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जलसंकट : गर्मी में तीन किमी पैदल और पगडंडी के रास्ते पहाड़ी चढ़कर ला रहे पानी

अप्रैल शुरु होते ही गहराया जलसंकट...ग्रामीण इलाकों में पानी के लिए ग्रामीणों को उठानी पड़ रहीं परेशानियां..

खरगोन

Published: April 06, 2022 10:24:38 pm

महेश मालवीय
खरगोन/भगवानपुरा. गर्मी में सूखे कंठ और पानी की तलाश में मिलों दूर तक भटकते ग्रामीणों की ये आपबीती आदिवासी अंचल भगवानपुरा तहसील की है। जहां अप्रैल के शुरुआती दिनों में भी भीषण जलसंकट से ग्रामीणों को जूझना पड़ रहा है। खरगोन और बड़वानी जिले के अंतिम छोर पर बसे माल फाल्या में 267 परिवारों को प्यास बुझाने के लिए झिरे के पानी का सहारा लेना पड़ रहा है। तपती दोपहर में रोजना ग्रामीण महिला व पुरुष बर्तन लेकर तीन किमी पहाड़ी रास्तों से पैदल-पैदल चलकर झिरे से पानी भरकर लाते हैं ओर इससे से सूखे कंठों को तर करते हैं। उल्लेखनीय है कि एक तरफ सरकार गांव-गांव और फाल्यों में जल जीवन मिशन योजना के तहत करोडों रुपए खर्च कर पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं उसके उलट जमीन हकीकत अलग है।

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भगवानपुरा विकासखंड के अंतर्गत भुलवानिया ग्राम पंचायत से लगे ग्राम माल फाल्या में हर साल लोगों को गर्मी में पेयजल समस्या से जूझना पड़ता है। गांव सेंधवा तहसील बड़वानी में आता है। वर्तमान में भीषण जलसंकट के कारण 267 परिवार इससे काफी प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीण गिरधान सोलंकी ,पठान सोलंकी, सयाराम गंगाराम एवं जागृत आदिवासी दलित संगठन के शिवराम ने बताया कि गर्मी के दिनों में यहां पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसलिए नाले में झिरा बनाकर पानी ला रहे हैं साथ ही झिरे का मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं।

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सुबह 5 बजे से शुरू होती है कसरत
समदरबाईं और रुनियाबाई ने बताया कि पानी लाने के लिए सुबह 5 उठकर झिरे पर जाना पड़ता है। दो झिरे बनाए हैं जिसमें से पानी भरकर ले जाते हैं। महिलाओं ने बताया कि जिसके पास बैलगाड़ी है वह उससे पानी लाता है वही अधिकतर महिलाएं, युवतियां व बच्चे पानी के बर्तन सिर पर रखकर तीन किमी दूर घाट चढ़कर पानी लाते हैं ।

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बताई थी परेशानी,नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल 1 सितंबर 2021 को सेंधवा के क्षेत्रीय विधायक ग्यारसीलाल रावत गांव आए थे, तब उन्हें जलसंकट की समस्या से अवगत कराया था। तब विधायक रावत ने ग्रामीणों को आश्वासन भी दिया था। लेकिन आज तक निराकरण नहीं हो पाया है। इसके बाद विधायक देखने भी नहीं आए।

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