परचुनी की दुकान से संसद तक का सफर

परचुनी की दुकान से संसद तक का सफर

Kali Charan kumar | Updated: 24 May 2019, 11:00:32 AM (IST) Kishangarh, Ajmer, Rajasthan, India

किसान परिवार से है भागीरथ चौधरी, कृषि और मार्बल ग्रेनाइट के कारोबार से भी जुड़े है चौधरी

कालीचरण
मदनगंज-किशनगढ़.
पुष्कर विधानसभा क्षेत्र स्थित मानपुरा की ढाणी के एक किसान परिवार में जन्में चौधरी का जीवन संघर्षपूर्ण रहा। वह युवा अवस्था में ही किशनगढ़ के गांधीनगर क्षेत्र में आकर बसें। चौधरी ने जीवन में कमाई की शुरुआत परचूनी की दुकान से की। पैसे की तंगी होने के कारण चौधरी ने शुरुआत में बेचने के लिए परचूनी का सामान भी उधार लेकर वर्ष 1974 में दुकान खोली और कामकाज शुरू किया। इसके बाद चौधरी ने कभी पीछे मुड कर नहीं देखा। आगे चलकर चौधरी मार्बल और ग्रेनाइट का कारोबार भी किया। वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया और मैदान में उतारा। चौधरी संगठन की सोच पर खरे उतरे और अपने पहले ही चुनाव में जीत दर्ज की। चौधरी दो बार विधायक रहे चुके है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भागीरथ चौधरी का टिकट काट कर विकास चौधरी को टिकट दिया। लेकिन विकास चौधरी चुनाव हार गए। आखिरकार भाजपा ने 2019 के लोकसभा के इस चुनाव में अजमेर सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर भागीरथ चौधरी को तोहफा दिया। वहीं चौधरी भी 4 लाख से अधिक मतों से जीत दर्ज कर दिल्ली संसद जाने के लिए अपने दरवाजे खोल लिए।
वर्ष 2003
भागीरथ चौधरी : 52673
नाथूराम सिनोदिया : 48447
भाजपा जीत का अंतर : 4226
वर्ष 2008
नाथूराम सिनोदिया : 65042
भागीरथ चौधरी : 55318
कांग्रेस जीत का अंतर : 9724
वर्ष 2013
भागीरथ चौधरी : 95384
नाथूराम सिनोदिया 64310
भाजपा जीत का अंतर : 31074
किसान परिवार में जन्में चौधरी
भागीरथ चौधरी का जन्म पुष्कर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मानपुरा की ढाणी में किसान परिवार में हुआ। चौधरी के पिता रामचंद्र चौधरी और माता का नाम दाखांदेवी है। रामचंद्र चौधरी खेती कार्य करके ही परिवार का भरण पोषण किया। चौधरी के एक बड़े भाई गोपीराम चौधरी और तीन बहनें भी है। चौधरी खुद चौथे नम्बर की संतान है। चौधरी का जन्म 1 जून 1954 को हुआ और शादी भंवरीदेवी से 3 जनवरी 1979 को हुआ। पत्नी भंवरीदेवी की मृत्यु के बाद चौधरी ने दुसरा विवाह अंजना चौधरी से किया है।
कृषि और मार्बल कारोबारी है चौधरी
अजमेर लोकसभा सीट से निर्वाचित हुए भाजपा प्रत्याशी भागीरथ चौधरी ने बी.ए. द्वितीय वर्ष तक की पढ़ाई की है। चौधरी ने बी.ए. की अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी नहीं की है। चौधरी के वर्तमान में 2 पुत्र सुभाष चौधरी एवं राजेश चौधरी एवं 2 पुत्रियां है। चौधरी कृषि, मार्बल, ग्रेनाइट, सेंड स्टोन, बागवानी और पशुपालन के कारोबारी है। चौधरी करोड़पति आसामी है। इनके पास 1 करोड़ 46 लाख 10 हजार नकद राशि है और 34427 ग्राम सोने के गहने और 5 किलोग्राम चांदी के गहने है। 6 करोड़ 58 लाख 48 हजार 231 कीमत की जमीनें खुद के नाम है। जबकि पत्नी के नाम 24 लाख 88 हजार 729 रुपए की सम्पति है और 70 हजार रुपए नकद है। साथ ही पत्नी के नाम 15 लाख 41 हजार के सोने के गहने है।
12 वीं और 14 वीं विधानसभा के सदस्य रहे चौधरी
भागीरथ चौधरी प्रदेश की 12 वीं और 14 वीं राजस्थान विधानसभा के निर्वाचित सदस्य (विधायक) रहे है। वर्ष 2004-2005 से 2008-2009 तक प्रदेश की प्राक्कलन समिति 'कÓ के सदस्य रहे, 2014-15 से 2018-19 तक पर्यावरण समिति के अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 2004 से वर्तमान तक भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य है और 2004 से 2008 तक प्रदेश भाजपा के उद्योग प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे है।
विधानसभा चुनाव 2018 में कटा था टिकट
भागीरथ चौधरी को पहली बार भाजपा ने वर्ष 2003 में टिकट दिया और विधासभा के रण में उतारा। चौधरी अपने पहले ही चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी नाथूराम सिनोदिया को 4226 मतों के अंतर से हराया। वर्ष 2008 में एक बार फिर भाजपा ने चौधरी पर दांव खेला और टिकट दिया। इस बार चौधरी कांग्रेस के प्रत्याशी नाथूराम सिनोदिया से 9724 मतों से पराजित हुए। वर्ष 2013 के चुनावों में भाजपा ने एक बार फिर चौधरी पर ही दांव खेला और टिकट देकर कांग्रेस प्रत्याशी नाथूराम सिनोदिया के सामने मैदान में उतारा। इस बार चौधरी ने एक बार फिर कांग्रेस प्रत्याशी नाथूराम सिनोदिया को 31074 मतों से हराया। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चौधरी का टिकट काट कर इनके स्थान पर नए चेहरे के रूप में विकास चौधरी को मैदान में उतारा। वहीं कांग्रेस ने भी नए चेहरे के रूप में नंदाराम थाकण को अपना उम्मीदवार बनाया। लेकिन इस बार भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव हारे और निर्दलीय प्रत्याशी सुरेश टांक ने जीत दर्ज की। इसके बाद भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अजमेर सीट से भागीरथ चौधरी को अपना उम्मीदवार बना कर मैदान में उतारा।
जब जीते तब बनी भाजपा सरकार
भागीरथ चौधरी वर्ष 2003 और 2013 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की और इन दोनोंं ही वर्ष में प्रदेश में भाजपा सरकार बनी। वर्ष 2008 में चौधरी चुनाव हारे तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी।
11 साल तक जाट महासभा के जिलाध्यक्ष भी रहे
भागीरथ चौधरी अजमेर जिला जाट महासभा के जिलाध्यक्ष भी रहे और 11 साल तक निर्विरोध चुने गए।
कबड्डी और वॉलीबाल पसींदीदा खेल
भाजपा के निर्वाचित प्रत्याशी भागीरथ चौधरी बालिका शिक्षा पर जोर देते है और मृत्युभोज पर रोक और शराबबंदी के लिए हमेशा प्रयासरत रहे है। चौधरी को कबड्डी और वॉलीबाल खेल में रूचि है।
विदेश भ्रमण भी कर चुके है चौधरी
भागीरथ चौधरी अपने कारोबार के चलते स्पेन, सिंगापुर, इटली, स्विट्जरलैंड और फ्रांस की यात्रा भी कर चुके है।

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