ऐसा स्कूल जहां बच्चों के साथ नाचते हैं शिक्षक, निमाड़ी में पढ़ाते हैं हिंदी

बच्चों को समझ में आए पाठ्यक्रम इसके लिए निमाड़ी बोली में तैयार किए सब्जेक्ट, गीत बनाकर बच्चों में शिक्षा का अलख जगा रहे शिक्षक
-हिंदी पाठ््यक्रम को निमाड़ी बोली में ढाला, बच्चों के साथ नाचते-गाते चलाते हैं पाठशाला
-ग्राम बरसलाय की प्रायमेरी स्कूल के प्रधानपाठक धर्मेंद्र गुप्ता को अनोखा नवाचार

By: Gopal Joshi

Published: 05 Sep 2019, 11:06 AM IST

खरगोन.
हर पैरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चों को शिक्षा की तालिम अच्छी मिले। इसके लिए वह भारी खर्च कर बच्चों को बड़े-बड़े प्रायवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं। लेकिन जिले के कुछ सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां चरित्र निर्माण और शिक्षा के प्रति बच्चों में ललक पैदा करने के लिए सरकारी शिक्षकों ने बीड़ा उठाया है। खुद के दम पर ऐसे ऐसे नवाचार किए हैं जो लाजवाब है। जिला मुख्यालय से करीब १६ किमी दूर ग्राम बरसलाय की प्रायमेरी शाला इसका बड़ा उदाहरण है। यहां प्रधानपाठक ने हिंदी पाठï्यक्रम का निमाड़ी वर्जन तैयार किया है। उसे तुकबंदी में गाकर वह बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। खुद गाकर बच्चों के साथ नाचते-गाते भी हैं। मस्ती की यह पाठशाला अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है।
प्रधानपाठक गुप्ता ने बताया जब तक पढ़ाई का स्तर रचनात्मक नहीं होगा बच्चों में इसके प्रति ललक जागृत नहीं होगी। बच्चों को विषय सहज रूप से समझ में आए इसके लिए पाïठ्यक्रम को हिंदी से निमाड़ी में तब्दील किया है। कुछ प्रेरक गीत भी बनाए हैं जो बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को बढ़ावा देने वाले हैं।

हर जबान पर है... हाऊं तो म्हारी स्कूल चली...
हाऊं तो म्हारी स्कूल चली, संभाळ थारा घर क, मत कल्पाव म्हारा मन क, पछेड़ी रई जाऊंगा हाऊं स्कूल म... जैसे गीत प्राइमेरी स्कूल में सुबह से ही सुनाई देते हैं। गुप्ता बताते हैं कि बेटी पढ़ाओ-बेटी बढ़ाओं को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के गीत से बच्चे भी जागरूक होते हैं। घर के कामकाज के दौरान कई बार पालक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। लेकिन बच्चे इन गीतों के जरिए यह समझ गए हैं कि स्कूल नहीं गए तो भविष्य में नुकसान होगा। वह अपने माता-पिता को कहते हैं कि वह स्कूल नहीं पहुंचे तो पढ़ाई में पिछड़ जाएंगे।

पर्व-त्योहारों का बताते हैं महत्व
फिलहाल क्षेत्र में गणेश उत्सव की धूम है। बच्चों को इस उत्सव का महत्व समझाने के लिए स्कूल में ही प्रधानपाठक ने गणेश स्थापना कराई है। स्कूल शुरू होने से पहले रोजाना सामूहिक आरती होती है। गणेशजी से जुड़ा हुआ एक प्रेरक प्रसंग रोजाना बच्चों को पढ़ाया जाता है। गुप्ता ने बताया इस तरह के प्रयोग से बच्चों में नैतिक ज्ञान भी बढ़ता है।
फोटो केजी ०५०९ खरगोन. बच्चों के साथ निमाड़ी गीत गाकर स्कूल लगाते प्रधानपाठक धर्मेंद्र गुप्ता।

यहां शिक्षकों ने जनसयोग से जुटाए २ लाख, तैयार किया गार्डन, शुरू की वर्चुअल क्लास
ग्राम बकावा का प्राथमिक स्कूल। यहां दर्ज बच्चों की संख्या १९१ है। प्रभारी प्रधानपाठक कन्हैयालाल कुशवाह ने बताया स्टॉफ व जनसहयोग से २ लाख रुपए जुटाए। बच्चों की सुविधा के लिए फर्नीचर लगाया। प्रत्येक कमरे में पंखे लगाए। 52 इंच का स्मार्ट टीवी खरीदा। इस पर पर मोबाइल इंटरनेट के जरिए वर्चुअल क्लास लगाते हैं। इसके अलावा एक बगीचा भी तैयार किया है, इसमें दस हजार के पौधे लगाए हैं। स्कूल के शिक्षक कमलचंद चौधरी, अनिता करोले, श्रीराम नायक ने बताया स्कूल स्टॉफ के अलावा ग्रामीणों का भी इस काम में पूरा-पूरा सहयोग है। सुविधाएं जुटाने के बाद स्कूल का माहौल ही बदल गया है। बच्चे व पालक भी शिक्षा के प्रति जागरूक हुए हैं। उपस्थिति शत प्रतिशत रहती है।

Gopal Joshi
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