निर्मल मन के व्यक्ति के पास होते है परमात्मा

आर्यिका विज्ञाश्री ने दिए धर्मोपदेश

By: kali charan

Published: 23 Jul 2019, 09:20 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मदनगंज-किशनगढ़. आर्यिका विज्ञाश्री ने जैन भवन में मंगलवार को मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जिस व्यक्ति में जितनी अधिक निर्मलता होगी, परमात्मा भी उसी दिशा में कदम बढ़ाते है। व्यक्ति में जितनी मालीनता का कचरा बढ़ता जा रहा है, उसी प्रकार परमात्मा भी दूर होते जा रहे है। क्योंकि परमात्मा की दुश्मनी मालीनता से ही है। आर्यिका ने कहा कि हृदय की पवित्रता तभी हो सकती है जब व्यक्ति सभी लोगों के प्रति हार्दिक प्रेम भावनाएं करते हुए हर प्राणी से प्रेम रखें। दूसरे व्यक्ति के छोटे से छोटे दर्द को संत ज्ञानेश्वर की तरह अपना दर्द समझे। जब मर्यादा पुरुषोत्तम राम और भगवान महावीर के आचरण को अपने जीवन में उतारेंगें तो स्वत: ही ह्रदय पवित्र होगा। परमात्मा शरीर को शुद्ध करने, अच्छे कपड़े पहनने और अच्छा खाने वालों से खुश नहीं होता वह तो अच्छी सोच और अच्छा व्यवहार करने वालों से खुश होता है। इसलिए व्यक्ति को अपना चिंतन उच्च कोटि का बनाते हुए शब्द व्यवहार बनाना चाहिए। स्वर्ग, बैकुंठ, जन्नत, मोक्ष उन्हीं सज्जन पुरुषों के लिए है जो परमात्मा के भक्त होते है। उन्होंने कहा कि मोक्ष और स्वर्ग बड़े ही स्वच्छ स्थान हैं। जहां मित्रता, एकता, नैतिकता हमेशा रहती है। प्रथम नंबर की शुद्धि हृदय की पवित्रता है। यदि हृदय पवित्र होगा तो हृदय से प्रकट होने वाली जितनी भी क्रियाएं हैं वह सब भी पवित्र होगी। मनुष्य जीवन में तपस्या करनी चाहिए। तपस्या में मनुष्य जितना तपेगा उतना शुद्ध, पवित्र होकर परमात्मा के नजदीक जाएगा और अंतत: परमात्मा से मिलकर वह परमात्मा ही बन जाएगा। मंगल प्रवचन से पूर्व सुबह आर्यिका विज्ञाश्री ससंघ के सानिध्य में जैन भवन स्थित जिनालय परिसर में सहस्त्रनाम विधान पूजन किया गया। इसमें श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद अघ्र्य चढ़ाए गए। दोपहर में सामयिक एवं स्वाध्याय और शाम को आनंद यात्रा आरती की गई।

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