीं मिल पाया है। किसानों को मंडियों में उपज के दाम समर्थन मूल्य से ज्यादा मिले तो किसानों ने उपज बाहर बेच दी। यहीं कारण रहा कि अबकि बार समर्थन मूल्य पर गेहंू की खरीदी पिछड़ गई है। विभाग ने जिले में इस बार १.७० लाख मेट्रिक टन गेहंू खरीदी का लक्ष्य रखा। 28 मार्च से 10 मई तक खरीदी की। इन चालीस दिनों में महज 15 किसान तीन केंद्रों पर पहुंचे और 907 क्विंटल उपज ही बेची। जिले में खरीदी के लिए ७३ केंद्र बनाए गए थे।
समर्थन मूल्य पर गेहंू खरीदी के मामले में जिला फिसड्डी साबित हुआ। किसानों का समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का यह मोहभंग खुले बाजार व मंडियों में गेहंू केदाम समर्थन मूल्य से अधिक मिलना है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गेहंू के लिए 23884 किसानों ने पंजीयन कराया था। लेकिन उपज लेकर महज 15 किसान ही केंद्रों पर पहुंचे। यह खरीदी थी बडूद, सनावद और बड़वाह केंद्र पर हो पाई। शेष 70 केंद्र पर खरीदी का श्रीगणेश तक नहीं हो पाया।
Poor support
खरगोन. अबकि बार मंडियों में किसानों को गेहंू के दाम समर्थन मूल्य से कई ज्यादा मिले हैं।
इस बार समर्थन मूल्य की खरीदी पर पिछडऩे के चार कारण
1. मंडी में दाम अच्छे : गेहंू का समर्थन मूल्य २०१५ रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया। जबकि मंडियों में किसानों को उपज के दाम २५०० रुपए क्विंटल तक मिले।
2. किसानों की सुझबूझ : समर्थन मूल्य के भाव खुलने के बाद किसानों ने खुले बाजार के भाव देखे। इस फेर में किसानों ने उपज रोकी और दाम बढ़े तो मंडियों में लेकर पहुंचे।
3. पंजीयन प्रक्रिया : इस बार गेहंू खरीदी के लिए आधार से पंजीयन किया। इससे पंजीयन पिछड़ा। इसके अलावा जिले में गेहंू का रकबा भी बीते साल की तुलना घटा है।
4. किसानों की उलझन : अबकि बार स्लॉअ बुकिंग होने से किसान इस व्यवस्था को समझ ही नहीं पाए। जटिलताओं में उलझने के बजाय उन्हें मंडियों में उपज बेचना आसान लगा।
हर स्तर पर पिछड़ते ही गए
अबकि बार समर्थन मूल्य पर किसानों का मोहभंग पंजीयन प्रक्रिया के दौरान ही नजर आने लगा था। बीते सात जिले में कुल ७२६७६ किसानों ने गेहंू और चना दोनों के लिए पंजीयन कराया था। इस बार संख्या घटकर 40426 ही रह गई। बीते साल गेहंू के लिए 48793 व चने के लिए 23883 किसानों ने पंजीयन किया जबकि इस बार गेहंू के लिए 23884 और चने के लिए 16542 किसान ही पंजीयन करा पाए। अभी समर्थन मूल्य पर चना की खरीदी 30 मई तक होना है।

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