बने आत्मनिर्भर भारत : सौर ऊर्जा उपकरणों की इंडस्ट्रीज को मिले प्रोत्साहन

शहर-शहर और गांव-गांव हो देसी उजियारा

सौलर उपकरण बनाना सीख रही विदेशी महिलाओं के साथ हमारी महिलाएं

तिलोनिया के वेयरफुट कॉलेज में ले रही हैं प्रशिक्षण

By: Narendra

Published: 26 Jun 2020, 02:04 AM IST

मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर).

किशनगढ़ के तिलोनिया गांव के वेयरफुट कॉलेज में देश के साथ ही सालों से विदेश की कई महिला सौलर उपकरण बनाना सीख रही हैं। देश और प्रदेश में ऐसे प्रशिक्षण कॉलेज की संख्या नाममात्र की है। ऐसे में यदि आत्मनिर्भर भारत की बात केवल कल्पना मात्र है। केंद्र के साथ ही राज्य सरकारों को सौलर उपकरण की नई इंडस्ट्रीज विकसित करनी होगी, ताकि स्थानीय लघु और कुटीर उद्योग को बढ़ावा मिले।

तिलोनिया में वर्ष 1989 में वेयरफुट कॉलेज में सौर ऊर्जा इकाई की शुरुआत हुई और काफी लम्बे समय तक यहां पर देश के विभिन्न राज्यों के गरीब और साक्षर परिवारों के युवकों को सौलर उपकरण बनाने का प्रशिक्षण दिया जाना शुरू किया गया। वर्ष 1996 में युवकों के साथ महिलाओं का भी गांव और ढाणी स्तर पर चयन किया जाने लगा और उन्हें प्रशिक्षण दिया जाने लगा। लेकिन वर्ष 2004 से देश और विदेशी महिलाओं को भी प्रशिक्षण दिया जाने लगा जो अभी भी वर्तमान में जारी है।


8 देश और 25 राज्यों की महिलाओं को प्रशिक्षण

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से इंडियन टेक्नीकल इकोनॉमिकल कॉरपोरेशन स्कीम के तहत यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वेयरफुट कॉलेज में दुनिया के 8 देशों और देश के 25 राज्यों की महिलाओं को वेयरफुट सौलर इंजीनियर के रूप में तैयार किया जा रहा है। लेटिन अमरीका के पेरू, चिली एवं ग्वाटेकाला देश की 10 महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है। इसी तरह अफ्रीका के आइवरी कोस्ट, नाइजीरिया, युगांडा और सूडान देश की 88 महिलाएं प्रशिक्षण ले रही है, जबकि देश के 25 राज्यों की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। वर्ष 1989 से अब तक यहां करीब 1200 से 1300 विदेशी महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी की है और देश की भी इतनी ही महिलाओं को ट्रेंड किया जा चुका है।


6 माह की ट्रेनिंग

प्रशिक्षित ट्रेनरों के माध्यम से यहां पर महिलाओं को 6 माह की ट्रेनिंग दी जाती है। यह ट्रेनिंग आवासीय है। यहां पर सौलर होम लाइटिंग सिस्टम (घरेलू सौर ऊर्जा प्रकाश इकाई), सौलर बिंदी लाइट और स्कूल एवं कॉलेजों में काम आने वाले सौलर प्रोजेक्टर भी बनाना सिखाया जाता है। यह सभी सौलर उपकरण सौर ऊर्जा के पैनल इत्यादि से चार्ज किए जा सकते हैं।


विलेज कमेटी करती है चयन

देश हो या फिर विदेश एक गांव की कमेटी ही प्रशिक्षण के लिए महिलाओं का चयन करती है। कमेटी अपने स्तर पर स्थानीय सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से गरीब और साक्षर एवं 35 साल की आयु से अधिक महिलाओं का चयन करती है और उन्हें ट्रेनिंग के लिए तिलोनिया भेजा जाता है। प्रशिक्षण के बाद स्थानीय स्तर पर ही सौलर प्लांट स्थापित किए जाकर इनकी देखभाल का जिम्मा इन प्रशिक्षित महिलाओं को देखकर अपने क्षेत्र के साथ ही महिला को आत्मनिर्भर बनाया जाता है।

Narendra Desk/Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned